NEET पेपर लीक के 4 आरोपी दिल्ली ले जाए गए, CBI करेगी आमने-सामने पूछताछ
चारों आरोपियों को बुधवार रात जयपुर के दुर्गापुरा स्थित एसीजेएम-4 जयपुर महानगर प्रथम के न्यायाधीश धर्मेंद्र कुमार शर्मा के आवास पर पेश किया गया था। इसके बाद कोर्ट ने उन्हें ट्रांजिट रिमांड पर सीबीआई के हवाले कर दिया। मीडिया को देखते ही सभी आरोपियों ने अपना चेहरा छिपा लिया। इसी दौरान आरोपी मांगीलाल ने मीडिया के सामने कहा कि इस मामले में बड़े लोगों को बचाया जा रहा है। उसके इस बयान के बाद मामले ने और ज्यादा तूल पकड़ लिया है।
पेपर लीक का मामला सामने आने के बाद सबसे पहले राजस्थान एसओजी यानी स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप ने जांच शुरू की थी। एसओजी ने कई संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की और उनके मोबाइल फोन तथा अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस जब्त किए थे। जांच के दौरान कई अहम सुराग सामने आए, जिसके बाद पूरे मामले को सीबीआई को सौंप दिया गया।

एसओजी के एडीजी विशाल बंसल ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया था कि जांच में यह सामने आया है कि परीक्षा से करीब 15 दिन से लेकर एक महीने पहले तक 150 पन्नों का एक तथाकथित “गेस पेपर” छात्रों के बीच सर्कुलेट किया गया था। बाद में जांच में पता चला कि इसी गेस पेपर के 120 से ज्यादा सवाल असली NEET-2026 परीक्षा में भी पूछे गए थे। इसके बाद पेपर लीक की आशंका और मजबूत हो गई।
सीबीआई अब इस पूरे नेटवर्क की तह तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। जांच एजेंसी आरोपियों से कई महत्वपूर्ण सवाल पूछ सकती है। इनमें यह पता लगाने की कोशिश होगी कि देश के अलग-अलग राज्यों से कौन-कौन लोग इस गिरोह में शामिल थे। साथ ही हर आरोपी की भूमिका क्या थी और किस स्तर पर पेपर लीक को अंजाम दिया गया।
इसके अलावा सीबीआई यह भी जांच कर रही है कि पेपर के बदले कितने करोड़ रुपए का लेन-देन हुआ। सूत्रों के अनुसार कई छात्रों और उनके परिवारों से भारी रकम वसूली गई थी। जांच एजेंसी अब बैंक ट्रांजेक्शन, ऑनलाइन पेमेंट और कैश लेन-देन की जानकारी जुटा रही है।
इस मामले में कोचिंग संस्थानों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई है। सूत्रों के मुताबिक कुछ कोचिंग सेंटरों के जरिए गेस पेपर छात्रों तक पहुंचाया गया था। इसी वजह से कई कोचिंग संस्थान भी अब जांच एजेंसियों के रडार पर हैं। सीबीआई आरोपियों से यह जानने की कोशिश करेगी कि किन संस्थानों ने इस पूरे नेटवर्क में सहयोग किया।
भास्कर को सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार NEET-2026 पेपर लीक का मास्टरमाइंड महाराष्ट्र के नासिक स्थित एक प्रिंटिंग प्रेस से जुड़ा हुआ है। बताया जा रहा है कि माफिया ने पेपर लीक को छिपाने के लिए उसे “गेस पेपर” का नाम दिया था, ताकि जांच एजेंसियों को भ्रमित किया जा सके।
एसओजी जांच में सामने आया कि नासिक के शुभम खैरनार नामक व्यक्ति ने प्रिंटिंग प्रेस से पेपर लीक कर उसे पुणे में बेचा। इसके बाद यह गेस पेपर राजस्थान समेत कई राज्यों में फैलाया गया। जांच एजेंसियों का दावा है कि यह नेटवर्क करीब 10 राज्यों तक फैला हुआ था।
मामले में अब तक करीब 150 अभ्यर्थियों और उनके परिजनों से पूछताछ की जा चुकी है। एसओजी ने कई इलेक्ट्रॉनिक सबूत भी जुटाए हैं, जिन्हें अब सीबीआई अपने साथ दिल्ली ले गई है। इन सबूतों में मोबाइल डेटा, चैट रिकॉर्ड, कॉल डिटेल और दस्तावेज शामिल हैं।
वहीं कुछ संदिग्धों को पूछताछ के बाद छोड़ भी दिया गया। इनमें विक्रम यादव, योगेश प्रजापत, संदीप हरितवाल, नीतेश अजमेरा, सत्यनारायण चौधरी, राकेश कुमार मंडावरिया, रजत कुमार, अमीत मीणा और रोहित मावलिया शामिल हैं। एसओजी ने इन सभी से करीब 24 घंटे तक पूछताछ की थी।
NEET-2026 परीक्षा रद्द होने के बाद देशभर के लाखों छात्रों और अभिभावकों में भारी नाराजगी है। कई छात्र दोबारा परीक्षा कराने की मांग कर रहे हैं। वहीं विपक्षी दल भी सरकार और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी NTA पर सवाल उठा रहे हैं।
फिलहाल सीबीआई की जांच जारी है और उम्मीद की जा रही है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं। जांच एजेंसियां अब पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी हैं ताकि पेपर लीक के पीछे शामिल सभी लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सके।
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