Nepal flash floods death toll: 724 की मौत, 2,500 लापता; अब फिर बढ़ा भोटे कोशी नदी का पानी, 4 जिलों में अलर्ट जारी

Nepal Flood: 724 की मौत, 2,500 लापता; अब फिर बढ़ा भोटे कोशी नदी का पानी, 4 जिलों में अलर्ट जारी
काठमांडू, 30 अगस्त 2026: नेपाल में 26 अगस्त को आई भीषण फ्लैश फ्लड और भूस्खलन की त्रासदी में मृतकों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) के अनुसार अब तक 675 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि लगभग 2,400 से अधिक लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। इसी बीच भोटे कोशी नदी के जलस्तर में हुई हल्की बढ़ोतरी को देखते हुए प्रशासन ने एक नया अलर्ट जारी करते हुए बचाव दलों और स्थानीय निवासियों को सतर्क रहने की सलाह दी है।
कैसे हुई त्रासदी की शुरुआत
26 अगस्त 2026 की सुबह नेपाल के रसुवा, नुवाकोट, धादिंग, गोरखा, तनहूं, नवलपरासी और चितवन जिलों में करीब 72 किलोमीटर लंबे त्रिशूली नदी क्षेत्र में अचानक विनाशकारी फ्लैश फ्लड और मडस्लाइड्स ने दर्जनों बस्तियों को अपनी चपेट में ले लिया। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के अनुसार, यह आपदा तिब्बत क्षेत्र में एक ग्लेशियर से जुड़ी सुप्राग्लेशियल झील के अचानक फटने और उसका पानी बह निकलने के कारण हुई। इस बाढ़ ने चीन-नेपाल सीमा पर स्थित महत्वपूर्ण व्यापारिक केंद्र ग्यिरोंग पोर्ट परिसर को पूरी तरह तबाह कर दिया, जो दोनों देशों के बीच व्यापार और पर्यटन के लिए एक अहम प्रवेश द्वार माना जाता था। कई पीड़ितों के शव बाढ़ के तेज बहाव में 240 किलोमीटर दूर तक बहकर पड़ोसी भारत की सीमा में भी पहुंच गए।
मृतकों और लापता लोगों के आंकड़े
नेपाल पुलिस के एक बयान के मुताबिक, अब तक आठ प्रभावित जिलों से 675 शव बरामद किए जा चुके हैं। इनमें से सबसे ज्यादा 246 शव चितवन से, 165 शव पूर्वी नवलपरासी से, 63 शव पश्चिमी नवलपरासी से और 57 शव गोरखा जिले से बरामद हुए हैं। इसके अलावा धादिंग से 45, नुवाकोट से 51, तनहूं से 35 और रसुवा जिले से 13 शव निकाले गए हैं। इसके साथ ही 1,473 लोग घायल बताए गए हैं, जबकि करीब 2,400 से 2,498 के बीच लोग अब भी लापता हैं।
लापता लोगों की सूची में सिर्फ नेपाली नागरिक ही नहीं, बल्कि सैकड़ों विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार लापता विदेशियों में करीब 288 भारतीय नागरिक, 127 नेपाली पर्यटक, 90 अमेरिकी, 53 यूक्रेनी, 51 मलेशियाई, 35 ऑस्ट्रेलियाई और 33 ब्रिटिश नागरिक शामिल हैं, जबकि चीन के विदेश मंत्रालय ने भी करीब 100 चीनी नागरिकों के लापता होने की जानकारी दी है। स्वतंत्र बिजली उत्पादक संघ (Independent Power Producers’ Association) के अनुसार जलविद्युत परियोजनाओं में काम कर रहे लगभग 900 नेपाली कर्मचारी भी अब भी लापता हैं, जो इस आपदा के आर्थिक और मानवीय दोनों पहलुओं की गंभीरता को दर्शाता है।
सीमा पार तिब्बत क्षेत्र में भी इस आपदा का असर देखा गया, जहां चीन में कम से कम सात से सोलह लोगों की मौत की खबर है और सैकड़ों लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं, हालांकि वहां से आधिकारिक जानकारी धीमी गति से सामने आ रही है।
राहत और बचाव अभियान युद्धस्तर पर जारी
नेपाल सरकार ने इस आपदा से निपटने के लिए बड़े पैमाने पर सुरक्षा बलों को तैनात किया है। राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण के नेतृत्व में करीब 11,000 सुरक्षाकर्मियों को बचाव कार्य में लगाया गया है, जिनमें 5,000 से अधिक नेपाली सेना के जवान शामिल हैं। अब तक करीब 2,500 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है, जिनमें 163 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। हालांकि लगातार हो रही रुक-रुक कर बारिश के कारण बचाव अभियान में मुश्किलें आ रही हैं।
नेपाल के मौसम विभाग ने कोशी, बागमती और गंडकी प्रांतों के पहाड़ी और पर्वतीय इलाकों के साथ-साथ कर्णाली और लुम्बिनी व सुदूरपश्चिम प्रांत के तराई क्षेत्रों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार रसुवा के भोटे कोशी बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में मध्यम से भारी बारिश होने की आशंका है, जिससे बचाव अभियान और प्रभावित हो सकता है।
भोटे कोशी नदी में जलस्तर बढ़ने से नया अलर्ट
रविवार सुबह राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण ने भोटे कोशी नदी में जलस्तर में मामूली बढ़ोतरी की जानकारी सोशल मीडिया के जरिए साझा करते हुए रसुवा, नुवाकोट, धादिंग और चितवन जैसे नदी किनारे बसे इलाकों में रहने वाले लोगों, बचावकर्मियों और आम नागरिकों से सतर्क रहने की अपील की है। यह चेतावनी इससे पहले जारी की गई सतर्कता सूचना के बाद जारी की गई है, जिससे साफ है कि प्रभावित क्षेत्र में खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है।
पुनर्निर्माण की भारी चुनौती
नेपाल के वित्त मंत्री स्वर्णिम वागले ने रॉयटर्स को दिए एक बयान में कहा कि इस आपदा से हुए नुकसान के पुनर्निर्माण पर करीब 4 से 5 अरब अमेरिकी डॉलर खर्च होने का प्रारंभिक अनुमान है, हालांकि नुकसान का पूरा आकलन अभी जारी है। यह राशि नेपाल की कुल अर्थव्यवस्था के करीब दसवें हिस्से के बराबर है, जो इस त्रासदी की आर्थिक गंभीरता को दर्शाती है। इसके अलावा, इस बाढ़ से प्रभावित बिजली परियोजनाएं नेपाल की कुल विद्युत उत्पादन क्षमता के 12 प्रतिशत से अधिक हिस्से के लिए जिम्मेदार हैं, जिससे देश में ऊर्जा आपूर्ति पर भी दीर्घकालिक असर पड़ सकता है।
अंतरराष्ट्रीय सहायता और भारत की भूमिका
इस विकट आपदा में भारत ने भी मानवीय सहायता के तौर पर नेपाल का साथ दिया है। भारत ने अब तक नेपाल को 11 टन मानवीय सहायता सामग्री लेकर चौथी उड़ान भेजी है, जबकि भारत की एक तकनीकी टीम बाढ़ प्रभावित जलविद्युत सुरंगों का सर्वेक्षण करने के लिए भी नेपाल पहुंची है। भारत के विदेश मंत्रालय के अनुसार अब तक 108 भारतीय नागरिकों को नेपाल से सुरक्षित निकाला जा चुका है। इसके अलावा अमेरिका ने भी बचाव कार्यों के लिए 5 लाख डॉलर की सहायता राशि देने की घोषणा की है।
आगे की राह
नेपाल में इस भीषण त्रासदी ने न केवल हजारों परिवारों को प्रभावित किया है, बल्कि देश के बुनियादी ढांचे और अर्थव्यवस्था पर भी गहरा असर डाला है। बचाव कार्य अब भी युद्धस्तर पर जारी है, लेकिन लगातार बदलते मौसम और नदी के जलस्तर में उतार-चढ़ाव के कारण चुनौतियां कम नहीं हो रही हैं। आने वाले दिनों में लापता लोगों की तलाश और पुनर्वास कार्य नेपाल सरकार और अंतरराष्ट्रीय समुदाय दोनों के लिए एक बड़ी परीक्षा साबित होंगे।
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