Supreme Court सख्त, खतरनाक कुत्तों को मारने की मंजूरी
आवारा कुत्तों पर बड़ा फैसला, सुरक्षा सबसे जरूरी: सुप्रीम कोर्ट
जस्टिस Vikram Nath, Sandeep Mehta और N. V. Anjaria की बेंच ने सुनवाई के दौरान देशभर में बढ़ते डॉग बाइट मामलों पर गंभीर चिंता जताई। अदालत ने कहा कि केवल राजस्थान के श्रीगंगानगर शहर में एक महीने के भीतर कुत्तों के काटने की 1084 घटनाएं दर्ज हुईं। इनमें कई छोटे बच्चों को गंभीर चोटें आईं और उनके चेहरे तक बुरी तरह जख्मी हो गए। वहीं तमिलनाडु में इस साल के शुरुआती चार महीनों में लगभग दो लाख डॉग बाइट केस सामने आए हैं, जो स्थिति की भयावहता को दर्शाते हैं।

कोर्ट ने कहा कि सार्वजनिक सुरक्षा किसी भी परिस्थिति में नजरअंदाज नहीं की जा सकती। नवंबर 2025 में दिए गए अपने अंतरिम आदेश को दोहराते हुए अदालत ने कहा कि स्कूलों, अस्पतालों, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और हाईवे जैसे सार्वजनिक स्थानों से आवारा कुत्तों को हटाया जाना जरूरी है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि पकड़े गए कुत्तों को शेल्टर होम में रखा जाए और बिना उचित प्रक्रिया के दोबारा सड़कों पर न छोड़ा जाए।
सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों और संबंधित एजेंसियों के लिए 9 महत्वपूर्ण निर्देश भी जारी किए। अदालत ने कहा कि सभी राज्य सरकारें Animal Welfare Board of India के नियमों को सख्ती से लागू करें। हर जिले में कम से कम एक पूरी तरह कार्यरत ABC सेंटर यानी एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटर स्थापित किया जाए। जिन इलाकों में आबादी अधिक है, वहां जरूरत के अनुसार अतिरिक्त सेंटर बनाए जाएं।
कोर्ट ने यह भी कहा कि एंटी रेबीज वैक्सीन और दवाइयों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करना राज्यों की जिम्मेदारी होगी। राष्ट्रीय राजमार्गों पर आवारा पशुओं की समस्या से निपटने के लिए National Highways Authority of India को विशेष कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं। अदालत ने कहा कि पुराने ट्रांसपोर्ट वाहनों का उपयोग कर हाईवे से आवारा पशुओं को हटाया जाए और इसके लिए निगरानी तंत्र भी विकसित किया जाए।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि जहां किसी कुत्ते में रेबीज हो या वह अत्यधिक खतरनाक साबित हो रहा हो, वहां कानून के तहत यूथेनेशिया यानी दया मृत्यु की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है ताकि आम लोगों की जान सुरक्षित रह सके। कोर्ट ने नगर निगम और सरकारी अधिकारियों को कानूनी सुरक्षा देने की भी बात कही ताकि आदेश लागू करने में उन्हें डर या दबाव का सामना न करना पड़े। अदालत ने कहा कि सामान्य परिस्थितियों में ऐसे अधिकारियों के खिलाफ FIR या सख्त कार्रवाई नहीं होनी चाहिए।
इस मामले की पिछली सुनवाई 29 जनवरी को हुई थी, जब कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। उस दौरान राज्यों, NHAI और AWBI ने अपने-अपने पक्ष रखे थे। कोर्ट ने तब यह भी कहा था कि यदि किसी आवारा कुत्ते के हमले में किसी व्यक्ति की मौत या गंभीर चोट होती है तो नगर निकायों के साथ-साथ डॉग फीडर्स की जिम्मेदारी भी तय की जा सकती है। अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा था कि उसकी बातों को मजाक समझना गलत होगा और जिम्मेदारी तय करने से कोर्ट पीछे नहीं हटेगा।
यह मामला 28 जुलाई 2025 को स्वतः संज्ञान से शुरू हुआ था, जब देशभर में आवारा कुत्तों के हमलों और मौतों की घटनाएं लगातार बढ़ रही थीं। इसके बाद 11 अगस्त 2025 को कोर्ट ने दिल्ली-NCR से आठ हफ्तों के भीतर सभी आवारा कुत्तों को पकड़कर शेल्टर होम में भेजने का आदेश दिया था। हालांकि विरोध के बाद 22 अगस्त को आदेश में बदलाव करते हुए कहा गया कि जिन कुत्तों में रेबीज नहीं है और जो आक्रामक नहीं हैं, उन्हें नसबंदी और टीकाकरण के बाद उसी इलाके में छोड़ा जा सकता है। बाद में यह मामला पूरे देश तक विस्तारित कर दिया गया।
Read more : SIR का तीसरा चरण शुरू ,घर घर जाकर होगी वाटरलिस्ट की जाँच


