पश्चिम बंगाल में चुनावी हार के बाद Mamata Banerjee का बड़ा संदेश
बोलीं- जरूरत पड़ी तो खुद रंगूंगी पार्टी दफ्तर
कोलकाता। पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री Mamata Banerjee ने विधानसभा चुनाव में हार के बाद पार्टी संगठन को फिर से मजबूत करने का आह्वान किया है। शुक्रवार को कोलकाता में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ हुई अहम बैठक में Mamata Banerjee ने साफ कहा कि पार्टी को नए सिरे से खड़ा करना होगा और हर कार्यकर्ता को मैदान में उतरना होगा। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ी तो वह खुद भी पार्टी कार्यालयों को पेंट करने के लिए तैयार हैं।

बैठक के दौरान Mamata Banerjee ने कार्यकर्ताओं में जोश भरने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि TMC फिर से अपने सभी पार्टी दफ्तरों को खोलेगी, उन्हें रंगेगी और मजबूती के साथ जनता के बीच जाएगी। Mamata Banerjee ने यह भी कहा कि पार्टी किसी को जबरदस्ती रोकने में विश्वास नहीं रखती। जो लोग दूसरी पार्टियों में जाना चाहते हैं, वे पूरी तरह स्वतंत्र हैं।
इस बैठक में Mamata Banerjee के भतीजे और पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी भी मौजूद रहे। राजनीतिक रूप से यह बैठक काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि हालिया चुनाव नतीजों के बाद TMC के भीतर लगातार मंथन चल रहा है। Mamata Banerjee ने चुनाव परिणामों पर भी खुलकर अपनी बात रखी।
Mamata Banerjee ने कहा कि भले ही TMC को केवल 80 सीटें मिली हों, लेकिन यह जनादेश की लूट है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष नहीं रही। Mamata Banerjee ने कहा कि इन नतीजों से उनका हौसला टूटने वाला नहीं है और पार्टी एक बार फिर मजबूती से वापसी करेगी।
बैठक के दौरान फालता विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव के उम्मीदवार भी मौजूद रहे। दरअसल, फालता सीट पर 29 अप्रैल को मतदान हुआ था, लेकिन EVM में छेड़छाड़ के आरोपों के बाद चुनाव आयोग ने वहां दोबारा वोटिंग कराने का फैसला लिया। Mamata Banerjee ने इस मुद्दे को भी गंभीर बताते हुए कहा कि लोकतंत्र को बचाने के लिए निष्पक्ष चुनाव बेहद जरूरी हैं।

4 मई को आए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव परिणामों में भाजपा को 293 में से 207 सीटों पर जीत मिली थी, जबकि TMC केवल 80 सीटों पर सिमट गई। चुनाव नतीजों के बाद से ही Mamata Banerjee लगातार पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ बैठकें कर रही हैं। उनका उद्देश्य संगठन को टूटने से बचाना और कार्यकर्ताओं का मनोबल बनाए रखना है।
इसी बीच TMC ने चुनाव नतीजों को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया है। Mamata Banerjee की पार्टी का दावा है कि 31 सीटों पर जीत का अंतर उन वोटों से भी कम था, जिन्हें स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान हटाया गया था। पार्टी का कहना है कि यदि हटाए गए वोट शामिल होते तो नतीजे अलग हो सकते थे।

सुप्रीम Court ने सोमवार को सुनवाई के दौरान कहा कि यदि किसी सीट पर जीत का अंतर हटाए गए वोटों से कम है, तो संबंधित पक्ष नई याचिका दायर कर सकते हैं। इस मामले की सुनवाई जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमल्या बागची की बेंच कर रही है।
TMC सांसद और वरिष्ठ वकील कल्याण बनर्जी ने अदालत में कहा कि कई सीटों पर वोट हटाने की प्रक्रिया ने चुनाव परिणामों को प्रभावित किया है। Mamata Banerjee की पार्टी अब इन सीटों को लेकर कानूनी लड़ाई लड़ने की तैयारी में है।
चुनावी आंकड़ों पर नजर डालें तो पश्चिम बंगाल में 30 हजार से कम मार्जिन वाली 176 सीटों में भाजपा ने 128 सीटों पर जीत दर्ज की। वहीं 30 हजार से अधिक मार्जिन वाली 117 सीटों में भाजपा को 79 सीटें मिलीं। दूसरी ओर TMC की 44 सीटों पर जीत का अंतर 30 हजार से कम और 36 सीटों पर 30 हजार से अधिक रहा।
विश्लेषकों का कहना है कि Mamata Banerjee के लिए यह चुनावी झटका बड़ा जरूर है, लेकिन बंगाल की राजनीति में उनकी पकड़ अब भी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। Mamata Banerjee अभी भी राज्य की सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिनी जाती हैं और TMC का कोर वोट बैंक उनके साथ मजबूती से खड़ा माना जाता है।
राजनीतिक जानकारों के अनुसार Mamata Banerjee अब संगठन को फिर से सक्रिय करने, कार्यकर्ताओं को एकजुट रखने और भाजपा के खिलाफ आक्रामक रणनीति तैयार करने में जुट गई हैं। आने वाले उपचुनाव और कानूनी लड़ाई TMC की भविष्य की राजनीति तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
फिलहाल पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल तेज है और सभी की नजर Mamata Banerjee के अगले कदम पर टिकी हुई है। यह देखना दिलचस्प होगा कि चुनावी हार के बाद Mamata Banerjee किस तरह पार्टी को दोबारा खड़ा करती हैं और क्या TMC भविष्य में फिर से मजबूत वापसी कर पाएगी।
Read more : SIR का तीसरा चरण शुरू ,घर घर जाकर होगी वाटरलिस्ट की जाँच

