चुनाव आयोग के मुताबिक तीसरे चरण के पूरा होने के बाद हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को छोड़कर लगभग पूरे देश में SIR प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। इन तीन क्षेत्रों में मौसम और जनगणना के दूसरे चरण को देखते हुए फिलहाल कार्यक्रम घोषित नहीं किया गया है। आयोग ने कहा है कि बर्फबारी और मौसम की परिस्थितियां सामान्य होने के बाद वहां SIR की नई तारीखों की घोषणा की जाएगी।

चुनाव आयोग ने बताया कि तीसरे चरण में 3.94 लाख बूथ लेवल अधिकारी यानी BLO तैनात किए जाएंगे। इनके साथ राजनीतिक दलों की ओर से नियुक्त 3.42 लाख बूथ लेवल एजेंट यानी BLA भी प्रक्रिया में शामिल होंगे। ये अधिकारी और एजेंट घर-घर जाकर मतदाताओं की जानकारी का सत्यापन करेंगे।
दिल्ली में SIR प्रक्रिया पूरी होने के बाद अंतिम वोटर लिस्ट 7 अक्टूबर को जारी की जाएगी। चुनाव आयोग का कहना है कि मतदाता सूची को पूरी तरह पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाने के लिए यह अभियान बेहद जरूरी है।
चुनाव आयोग ने इससे पहले 24 जून 2025 को पूरे देश में SIR प्रक्रिया शुरू करने का आदेश जारी किया था। अब तक दो चरण पूरे हो चुके हैं। पहले चरण में बिहार में SIR कराया गया था। इसके बाद दूसरे चरण में उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, तमिलनाडु, केरल, गोवा, पुडुचेरी, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह तथा लक्षद्वीप समेत कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को कवर किया गया।
आयोग के अनुसार पहले और दूसरे चरण में करीब 59 करोड़ मतदाताओं का सत्यापन किया गया। इस दौरान लगभग 6.3 लाख BLO और 9.2 लाख BLA प्रक्रिया में शामिल हुए। अब तीसरे चरण के जरिए देश के बाकी बड़े हिस्से में मतदाता सूची को अपडेट किया जाएगा।

SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन चुनाव आयोग की एक विशेष प्रक्रिया है, जिसके तहत मतदाता सूची को अपडेट और शुद्ध किया जाता है। इसमें BLO और BLA घर-घर जाकर लोगों से जानकारी लेते हैं और फॉर्म भरवाते हैं। इस प्रक्रिया के जरिए 18 वर्ष से अधिक आयु वाले नए मतदाताओं के नाम जोड़े जाते हैं। वहीं जिन लोगों की मृत्यु हो चुकी है या जो किसी दूसरे क्षेत्र में शिफ्ट हो चुके हैं, उनके नाम सूची से हटाए जाते हैं।
इसके अलावा यदि किसी मतदाता के नाम, पते या अन्य जानकारी में गलती होती है तो उसे भी ठीक किया जाता है। आयोग का मानना है कि लंबे समय से कई मतदाता सूची में बदलाव जरूरी थे, इसलिए यह प्रक्रिया शुरू की गई।
SIR के दौरान मतदाताओं को कुछ जरूरी दस्तावेज भी दिखाने होते हैं। इनमें आधार कार्ड, जन्म प्रमाणपत्र, पासपोर्ट, 10वीं की मार्कशीट, सरकारी पहचान पत्र, स्थायी निवास प्रमाणपत्र, जाति प्रमाणपत्र और परिवार रजिस्टर जैसे दस्तावेज शामिल हैं। इसके अलावा NRC में नाम और जमीन या मकान आवंटन पत्र भी मान्य दस्तावेजों में शामिल हैं।
चुनाव आयोग ने बताया कि SIR का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी योग्य मतदाता सूची से बाहर न रहे और कोई भी अयोग्य व्यक्ति सूची में शामिल न हो। पिछले कई वर्षों में बड़ी संख्या में लोगों का माइग्रेशन हुआ है। कई लोगों के नाम दो अलग-अलग जगहों पर दर्ज हो गए हैं। वहीं कुछ मृत लोगों के नाम भी अब तक मतदाता सूची में बने हुए हैं।
आयोग का कहना है कि कई मामलों में विदेशी नागरिकों के नाम भी मतदाता सूची में पाए गए हैं, जिन्हें हटाना जरूरी है। इसी वजह से SIR को बड़े स्तर पर लागू किया जा रहा है ताकि चुनाव प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष बनी रहे।
SIR के दौरान यदि किसी व्यक्ति का नाम वोटर लिस्ट में नहीं मिलता है तो वह संबंधित फॉर्म भरकर अपना नाम जुड़वा सकता है। वहीं अगर किसी व्यक्ति का नाम दो जगह दर्ज है तो उसे एक स्थान से हटाना होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले चुनावों को देखते हुए यह प्रक्रिया बेहद महत्वपूर्ण है। इससे चुनाव आयोग को एक साफ और सटीक मतदाता सूची तैयार करने में मदद मिलेगी। साथ ही फर्जी वोटिंग और डुप्लीकेट नामों जैसी समस्याओं पर भी नियंत्रण पाया जा सकेगा।
फिलहाल चुनाव आयोग तीसरे चरण की तैयारियों में जुटा हुआ है और आने वाले दिनों में घर-घर जाकर सत्यापन प्रक्रिया शुरू की जाएगी। आयोग ने सभी मतदाताओं से अपील की है कि वे इस प्रक्रिया में सहयोग करें और सही जानकारी उपलब्ध कराएं ताकि मतदाता सूची पूरी तरह अपडेट और त्रुटिरहित बनाई जा सके।
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