Neem Ka Thana MCH Hospital Controversy: गर्भवती के भ्रूण गायब होने के आरोप से अस्पताल में हंगामा, जांच शुरू

नीमकाथाना (सीकर): Neem Ka Thana MCH Hospital Controversy को लेकर राजस्थान के सीकर जिले में स्थित मातृ एवं शिशु चिकित्सालय (एमसीएच) एक बार फिर सुर्खियों में है। गर्भवती महिला के परिजनों ने अस्पताल पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया कि महिला को उपचार के बाद जयपुर रेफर किया गया, जहां डॉक्टरों ने बताया कि गर्भ में भ्रूण मौजूद नहीं है। इस खुलासे के बाद परिजनों ने अस्पताल परिसर में विरोध प्रदर्शन किया और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई।
दूसरी ओर, अस्पताल प्रशासन ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि महिला का अस्पताल में न तो प्रसव हुआ और न ही गर्भपात। प्रशासन का कहना है कि महिला को गंभीर हालत में प्राथमिक उपचार देने के बाद तुरंत जयपुर रेफर किया गया था। मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए चार सदस्यीय जांच समिति का गठन कर दिया गया है।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार, कोटड़ा निवासी गर्भवती महिला किरण को 19 जुलाई की सुबह तेज पेट दर्द और अत्यधिक रक्तस्राव की शिकायत के बाद नीमकाथाना स्थित एमसीएच अस्पताल लाया गया था। डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार देने के बाद उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए जयपुर रेफर कर दिया।
परिजनों का आरोप है कि जब जयपुर के अस्पताल में जांच की गई तो चिकित्सकों ने बताया कि महिला के गर्भ में भ्रूण नहीं है। इसके बाद परिवार ने आशंका जताई कि भ्रूण एमसीएच अस्पताल में ही निकल गया, लेकिन इसकी जानकारी उन्हें नहीं दी गई।
Neem Ka Thana MCH Hospital Controversy: अस्पताल प्रशासन ने क्या कहा?
अस्पताल प्रशासन ने आरोपों को गलत बताते हुए कहा कि महिला अस्पताल में लगभग आधे घंटे से भी कम समय तक रही। इस दौरान उसका केवल प्राथमिक उपचार किया गया।
अस्पताल के अनुसार—
- अस्पताल में किसी प्रकार का प्रसव नहीं हुआ।
- गर्भपात भी अस्पताल परिसर में नहीं हुआ।
- महिला की स्थिति गंभीर होने के कारण तुरंत रेफर किया गया।
- सीसीटीवी फुटेज में परिजन पूरे समय महिला के साथ मौजूद दिखाई दे रहे हैं।
प्रशासन का कहना है कि यह स्पष्ट नहीं है कि गर्भपात अस्पताल आने से पहले, रास्ते में या जयपुर पहुंचने के बाद हुआ।
चार सदस्यीय जांच समिति गठित
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला अस्पताल प्रशासन ने चार सदस्यीय जांच समिति बनाई है।
समिति निम्न बिंदुओं की जांच करेगी—
- अस्पताल में महिला के उपचार की पूरी प्रक्रिया।
- मेडिकल रिकॉर्ड और रेफरल दस्तावेज।
- सीसीटीवी फुटेज।
- चिकित्सकीय प्रोटोकॉल का पालन हुआ या नहीं।
- गर्भपात की वास्तविक स्थिति।
जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
परिजनों ने लगाए गंभीर आरोप
पीड़ित महिला के पति दलिप ने आरोप लगाया कि उनकी पत्नी सामान्य हालत में अस्पताल पहुंची थी, लेकिन इलाज के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव शुरू हो गया।
उन्होंने दावा किया कि जयपुर पहुंचने पर डॉक्टरों ने बताया कि गर्भ में भ्रूण नहीं है। परिवार का आरोप है कि यदि अस्पताल में कोई मेडिकल घटना हुई थी तो इसकी जानकारी समय रहते उन्हें दी जानी चाहिए थी।
परिजनों ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
पुरानी सोनोग्राफी रिपोर्ट में क्या था?
अस्पताल प्रशासन के अनुसार महिला की लगभग एक माह पुरानी सोनोग्राफी रिपोर्ट में—
- लगभग 28 सप्ताह की गर्भावस्था दर्ज थी।
- भ्रूण में जन्मजात असामान्यताओं (Congenital Abnormalities) का उल्लेख था।
- भ्रूण का अनुमानित वजन लगभग 669 ग्राम बताया गया था।
प्रशासन का कहना है कि इस रिपोर्ट को भी जांच का हिस्सा बनाया जाएगा।
डॉक्टरों के आधिकारिक बयान
डॉ. कमल सिंह शेखावत (पीएमओ, जिला अस्पताल)
उन्होंने कहा कि अस्पताल में न तो प्रसव हुआ और न ही गर्भपात। महिला अस्पताल में बहुत कम समय तक रही और उसके साथ परिजन लगातार मौजूद थे।
डॉ. जी.एस. छापोला (प्रभारी, एमसीएच)
उन्होंने बताया कि महिला को गंभीर हालत में भर्ती कर प्राथमिक उपचार दिया गया और उसके बाद तत्काल जयपुर रेफर किया गया।
डॉ. असराम खटाणा (स्त्री रोग विशेषज्ञ)
उन्होंने कहा कि महिला लगभग पांच से छह महीने की गर्भवती थी और अत्यधिक रक्तस्राव की स्थिति में अस्पताल लाई गई थी। आवश्यक उपचार के बाद उसे रेफर किया गया।
जांच रिपोर्ट के बाद ही साफ होगी स्थिति
इस पूरे मामले में फिलहाल दोनों पक्षों के अलग-अलग दावे सामने आए हैं। अस्पताल प्रशासन चिकित्सा रिकॉर्ड और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर अपनी बात रख रहा है, जबकि परिजन अस्पताल की भूमिका पर सवाल उठा रहे हैं।
अब गठित जांच समिति की रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगा कि गर्भपात कब और किन परिस्थितियों में हुआ।

