अल-नीनो का खतरा बढ़ा, भारत में कमजोर Monsoon और सूखे की आशंका
82% तक बढ़ी संभावना
नई दिल्ली। भारत में इस साल Monsoon को लेकर चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। सामान्य से कम बारिश के अनुमान के बीच अब अल-नीनो के एक्टिव होने की संभावना भी काफी बढ़ गई है। अमेरिकी मौसम एजेंसी ‘नेशनल ओशेनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन’ (NOAA) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार मई से जुलाई 2026 के बीच अल-नीनो के विकसित होने की संभावना 82 प्रतिशत तक पहुंच गई है। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि यह स्थिति बनी रहती है तो भारत में Monsoon कमजोर पड़ सकता है और कई राज्यों में सूखे जैसी स्थिति पैदा हो सकती है।

NOAA की रिपोर्ट के मुताबिक इस बार प्रशांत महासागर का तापमान सामान्य से लगभग 0.5 डिग्री सेल्सियस ज्यादा दर्ज किया गया है। समुद्र के तापमान में यह बढ़ोतरी अल-नीनो की शुरुआत का संकेत मानी जाती है। पिछले महीने तक इसकी संभावना 61 प्रतिशत थी, लेकिन अब यह बढ़कर 82 प्रतिशत हो गई है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अल-नीनो की स्थिति दिसंबर 2026 से फरवरी 2027 तक जारी रह सकती है। इसके ‘स्ट्रॉन्ग’ या ‘वेरी स्ट्रॉन्ग’ रहने की आशंका करीब 67 प्रतिशत बताई गई है।
भारतीय मौसम विभाग (IMD) के प्रमुख मृत्युंजय महापात्र ने कहा है कि अल-नीनो का सीधा असर भारत के Monsoon पर पड़ सकता है। इससे बारिश सामान्य से कम हो सकती है और देश में सूखे का खतरा बढ़ सकता है। खासकर उत्तर, पश्चिम और मध्य भारत के कई हिस्सों में इसका प्रभाव ज्यादा देखने को मिल सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि Monsoon कमजोर रहता है तो खेती, जलाशयों और बिजली उत्पादन पर भी असर पड़ेगा।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार अल-नीनो एक ऐसी मौसमी स्थिति होती है, जिसमें प्रशांत महासागर का पानी सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है। इससे हवा के बहाव और मौसम के पैटर्न में बड़ा बदलाव आता है। जब अल-नीनो सक्रिय होता है, तब Monsoon की हवाएं कमजोर पड़ जाती हैं और भारत की ओर आने वाली नमी कम हो जाती है। इसका परिणाम यह होता है कि Monsoon के दौरान सामान्य से कम बारिश होती है।
अल-नीनो का असर केवल भारत तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरी दुनिया के मौसम चक्र को प्रभावित करता है। भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया में जहां Monsoon कमजोर हो जाता है, वहीं कुछ क्षेत्रों में भारी बारिश और बाढ़ की स्थिति बन जाती है। इंडोनेशिया और उत्तरी ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में सूखे और जंगलों में आग का खतरा बढ़ जाता है। वहीं मध्य प्रशांत क्षेत्र में समुद्र का तापमान बढ़ने से चक्रवात और तेज बारिश की संभावना बढ़ जाती है।
भारत में पंजाब, हरियाणा और राजस्थान को इस बार सबसे ज्यादा संवेदनशील राज्यों में माना जा रहा है। मौसम विभाग के अनुसार अगस्त और सितंबर के दौरान इन राज्यों में सामान्य से कम बारिश हो सकती है। इससे खेती और जल संसाधनों पर गंभीर असर पड़ने की आशंका है। राजस्थान के कई हिस्सों में पहले से ही जल संकट की स्थिति बनी हुई है, ऐसे में कमजोर Monsoon से समस्या और बढ़ सकती है।

मध्य प्रदेश के इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, चंबल, जबलपुर, रीवा, शहडोल, सागर और नर्मदापुरम संभागों में भी सामान्य से कम बारिश होने का अनुमान जताया गया है। वहीं पश्चिम भारत के कुछ इलाकों में भी Monsoon कमजोर रह सकता है। हालांकि लद्दाख, तेलंगाना और राजस्थान के कुछ हिस्सों में अल-नीनो का असर अपेक्षाकृत कम रहने की संभावना है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अल-नीनो की स्थिति केवल बारिश को प्रभावित नहीं करती, बल्कि गर्मी भी बढ़ाती है। ऐसे में इस साल हीटवेव की घटनाएं ज्यादा देखने को मिल सकती हैं। तापमान सामान्य से अधिक रहने की संभावना है, जिससे बिजली की मांग और जल संकट दोनों बढ़ सकते हैं। यदि Monsoon सामान्य नहीं रहा तो इसका असर आम लोगों की जिंदगी और खाद्य उत्पादन पर भी देखने को मिलेगा।
इसी बीच ‘नेचर’ जर्नल में प्रकाशित एक नई स्टडी ने भी चिंता बढ़ा दी है। स्टडी के अनुसार दुनिया में कुल मिलाकर बारिश की मात्रा बढ़ रही है, लेकिन इसके बावजूद जमीन और इकोसिस्टम ज्यादा सूखे होते जा रहे हैं। इसका कारण यह है कि अब बारिश लंबे समय तक लगातार होने के बजाय कम समय में तेज तूफानी रूप में हो रही है। बारिश के बीच लंबे सूखे दौर आने लगे हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि बदलते जलवायु पैटर्न का असर Monsoon पर भी साफ दिखाई दे रहा है।
विशेषज्ञों ने किसानों और राज्यों को पहले से तैयारी करने की सलाह दी है। जल संरक्षण, सिंचाई प्रबंधन और फसल चयन पर विशेष ध्यान देने की जरूरत बताई जा रही है। यदि अल-नीनो का प्रभाव मजबूत रहता है, तो आने वाले महीनों में देश के कई हिस्सों में कृषि उत्पादन प्रभावित हो सकता है। अब सभी की नजर इस साल के Monsoon पर टिकी हुई है, क्योंकि यही आने वाले समय में देश की खेती और अर्थव्यवस्था की दिशा तय करेगा।
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