NEET पेपर लीक केस: राजस्थान के टीचर तक ऐसे पहुंची PDF, CBI जांच में सामने आई पूरी कड़ी
NEET पेपर लीक केस: राजस्थान के सीकर में NEET UG 2026 परीक्षा से जुड़े कथित पेपर लीक मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की चार्जशीट में कई अहम जानकारियां सामने आने का दावा किया गया है। जांच के अनुसार, परीक्षा समाप्त होने के कुछ समय बाद ही सीकर के एक केमिस्ट्री शिक्षक को दो PDF फाइलें मिली थीं। शिक्षक ने जब इन फाइलों में मौजूद सवालों की तुलना परीक्षा में पूछे गए प्रश्नों से की तो कई सवालों के मेल खाने का दावा सामने आया।
इसके बाद शिक्षक ने मामले की जानकारी राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) को ईमेल के जरिए दी और संबंधित PDF जांच एजेंसी को उपलब्ध कराई।
मामले में राजस्थान से जुड़े कई लोगों को आरोपी और गवाह बनाया गया है। CBI की जांच कथित PDF के स्रोत, उसे आगे भेजने वाले लोगों और पैसों के लेनदेन की कड़ियों पर केंद्रित रही।
महत्वपूर्ण: यह खबर उपलब्ध कराए गए CBI चार्जशीट संबंधी विवरण पर आधारित है। इसमें बताए गए आरोप जांच एजेंसी के दावों के रूप में हैं। किसी आरोपी की दोषसिद्धि न्यायालय के अंतिम निर्णय पर निर्भर करेगी।
NEET पेपर लीक केस में शिक्षक तक कैसे पहुंची PDF?
जांच के मुताबिक, 3 मई 2026 को NEET UG परीक्षा समाप्त होने के कुछ समय बाद सीकर में एक कोचिंग संस्थान से जुड़े केमिस्ट्री शिक्षक शशिकांत सुथार को दो PDF फाइलें दिखाई गईं।
ये फाइलें उनके मकान मालिक राकेश स्वामी के मोबाइल फोन पर मौजूद थीं। शिक्षक ने PDF में मौजूद प्रश्नों को देखा और उनकी तुलना कुछ समय पहले समाप्त हुए NEET पेपर से की।
जांच के अनुसार, शिक्षक को PDF में मौजूद कई सवाल परीक्षा में पूछे गए प्रश्नों से मेल खाते दिखाई दिए। उन्होंने अपने कुछ साथियों और परिचितों के साथ भी इसकी जांच की।
इसके बाद उन्हें कथित पेपर लीक की आशंका हुई।
शिक्षक ने NTA को भेजी थी शिकायत
CBI के अनुसार, शशिकांत सुथार ने 7 मई 2026 को NTA के तत्कालीन महानिदेशक को ईमेल भेजकर PDF से संबंधित जानकारी दी।
शिकायत मिलने के बाद NTA की ओर से शिक्षक से संपर्क किया गया और दोनों PDF उपलब्ध कराने को कहा गया। इसके बाद शिक्षक ने 8 मई को संबंधित फाइलें एजेंसी को भेज दीं।
यही दस्तावेज बाद में जांच के दौरान महत्वपूर्ण साक्ष्य के तौर पर सामने आए।
चार्जशीट में PDF शिक्षक तक पहुंचने की कड़ी को आगे राकेश स्वामी और उनके बेटे तक जोड़ा गया है।
मकान मालिक को PDF बेटे ने भेजी थी
जांच में राकेश स्वामी से पूछताछ के दौरान कथित तौर पर पता चला कि उन्हें PDF उनके बेटे हितेश कुमार ने भेजी थी।
हितेश उस समय केरल के अडूर स्थित एक मेडिकल कॉलेज में MBBS की पढ़ाई कर रहा था। जांच के अनुसार, उसने 2 मई की रात करीब 11 बजे अपने पिता को PDF वॉट्सऐप के जरिए भेजी थी।
इसके बाद CBI ने हितेश से पूछताछ की। जांच एजेंसी के अनुसार, हितेश ने बताया कि PDF उसे उसके रूममेट लक्ष्य राज से मिली थी।
इस तरह जांच की कड़ी सीकर से केरल और फिर राजस्थान के अन्य लोगों तक पहुंची।
लक्ष्य राज तक कैसे पहुंची कथित PDF?
जांच में सामने आए विवरण के मुताबिक, लक्ष्य राज राजस्थान के झुंझुनूं का रहने वाला है और पहले सीकर में पढ़ाई कर चुका था।
CBI के अनुसार, लक्ष्य ने अपने मोबाइल से PDF से संबंधित कुछ चैट डिलीट कर दी थी। इसके बाद जांच एजेंसी ने उसके संपर्कों और कथित लेनदेन की जानकारी जुटाई।
जांच में लक्ष्य के रिश्तेदार और अन्य परिचितों के नाम भी सामने आए।
40 हजार रुपये में सवाल मिलने का दावा
CBI की चार्जशीट के अनुसार, जांच में अभिषेक सैनी नाम के व्यक्ति का भी उल्लेख है। कथित तौर पर उसने एक छात्र को NEET के लीक प्रश्न उपलब्ध कराने की बात कही थी।
जांच एजेंसी के मुताबिक, इसके लिए 40 हजार रुपये की मांग किए जाने की बात सामने आई। कथित लेनदेन में 30 हजार रुपये फोन-पे के जरिए ट्रांसफर किए जाने की जानकारी भी चार्जशीट में होने का दावा किया गया है।
इसके बाद कथित PDF आगे भेजे जाने की कड़ी सामने आई।
जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि रकम किसे मिली और कथित प्रश्नपत्र किस स्रोत से प्राप्त हुआ था।

PDF में करीब 500 सवाल होने का दावा
पूछताछ के दौरान अभिषेक सैनी ने कथित तौर पर बताया कि उसे दो PDF फाइलें मिली थीं। इन फाइलों में करीब 500 सवाल होने की बात सामने आई।
जांच के अनुसार, इन PDF को आगे एक छात्र के मोबाइल में ट्रांसफर करने के लिए कहा गया था।
बाद में PDF को डिलीट करने का निर्देश दिए जाने की बात भी सामने आई। हालांकि, जांच के दौरान कथित तौर पर फाइल अन्य व्यक्ति तक पहुंच गई।
इससे जांच एजेंसी को PDF के प्रसार और उससे जुड़े लोगों की पहचान करने में मदद मिली।
कोचिंग और कंसल्टेंसी से जुड़ी कड़ी
CBI की जांच में आरके एजुकेशनल कंसल्टेंसी से जुड़े लोगों का भी उल्लेख किया गया है।
जांच के अनुसार, संस्था का संचालन करने वाले राकेश मंडावरिया से भी पूछताछ की गई। बताया गया कि उनकी फर्म MBBS, BDS और BAMS जैसे मेडिकल पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए काउंसलिंग का काम करती थी।
CBI के मुताबिक, 30 अप्रैल को उनके पास दो व्यक्ति पहुंचे थे। इनमें से एक ने कथित तौर पर पैसे लेकर NEET का पेपर उपलब्ध कराने की बात कही।
इसके बाद 2 मई को भी कथित तौर पर PDF को लेकर मुलाकात हुई।
ब्लूटूथ से PDF भेजने की कोशिश का दावा
जांच के अनुसार, 2 मई को नितेश नाम का व्यक्ति दोबारा कंसल्टेंसी कार्यालय पहुंचा। उसने कथित तौर पर अपने मोबाइल से दूसरे फोन में PDF भेजने की कोशिश की।
बताया गया कि ब्लूटूथ के जरिए फाइल ट्रांसफर करने का प्रयास सफल नहीं हुआ।
इसके बाद कार्यालय के एक कर्मचारी को कंप्यूटर के जरिए PDF प्राप्त करने और आगे भेजने के लिए कहा गया। CBI की जांच इसी कड़ी में डिजिटल फाइलों और मोबाइल डाटा की पड़ताल तक पहुंची।
WhatsApp और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच
NEET पेपर लीक केस में डिजिटल कम्युनिकेशन जांच का अहम हिस्सा रहा। PDF को वॉट्सऐप के जरिए भेजे जाने, फोन-पे के माध्यम से कथित रकम ट्रांसफर होने और कुछ चैट डिलीट किए जाने जैसे दावों की जांच की गई।
जांच एजेंसी के लिए मोबाइल फोन, चैट, डिजिटल फाइल, बैंकिंग रिकॉर्ड और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य महत्वपूर्ण हैं।
डिजिटल रिकॉर्ड के जरिए यह पता लगाने की कोशिश की गई कि PDF सबसे पहले किसके पास पहुंची और उसके बाद वह किन-किन लोगों तक भेजी गई।
राजस्थान में पहले ही शुरू हो गई थी कार्रवाई
मामले में केंद्रीय एजेंसी की जांच शुरू होने से पहले राजस्थान में भी कार्रवाई की गई थी।
उपलब्ध विवरण के अनुसार, राजस्थान SOG ने 8 मई से मामले में कार्रवाई शुरू करते हुए कई लोगों को हिरासत में लिया था। बाद में CBI ने मामले की जांच अपने हाथ में लेकर कथित पेपर लीक नेटवर्क की अलग-अलग कड़ियों की पड़ताल की।
जांच एजेंसी ने राजस्थान से जुड़े आरोपियों और गवाहों के बयान दर्ज किए।

CBI चार्जशीट में कई नामों का उल्लेख
CBI ने मामले में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, चार्जशीट में राजस्थान से जुड़े कई आरोपियों के साथ 20 से अधिक गवाहों का उल्लेख है।
जांच एजेंसी ने कथित पेपर लीक की पूरी कड़ी को अलग-अलग बयानों, डिजिटल साक्ष्यों और वित्तीय लेनदेन के आधार पर जोड़ने का प्रयास किया है।
हालांकि, चार्जशीट में दर्ज आरोपों की अंतिम कानूनी पुष्टि अदालत में होने वाली सुनवाई और साक्ष्यों के मूल्यांकन के बाद ही होगी।
NEET पेपर लीक केस में अब आगे क्या?
अब इस मामले में अदालत के सामने चार्जशीट और जांच एजेंसी द्वारा जुटाए गए साक्ष्यों की जांच होगी।
CBI की जांच में PDF के स्रोत, उसे तैयार या उपलब्ध कराने वाले कथित लोगों, इसे आगे भेजने वालों और पैसों के लेनदेन की भूमिका अहम है।
इसके अलावा यह भी महत्वपूर्ण होगा कि जांच में सामने आए डिजिटल साक्ष्य और गवाहों के बयान अदालत में कितने प्रभावी साबित होते हैं।
फिलहाल NEET पेपर लीक केस में सामने आई जानकारी ने परीक्षा की गोपनीयता और पेपर सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। मामले में आगे की तस्वीर न्यायिक प्रक्रिया के दौरान और स्पष्ट होगी।
NEET पेपर लीक केस की 10 बड़ी बातें
- 3 मई को NEET UG 2026 परीक्षा समाप्त हुई थी।
- परीक्षा के बाद सीकर के शिक्षक को दो PDF दिखाई गईं।
- शिक्षक ने PDF के सवालों की परीक्षा में पूछे गए प्रश्नों से तुलना की।
- 7 मई को NTA को ईमेल के जरिए जानकारी दी गई।
- 8 मई को संबंधित PDF एजेंसी को उपलब्ध कराई गईं।
- जांच में PDF के कथित स्रोत तक पहुंचने की कोशिश की गई।
- CBI ने कई संदिग्धों और गवाहों से पूछताछ की।
- कथित लेनदेन में ऑनलाइन भुगतान का भी उल्लेख सामने आया।
- PDF को कई लोगों तक भेजे जाने की कड़ी की जांच की गई।
- मामले में CBI ने चार्जशीट दाखिल की है और न्यायिक प्रक्रिया जारी है।
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