अमित शाह की NCORD बैठक नशा-विरोधी महाअभियान: एक नई दिशा, एक नई शुरुआत
6 जून 2026 को, जब पूरा विश्व अंतर्राष्ट्रीय नशा निरोधक दिवस मना रहा था, भारत ने इस अवसर पर एक ऐतिहासिक कदम उठाया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नई दिल्ली के विज्ञान भवन में नार्को-समन्वय केंद्र (NCORD) की 10वीं शीर्ष-स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। यह बैठक महज एक सरकारी आयोजन नहीं थी — यह उस संकल्प का प्रतीक थी जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने नशामुक्त राष्ट्र बनाने के लिए ली है।
नशे की लत आज भारत की युवा पीढ़ी के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। पंजाब से लेकर मणिपुर तक, मुंबई की गलियों से लेकर उत्तर-पूर्व के सुदूर गांवों तक — ड्रग्स का जाल फैलता जा रहा है। ऐसे में इस बैठक का महत्व और भी बढ़ जाता है।
NCORD क्या है? — एक परिचय
नार्को-समन्वय केंद्र (NCORD) भारत सरकार का वह तंत्र है जो नशीली दवाओं की तस्करी और दुरुपयोग से निपटने के लिए विभिन्न मंत्रालयों, राज्य सरकारों और प्रवर्तन एजेंसियों के बीच समन्वय सुनिश्चित करता है। इसकी स्थापना 2019 में की गई थी और तब से यह देश के नशा-विरोधी अभियान की रीढ़ बन गया है,इस बैठक में 44 केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों के प्रतिनिधियों के साथ-साथ राज्य सरकारों और ड्रग कानून प्रवर्तन एजेंसियों के 108 प्रतिनिधि शामिल हुए। यह ‘संपूर्ण सरकार’ दृष्टिकोण दर्शाता है कि भारत इस समस्या को कितनी गंभीरता से ले रहा है।
विजन डॉक्यूमेंट 2026-2029: एक व्यापक रोडमैप
इस बैठक की सबसे बड़ी उपलब्धि रही — ‘नार्कोटिक्स कंट्रोल विजन डॉक्यूमेंट 2026-2029’ का विमोचन। यह दस्तावेज़ केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों, ड्रग कानून प्रवर्तन एजेंसियों और अन्य हितधारकों के साथ व्यापक परामर्श के बाद तैयार किया गया है।
यह विजन डॉक्यूमेंट तीन प्रमुख स्तंभों पर आधारित है:
1. मांग में कमी (Demand Reduction): लोगों को नशे की ओर जाने से रोकना — जागरूकता अभियान, स्कूल-कॉलेज में शिक्षा और सामुदायिक कार्यक्रमों के माध्यम से।
2. आपूर्ति में कमी (Supply Reduction): ड्रग तस्करी नेटवर्क को ध्वस्त करना, सीमाओं पर निगरानी बढ़ाना और नार्को-कार्टेल को जड़ से खत्म करना।
3. पुनर्वास और उपचार (Rehabilitation): जो लोग नशे की गिरफ्त में आ चुके हैं, उन्हें समाज की मुख्यधारा में वापस लाना।
इस दस्तावेज़ में सिंथेटिक ड्रग्स की बढ़ती चुनौती और डार्कनेट-आधारित ड्रग तस्करी से निपटने की रणनीतियां भी शामिल हैं। यह विजन डॉक्यूमेंट नीति निर्माण और कार्यान्वयन के लिए एक मार्गदर्शक ढांचे के रूप में काम करेगा।
ऑनलाइन ड्रग डिस्पोजल पखवाड़ा: ₹6,000 करोड़ के नशे का नाश
इस बैठक में एक और ऐतिहासिक कदम उठाया गया — ‘ऑनलाइन ड्रग डिस्पोजल पखवाड़ा अभियान’ का शुभारंभ। इस अभियान के तहत देशभर में लगभग 2,09,500 किलोग्राम जब्त नशीले पदार्थ, जिनकी कीमत करीब ₹6,000 करोड़ है, को कानूनी प्रावधानों के अनुसार नष्ट किया जाएगा।
यह अभियान न केवल इस बात का प्रतीक है कि सरकार तस्करों से बरामद नशे को भी सख्ती से निपटाती है, बल्कि यह एक सशक्त संदेश भी है कि भारत में ड्रग माफिया का कोई भविष्य नहीं है। जब देश के सर्वोच्च स्तर पर इतनी बड़ी मात्रा में नशे को नष्ट किया जाता है, तो समाज में भी एक सकारात्मक संदेश जाता है
नए NCB कार्यालय: जम्मू और गुवाहाटी में नई ताकत
इस अवसर पर अमित शाह ने जम्मू और गुवाहाटी में नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) के नवनिर्मित जोनल कार्यालयों का भी उद्घाटन किया। इन दोनों स्थानों का चुनाव रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
जम्मू-कश्मीर पाकिस्तान की सीमा से सटा हुआ है, जहां से नशे की तस्करी होती रही है। वहीं गुवाहाटी उत्तर-पूर्व भारत का प्रवेश द्वार है — जहां म्यांमार और अन्य दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों से ड्रग्स की आमद की समस्या रही है। इन क्षेत्रों में NCB की मजबूत उपस्थिति से सीमापार तस्करी पर अंकुश लगेगा।
अमित शाह का संदेश: ‘#NashaMuktBharat’
बैठक से पहले गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया पर ‘#NashaMuktBharat’ हैशटैग के साथ संदेश दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत ने नशे के खिलाफ सबसे मजबूत लड़ाई छेड़ी है — नार्को-कार्टेल को बेरहमी से खत्म करते हुए और पीड़ित व्यक्तियों को देखभाल व सहानुभूति के साथ ठीक करते हुए।
यह संदेश इस बात को दर्शाता है कि सरकार का दृष्टिकोण द्विआयामी है — एक तरफ तस्करों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और दूसरी तरफ नशे के शिकार लोगों के प्रति संवेदनशीलता। यह ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति को मानवीय चेहरा देता है।
चुनौतियां: सिंथेटिक ड्रग्स और डार्कनेट
21वीं सदी में नशे की तस्करी का स्वरूप बदल गया है। पारंपरिक हेरोइन और अफीम की जगह अब सिंथेटिक ड्रग्स जैसे मेथाम्फेटामाइन, फेंटेनाइल और अन्य ‘डिज़ाइनर ड्रग्स’ ने ले ली है। ये दवाएं प्रयोगशालाओं में बनाई जाती हैं और इनका पता लगाना काफी कठिन होता है।
इसके अलावा, डार्कनेट के माध्यम से ड्रग्स की ऑनलाइन बिक्री एक नई चुनौती बनकर उभरी है। क्रिप्टोकरेंसी के उपयोग से भुगतान अज्ञात रहता है और डिलीवरी कूरियर के माध्यम से होती है। इन उभरती चुनौतियों से निपटने के लिए विजन डॉक्यूमेंट में साइबर फोरेंसिक क्षमताओं को मजबूत करने और डिजिटल तस्करी नेटवर्क को ध्वस्त करने की रणनीति शामिल है।
NCB वार्षिक रिपोर्ट 2025: उपलब्धियों का लेखा-जोखा
इस बैठक में नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो की वार्षिक रिपोर्ट 2025 भी जारी की गई। यह रिपोर्ट पिछले वर्ष की उपलब्धियों का लेखा-जोखा प्रस्तुत करती है और आगे की रणनीति के लिए आधार तैयार करती है। इसमें जब्ती के आंकड़े, गिरफ्तारियां, अदालती मामलों की प्रगति और पुनर्वास कार्यक्रमों की स्थिति शामिल होती है,NCB की कार्यकुशलता में पिछले कुछ वर्षों में उल्लेखनीय सुधार आया है। नई तकनीकों और बेहतर अंतर-एजेंसी समन्वय की बदौलत बड़े पैमाने पर ड्रग नेटवर्क का भंडाफोड़ किया गया है।
पुनर्वास: समाज का दायित्व
केवल तस्करों को पकड़ना और नशा नष्ट करना पर्याप्त नहीं है। जो लोग नशे की गिरफ्त में आ चुके हैं, उनका पुनर्वास उतना ही जरूरी है। इस विजन डॉक्यूमेंट में उपचार सुविधाओं और पुनर्वास सेवाओं को मजबूत बनाने का स्पष्ट ढांचा दिया गया है।
देशभर में डी-एडिक्शन सेंटर्स की संख्या बढ़ाना, परामर्श सेवाएं सुलभ बनाना और समुदाय-आधारित कार्यक्रमों को प्रोत्साहन देना — ये सभी पहलू इस रोडमैप का हिस्सा हैं। छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में भी पुनर्वास केंद्रों की पहुंच सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है।
निष्कर्ष: एक समग्र और दृढ़ प्रतिबद्धता
NCORD की 10वीं बैठक महज एक प्रशासनिक कार्यक्रम नहीं थी। यह भारत की उस दृढ़ प्रतिबद्धता का प्रतीक है जो नशे के खिलाफ हर मोर्चे पर लड़ने की है। 44 मंत्रालयों की एकजुटता, ₹6,000 करोड़ के नशे को नष्ट करने का साहस, नया विजन डॉक्यूमेंट, नए NCB कार्यालय — ये सब मिलकर एक संपूर्ण अभियान की तस्वीर बनाते हैं।
प्रधानमंत्री मोदी की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति और गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में चल रहा यह नशा-विरोधी महाअभियान उस दिन अपना लक्ष्य पाएगा जब भारत का हर युवा नशे से दूर, स्वस्थ और उज्जवल जीवन जिएगा। यह केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है — यह हम सभी का कर्तव्य है
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