जम्मू-कश्मीर विधानसभा में पूर्ण राज्य के दर्जे की मांग का प्रस्ताव पास, BJP विधायकों का हंगामा और वॉकआउट

जम्मू-कश्मीर। जम्मू-कश्मीर विधानसभा ने सोमवार को केंद्र सरकार से राज्य का पूर्ण राज्य का दर्जा जल्द बहाल करने की मांग वाला प्रस्ताव पास कर दिया। प्रस्ताव मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने पेश किया था। इस दौरान विपक्षी भाजपा ने जोरदार विरोध किया और सदन से वॉकआउट कर दिया। प्रस्ताव ध्वनिमत से पारित हुआ।
प्रस्ताव में क्या है
प्रस्ताव में केंद्र सरकार से जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा तत्काल बहाल करने की मांग की गई है। सदन ने इसे केंद्र सरकार को भेजने का फैसला भी किया।
उमर अब्दुल्ला ने यह प्रस्ताव पिछले शुक्रवार को विधानसभा में रखा था। लेकिन कई सदस्यों ने इस मुद्दे पर बोलने की इच्छा जताई, जिसके बाद इसे सोमवार तक के लिए टाल दिया गया था।
प्रस्ताव में विधानसभा की ओर से पहले पारित दो प्रस्तावों का भी जिक्र किया गया है:
- 26 जून 2000 का प्रस्ताव: इसमें 9 अगस्त 1953 से पहले की स्थिति के मुताबिक ज्यादा स्वायत्तता बहाल करने की मांग की गई थी।
- 6 नवंबर 2024 का प्रस्ताव: इसमें जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा बहाल करने की मांग की गई थी।
संशोधन वापस लेने की अपील
सोमवार को बहस के दौरान सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस समेत कई सदस्यों ने प्रस्ताव में विशेष दर्जा बहाल करने की मांग भी जोड़ने के लिए संशोधन पेश किए। इस पर उमर अब्दुल्ला ने सदस्यों से संशोधन वापस लेने की अपील की।
उन्होंने कहा कि सदस्य भाजपा की बनाई योजना में फंस गए हैं और ऐसे संशोधन लेकर आए हैं, जिससे भाजपा को प्रस्ताव का विरोध करने का मौका मिलेगा। उमर ने कहा कि विशेष दर्जे के मुद्दे पर विधानसभा पहले ही दो बार प्रस्ताव पारित कर चुकी है। उन्होंने याद दिलाया कि 2024 में सरकार बनने के बाद भी ऐसा प्रस्ताव पारित किया गया था और केंद्र से 2019 से पहले हासिल विशेष प्रावधान बहाल करने की मांग पहले ही की जा चुकी है।
मुख्यमंत्री की अपील के बाद विधानसभा अध्यक्ष ने संशोधन पेश करने वाले आठों विधायकों से पूछा कि क्या वे अपने संशोधन पर जोर नहीं देंगे। सभी ने सहमति जताई। इसके बाद अध्यक्ष ने प्रस्ताव को मतदान के लिए रखा।
भाजपा विधायकों का विरोध
प्रस्ताव पर बहस के दौरान जब सत्तारूढ़ दल के कई सदस्यों ने संशोधन पेश किए, तो मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सदन में अपनी बात रखते हुए उनसे संशोधन वापस लेने की अपील की। मुख्यमंत्री की इस अपील के बाद विधानसभा अध्यक्ष ने संशोधन पेश करने वाले आठों विधायकों से पूछा कि क्या वे अपने संशोधन पर जोर नहीं देंगे। सभी आठ विधायकों ने इस पर सहमति जताई और अपने संशोधन पर जोर न देने की बात कही।
इसके बाद अध्यक्ष ने मूल प्रस्ताव को मतदान के लिए सदन के सामने रखा। लेकिन इस पूरी प्रक्रिया के दौरान सदन के भीतर भाजपा विधायकों का विरोध लगातार जारी रहा। भाजपा विधायक सदन के वेल में पहुंचकर नारेबाजी करते रहे, कार्यवाही से जुड़े कागज फाड़े और समानांतर कार्यवाही चलाने की भी कोशिश की। जब मतदान की प्रक्रिया शुरू हुई, तो भाजपा विधायकों ने विरोध जताते हुए सदन से वॉकआउट कर दिया।
भाजपा विधायकों के बाहर जाने के बावजूद सदन की कार्यवाही आगे बढ़ी और प्रस्ताव ध्वनिमत से पारित हो गया। यानी सदन में मौजूद सदस्यों की आवाज के आधार पर प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई और इसे केंद्र सरकार को भेजने का फैसला लिया गया।
अपने विरोध पर सफाई देते हुए भाजपा ने कहा कि प्रस्ताव में स्वायत्तता और विशेष दर्जे का जिक्र किया जाना संविधान का अपमान है। पार्टी ने साफ किया कि वह सदन में इस मुद्दे पर न तो चर्चा होने देगी और न ही इससे जुड़ा कोई प्रस्ताव पारित होने देगी।

