जयपुर में वंश लेखकों (वंशावली लेखक) के एक प्रतिनिधिमंडल ने पूर्व मुख्यमंत्री Ashok Gehlot से मुलाकात कर अपनी मांगें रखीं। पूर्व राज्य मंत्री राम सिंह राव के नेतृत्व में पहुंचे प्रतिनिधिमंडल ने प्रदेश स्तर पर ‘वंशावली प्रकोष्ठ’ के गठन की मांग प्रमुखता से उठाई।
सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा मुद्दा
प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि वंशावली लेखन केवल पारंपरिक पेशा नहीं है, बल्कि यह देश की सांस्कृतिक स्मृति, सामाजिक संरचना और ऐतिहासिक निरंतरता से जुड़ा महत्वपूर्ण कार्य है।
राम सिंह राव ने चिंता जताई कि संस्थागत संरक्षण के अभाव में यह परंपरा धीरे-धीरे समाप्ति की ओर बढ़ रही है। यदि समय रहते इसे मान्यता नहीं मिली, तो आने वाली पीढ़ियां अपने पारिवारिक और सामाजिक इतिहास से कट सकती हैं।
सरकारी अभिलेख व्यवस्था से जोड़ने की मांग

वंश लेखक उमेद सिंह अमलदार ने बताया कि जन्म, मृत्यु और विवाह जैसे महत्वपूर्ण सामाजिक रिकॉर्ड वर्षों से वंश लेखक सुरक्षित रखते आए हैं। बावजूद इसके, इस व्यवस्था को किसी सरकारी अभिलेख प्रणाली से नहीं जोड़ा गया है।
उन्होंने कहा कि यदि वंशावली दस्तावेजों को औपचारिक मान्यता दी जाए, तो यह ऐतिहासिक दस्तावेजीकरण को और मजबूत कर सकता है।
डिजिटल युग में भी उपेक्षा
रूप सिंह राव ने कहा कि ‘डिजिटल इंडिया’ के दौर में भी वंश लेखकों को नीतिगत रूप से शामिल नहीं किया गया है। यदि सरकार इन्हें डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़े, तो पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक तकनीक का बेहतर समन्वय हो सकता है।
जितेंद्र सिंह राव ने आजीविका और पहचान के संकट की ओर इशारा करते हुए कहा कि सम्मान और आर्थिक सुरक्षा के अभाव में नई पीढ़ी इस पेशे की ओर आकर्षित नहीं हो रही।
प्रकोष्ठ गठन से मिल सकता है समाधान
यतेंद्र सिंह जागा, प्रेम सिंह जागा और विष्णु जागा ने संयुक्त रूप से कहा कि प्रदेश स्तर पर ‘वंशावली प्रकोष्ठ’ के गठन से न केवल वंश लेखकों को पहचान और संरक्षण मिलेगा, बल्कि प्रशासन को भी प्रामाणिक ऐतिहासिक रिकॉर्ड उपलब्ध हो सकेंगे।
उनका कहना है कि इस कदम से सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के साथ-साथ पारिवारिक व सामाजिक दस्तावेजों का व्यवस्थित संकलन संभव हो पाएगा।
गहलोत ने दिया आश्वासन
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रतिनिधिमंडल की मांगों को गंभीरता से सुना और आश्वासन दिया कि वे इस विषय को संबंधित स्तर पर उठाकर सकारात्मक पहल करने का प्रयास करेंगे।
उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक विरासत से जुड़े मुद्दों पर संवाद और समाधान आवश्यक है, ताकि परंपराएं सुरक्षित रह सकें।
परंपरा और आधुनिकता के बीच संतुलन की जरूरत
वंश लेखकों का मानना है कि यदि सरकार इस पेशे को औपचारिक संरचना और नीति समर्थन प्रदान करे, तो यह न केवल एक परंपरा को बचाएगा बल्कि सामाजिक इतिहास को सहेजने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम होगा।
अब यह देखना होगा कि प्रदेश स्तर पर वंशावली प्रकोष्ठ के गठन को लेकर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं और इस ऐतिहासिक पेशे को कितनी संस्थागत मान्यता मिलती है।