जयपुर जेल प्रहरी गिरफ्तार: जयपुर पुलिस ने अजमेर की हाई सिक्योरिटी जेल में तैनात एक प्रहरी को कथित तौर पर अवैध वसूली गैंग से जुड़े होने के मामले में गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, आरोपी पर जेल में बंद गैंग के सदस्यों तक सुविधाएं पहुंचाने और उनके लिए रकम लेने का आरोप है। मामले में विदेश में मौजूद गैंगस्टर्स से संपर्क की जानकारी भी सामने आने की बात कही गई है।
दौलतपुरा थाना पुलिस ने आरोपी को कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे दो दिन के पुलिस रिमांड पर लिया गया। पुलिस अब आरोपी से गैंग के नेटवर्क, पैसों के लेनदेन और जेल के भीतर उसके कथित संपर्कों को लेकर पूछताछ कर रही है।
नोट: इस खबर में लगाए गए आरोप पुलिस की जांच और पूछताछ में सामने आई जानकारी पर आधारित हैं। मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
जयपुर जेल प्रहरी गिरफ्तार
जयपुर जेल प्रहरी गिरफ्तार मामले में आरोपी कौन?
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपी की पहचान धारा सिंह चौहान, निवासी राहवास, दौसा के रूप में हुई है। उसकी उम्र करीब 32 वर्ष बताई गई है।
धारा सिंह अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में प्रहरी के पद पर तैनात था। पुलिस का कहना है कि वह पिछले कुछ महीनों से कथित तौर पर अवैध वसूली करने वाले गैंग के संपर्क में था।
जांच में यह भी पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि जेल प्रहरी की गैंग के अन्य सदस्यों से किस तरह बातचीत होती थी और जेल में बंद आरोपियों तक किस प्रकार की सुविधाएं पहुंचाई जाती थीं।
हथियार बरामद होने से शुरू हुई जांच
पूरे मामले की शुरुआत दौलतपुरा थाना क्षेत्र में हुई पुलिस कार्रवाई से हुई। पुलिस ने 6 अगस्त को नाकाबंदी के दौरान एक संदिग्ध कार को रोका था।
तलाशी में कार से दो कारतूस और एक चाकू मिलने का दावा किया गया। इसके बाद कार सवार संदीप सिंह निर्वाण, निवासी बबाई, झुंझुनूं को गिरफ्तार किया गया।
पुलिस ने हथियार और कार को जब्त कर आरोपी से पूछताछ शुरू की। इसी पूछताछ के दौरान पुलिस को कथित अवैध वसूली गैंग से जुड़े नेटवर्क के बारे में जानकारी मिली।
पूछताछ में पैसों के लेनदेन का खुलासा
पुलिस के मुताबिक, पूछताछ के दौरान संदीप सिंह ने खुद को कथित अवैध वसूली गैंग से जुड़ा बताया। उसने यह भी बताया कि उसे कुछ दिन पहले वसूली के 1.50 लाख रुपये मिले थे।
पुलिस जांच के अनुसार, इस रकम में से 20 हजार रुपये सोहन सिंह नाम के परिचित को दिए गए थे। पुलिस ने सोहन सिंह को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया।
पूछताछ में सामने आया कि कथित तौर पर ये 20 हजार रुपये जेल प्रहरी धारा सिंह के कहने पर लिए गए थे। बाद में रकम ऑनलाइन माध्यम से धारा सिंह तक पहुंचाए जाने की बात सामने आई।
जेल प्रहरी तक कैसे पहुंची रकम?
पुलिस के अनुसार, सोहन सिंह से पूछताछ के बाद धारा सिंह से भी पूछताछ की गई। पुलिस का दावा है कि पूछताछ में उसने कथित तौर पर स्वीकार किया कि रकम गैंग के एक सदस्य की ओर से भेजी गई थी।
बताया गया कि पैसे जेल में बंद गैंग के साथियों के खर्च और उन्हें कथित सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए भेजे जाते थे।
अब पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि रकम कितनी बार और किन-किन माध्यमों से पहुंचाई गई। इसके साथ ही बैंक ट्रांजेक्शन और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड की भी जांच की जा सकती है।
पिछले कुछ महीनों से गैंग के संपर्क में होने का आरोप
दौलतपुरा थाना पुलिस के अनुसार, आरोपी धारा सिंह 2018 बैच का बताया गया है और वर्ष 2019 में जेल प्रहरी के पद पर नियुक्त हुआ था।
पुलिस जांच में सामने आया कि अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में ड्यूटी के दौरान वह कथित तौर पर अवैध वसूली गैंग के संपर्क में आया। इसके बाद मार्च से उसके गैंग के साथ जुड़कर काम करने का आरोप है।
पुलिस का कहना है कि पैसे के बदले जेल में बंद गैंग के सदस्यों को कथित तौर पर सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती थीं।
करीब 50 हजार रुपये लेने का दावा
पुलिस के अनुसार, पूछताछ के दौरान आरोपी ने अब तक करीब 50 हजार रुपये लेने की बात स्वीकार की है।
हालांकि, पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि वास्तव में कितनी रकम का लेनदेन हुआ और इसमें कितने लोग शामिल थे। जांच के दौरान बैंक खातों, ऑनलाइन ट्रांजेक्शन और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड खंगाले जाने की संभावना है।
यदि जांच में अन्य लोगों की भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।
जेल की गतिविधियों की जानकारी बाहर भेजने का शक
जांच में पुलिस को यह भी शक है कि आरोपी जेल में होने वाली गतिविधियों से संबंधित जानकारी कथित तौर पर गैंग के लोगों तक पहुंचाता था।
पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि किस तरह की जानकारी बाहर भेजी जाती थी और इस नेटवर्क में जेल के अंदर या बाहर और कौन-कौन लोग शामिल थे।
यह भी जांच का विषय है कि आरोपी ने जेल में बंद कैदियों को किस प्रकार की सुविधाएं उपलब्ध कराईं और क्या इसके लिए नियमित रूप से पैसे लिए जाते थे।
विदेश में बैठे गैंगस्टर्स से कनेक्शन की जांच
मामले की जांच अब कथित अंतरराष्ट्रीय संपर्कों तक भी पहुंच रही है। पुलिस को विदेश में बैठे गैंगस्टर्स से आरोपी के संपर्क में होने के इनपुट मिलने की बात कही गई है।
जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि जेल प्रहरी का विदेश में बैठे किसी गैंग सदस्य से सीधा संपर्क था या वह किसी स्थानीय व्यक्ति के माध्यम से उनसे जुड़ा था।
इस संबंध में मोबाइल फोन, कॉल रिकॉर्ड, सोशल मीडिया संपर्क और वित्तीय लेनदेन जैसे पहलुओं की जांच महत्वपूर्ण हो सकती है।
पुलिस के मुताबिक, आरोपी प्रहरी कथित तौर पर जेल में बंद गैंग के सदस्यों को सुविधाएं उपलब्ध कराता था।
हाई सिक्योरिटी जेल में सुरक्षा व्यवस्था बेहद महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में किसी कर्मचारी पर जेल के भीतर बंद आरोपियों को अवैध तरीके से मदद पहुंचाने का आरोप सामने आना गंभीर मामला माना जा रहा है।
पुलिस अब यह जांच करेगी कि किन कैदियों को कथित रूप से फायदा पहुंचाया गया और उन्हें किस तरह की सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं।
साथी को प्रोडक्शन वारंट पर लेने की तैयारी
पुलिस मामले से जुड़े अन्य आरोपियों से भी पूछताछ की तैयारी कर रही है। जांच में सामने आए एक आरोपी को जेल से प्रोडक्शन वारंट पर लाकर पूछताछ किए जाने की संभावना है।
पूछताछ के जरिए पुलिस गैंग के पूरे नेटवर्क, पैसों के स्रोत और जेल के अंदर कथित गतिविधियों के बारे में जानकारी जुटाने का प्रयास करेगी।
पुलिस रिमांड में खुल सकते हैं कई राज
जयपुर जेल प्रहरी गिरफ्तार मामले में आरोपी को दो दिन के पुलिस रिमांड पर लिया गया है। इस दौरान पुलिस कई बिंदुओं पर पूछताछ कर सकती है।
मुख्य तौर पर जांच इन सवालों पर केंद्रित रह सकती है:
गैंग के संपर्क में आरोपी कब आया?
अब तक कितनी रकम का लेनदेन हुआ?
रकम किन लोगों के जरिए पहुंचाई गई?
जेल में किन बंद आरोपियों को कथित सुविधाएं दी गईं?
जेल से किस तरह की जानकारी बाहर पहुंचाई गई?
विदेश में बैठे गैंगस्टर्स से संपर्क कैसे हुआ?
इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं?
इन सवालों के जवाब मिलने के बाद मामले की तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।
जयपुर जेल प्रहरी गिरफ्तार
जेल सुरक्षा व्यवस्था पर भी उठे सवाल
इस मामले ने हाई सिक्योरिटी जेलों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। जेल में तैनात कर्मचारियों की भूमिका और कैदियों से उनके संपर्क की निगरानी बेहद अहम होती है।
अगर जांच में आरोप सही साबित होते हैं तो यह मामला सिर्फ एक कर्मचारी तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि जेल के भीतर गैंग के नेटवर्क और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच हो सकती है।
फिलहाल पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है और मामले में आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों के आधार पर होगी।
जयपुर जेल प्रहरी गिरफ्तार: मामले की 10 बड़ी बातें
अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल के एक प्रहरी को गिरफ्तार किया गया।
आरोपी का नाम धारा सिंह चौहान बताया गया है।
पुलिस के मुताबिक आरोपी कथित अवैध वसूली गैंग के संपर्क में था।
जेल में बंद गैंग के सदस्यों को सुविधाएं देने का आरोप है।
करीब 50 हजार रुपये लेने की बात पूछताछ में सामने आने का पुलिस का दावा है।
6 अगस्त को संदिग्ध कार से दो कारतूस और चाकू मिलने के बाद जांच आगे बढ़ी।
पुलिस ने कार सवार संदीप सिंह को गिरफ्तार किया था।
20 हजार रुपये के कथित ऑनलाइन लेनदेन की कड़ी से जेल प्रहरी तक जांच पहुंची।
विदेश में बैठे गैंगस्टर्स से संपर्क की भी जांच की जा रही है।
आरोपी को दो दिन के पुलिस रिमांड पर लेकर पूछताछ की जा रही है।