DRDO Netra:भारत की देसी ‘आसमानी आंख’ को मिला फाइनल ऑपरेशनल क्लीयरेंस – क्या है ये सिस्टम और क्यों है इतना खास?
बेंगलुरु में एक ऐतिहासिक समारोह में वायु सेना के डिप्टी चीफ ने DRDO के स्वदेशी नेत्र AEW&C सिस्टम को पूरी तरह combat-ready घोषित किया — Operation Sindoor में खुद को साबित कर चुकी है यह ‘आसमानी आँख’
भारत के रक्षा इतिहास में एक गौरवशाली अध्याय जुड़ा जब DRDO — Defence Research and Development Organisation — ने अपने स्वदेशी नेत्र Airborne Early Warning and Control (AEW&C) सिस्टम को Final Operational Clearance (FOC) प्रदान की। बेंगलुरु के Centre for Airborne Systems (CABS) में आयोजित एक भव्य समारोह में वायु सेना के डिप्टी चीफ एयर मार्शल अवधेश कुमार भारती ने इस ऐतिहासिक घोषणा को समारोहपूर्वक प्रस्तुत किया। यह पल सिर्फ एक तकनीकी उपलब्धि नहीं — यह एक राष्ट्र की आत्मनिर्भरता की विजय का उद्घोष था।
आखिर क्या है यह नेत्र सिस्टम?
संस्कृत शब्द जिसका अर्थ है ‘आँख’ — एक उच्च-क्षमता वाला हवाई निगरानी एवं नियंत्रण मंच (Airborne Early Warning and Control Platform) है। सरल भाषा में कहें तो यह एक उड़ता हुआ रडार स्टेशन और समन्वय केंद्र है जो हजारों फुट की ऊँचाई से दुश्मन की गतिविधियों पर नज़र रखता है, युद्धक्षेत्र में अपने लड़ाकू विमानों को दिशा देता है, और रियल-टाइम जानकारी सीधे कमांड सेंटरों को पहुँचाता है।
यह Embraer ERJ-145 बिजनेस जेट विमान को पूरी तरह संशोधित करके बनाया गया है। इसके ऊपर लगाया गया AESA — Active Electronically Scanned Array — रडार आकाश में एक बहुत बड़े क्षेत्र में दुश्मन के विमानों, प्रक्षेपास्त्रों, ड्रोन और अन्य हवाई खतरों को सैकड़ों किलोमीटर की दूरी से पहचान सकता है। ज़मीन पर लगे रडार सिर्फ एक सीमा तक देख सकते हैं क्योंकि पृथ्वी की वक्रता उनके दायरे को सीमित कर देती है — नेत्र इस सीमा को समाप्त करता है।
तकनीकी खासियतें — क्या-क्या कर सकता है नेत्र?
नेत्र को खास बनाती हैं उसकी अनोखी तकनीकी क्षमताएँ जो इसे एक आसमानी निगरानी एवं युद्ध प्रबंधन केंद्र बनाती हैं। आइए विस्तार से समझते हैं:
| सिस्टम / फीचर | विवरण |
|---|---|
| रडार प्रकार | AESA (Active Electronically Scanned Array) — स्वदेशी LRDE द्वारा निर्मित |
| रडार कवरेज | ~240° Azimuthal Coverage (Back-to-Back Planar Arrays) |
| डिटेक्शन रेंज | 250–400+ किमी (लक्ष्य के राडार क्रॉस-सेक्शन के अनुसार) |
| विमान प्लेटफॉर्म | Embraer ERJ-145 (ब्राज़ील से खरीदा, भारत में सैन्य मानक पर संशोधित) |
| संचार प्रणाली | SATCOM-सक्षम सुरक्षित Data Links (DEAL, देहरादून द्वारा) |
| इलेक्ट्रॉनिक युद्ध | ESM (Emitter Detection), Self-Protection Suite |
| IFF सिस्टम | Identification Friend or Foe — मित्र और शत्रु की पहचान |
| वायु सेना में तैनात | No. 200 Squadron, भीसियाना वायु सेना स्टेशन, बठिंडा, पंजाब |
| कुल नेत्र विमान | 3 (MK-1), 6 MK-1A स्वीकृत, MK-2 निर्माणाधीन |
एक लंबी यात्रा: 2003 से 2026 तक
नेत्र का सफर बेहद संघर्षपूर्ण रहा है। इसका बीज 2003 में ही बोया गया था, और दो दशकों की अनवरत मेहनत के बाद आज यह सपना साकार हुआ। किंतु इस यात्रा में एक दर्दनाक मोड़ भी आया था — जिसे भुलाया नहीं जा सकता:
- 1999 — दर्दनाक अध्याय
- DRDO का पहला हवाई निगरानी प्रयास — Airborne Surveillance Platform (ASP) — तमिलनाडु के अरक्कोणम में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। ८ वैज्ञानिकों और वायु सैनिकों की जान गई। इस त्रासदी ने मिशन को रोका नहीं, बल्कि और मजबूत इरादे से आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। FOC उन्हीं वीरों की याद में समर्पित किया गया है।
- 2003 — नई शुरुआत
- IAF और DRDO ने मिलकर एक Joint Study की और नए AEW&C सिस्टम के लिए feasibility तय की। सरकार ने Embraer ERJ-145 प्लेटफॉर्म पर नया सिस्टम बनाना स्वीकार किया। CABS को Nodal Agency बनाया गया।
- 2004 — सरकार की हरी झंडी
- Cabinet Committee on Security (CCS) ने अक्टूबर 2004 में प्रोजेक्ट को अनुमति दी। तीन ERJ-145 विमान ब्राज़ील से खरीदे गए और सैन्य मानकों पर उनका पूरा परिवर्तन किया गया।
- 2011–2012 — पहली उड़ान
- पहला fully-modified नेत्र विमान दिसंबर 2011 में ब्राज़ील में उड़ा और अगस्त 2012 में DRDO को डिलीवर किया गया।
- 2017 — IAF के हाथ
- पहला नेत्र विमान फरवरी 2017 में Indian Air Force को सौंपा गया। अक्टूबर 2017 में Initial Operational Clearance (IOC) मिली।
- 2019 — बालाकोट में अग्निपरीक्षा
- 26 फरवरी 2019 को बालाकोट एयरस्ट्राइक के दौरान नेत्र ने अपनी पहली वास्तविक लड़ाकू भूमिका निभाई। दुश्मन के रडार को भ्रमित करते हुए IAF fighters को सही दिशा दी।
- 2025 — Operation Sindoor
- पाकिस्तान के साथ Operation Sindoor के दौरान नेत्र ने पूरी तरह अपनी परिपक्वता का प्रमाण दिया। यही प्रदर्शन आगे FOC की राह साफ करता गया।
- 25 जून 2026 — Final Operational Clearance
- बेंगलुरु में ऐतिहासिक समारोह में एयर मार्शल भारती ने नेत्र को पूरी तरह combat-ready घोषित किया। भारत ने अपनी ‘आसमानी आँख’ खुद अपने हाथों से बना ली।
Phalcon बनाम नेत्र — क्या फर्क है? 
भारत के पास पहले से ही रूसी IL-76 विमान पर स्थापित Phalcon AWACS सिस्टम हैं — जो इज़राइल से खरीदे गए हैं। फिर नेत्र की ज़रूरत क्यों पड़ी? दोनों अलग-अलग भूमिकाएँ निभाते हैं।
Phalcon एक बड़ा और शक्तिशाली मंच है जो 360-डिग्री रडार कवरेज देता है और लंबे समय तक हवाई उड़ान भर सकता है — यह युद्ध के बड़े और गहरे परिदृश्यों के लिए बेहतर है। नेत्र एक मध्यम आकार का, स्वदेशी, तेजी से तैनात होने वाला सिस्टम है — जो आपातकालीन परिस्थितियों में बिना किसी विदेशी आपूर्तिकर्ता की निर्भरता के इस्तेमाल किया जा सकता है। दोनों मिलकर IAF को एक “layered” — यानी परत-दर-परत — हवाई निगरानी क्षमता देते हैं।
आगे क्या? नेत्र MK-1A और MK-2 का इंतज़ार
नेत्र की कहानी यहाँ खत्म नहीं होती। सरकार ने पहले ही 6 नए नेत्र MK-1A विमानों के लिए मंज़ूरी दे दी है। ये upgraded variants होंगे जिनमें बेहतर Gallium Nitride-based transmit-receive modules, advanced software, ड्रोन और stealth aircraft को detect करने वाले upgraded रडार और नए human-machine interface होंगे।
इसके साथ ही, ₹19,000 करोड़ की लागत से नेत्र MK-2 प्रोग्राम भी चल रहा है — जिसमें Airbus A321 प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल होगा। Adani Defence & Aerospace इस प्रोजेक्ट की L1 entity है। यह बड़ा प्लेटफॉर्म 300–360 डिग्री रडार कवरेज के साथ 500 किमी+ डिटेक्शन रेंज देगा और hypersonic weapons को भी पकड़ सकेगा।
ये सारी उपलब्धियाँ सिर्फ एक सिस्टम की कहानी नहीं हैं — यह भारत की उस मानसिकता की कहानी है जो 1999 की त्रासदी के बाद भी नहीं टूटी, जिसने दो दशकों के धैर्य के साथ अपना लक्ष्य हासिल किया। नेत्र का यह FOC आत्मनिर्भर भारत के सपने को आसमान तक ऊँचा ले जाता है

