आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू: राजस्थान में आज शाम 4 बजे से प्रभावी, जानिए क्या-क्या हुआ बंद

आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू: राजस्थान में आज शाम 4 बजे से प्रभावी, जानिए क्या-क्या हुआ बंद
राजस्थान में निकाय चुनाव 2026 के कार्यक्रम की घोषणा के साथ ही आज शाम 4 बजे से पूरे प्रदेश में आदर्श चुनाव आचार संहिता (Model Code of Conduct) लागू हो चुकी है। राज्य निर्वाचन आयोग ने चुनावी कार्यक्रम जारी करते हुए बताया है कि मतदान दो चरणों में सितंबर के पहले और दूसरे सप्ताह में कराया जाएगा, और पूरी चुनाव प्रक्रिया 15 नवंबर 2026 तक पूरी कर ली जाएगी। संहिता लागू होते ही राज्यभर में सरकार, प्रशासन और राजनीतिक दलों की गतिविधियां अब चुनाव आयोग के नियमों के दायरे में आ गई हैं। नाम सुनते ही सबसे पहला सवाल यही आता है कि आखिर यह आचार संहिता होती क्या है, इसे कौन लागू करता है, और इसके लागू होते ही आम आदमी से लेकर सरकार तक के लिए क्या-क्या बदल जाता है। आइए इसे विस्तार से समझते हैं।
आदर्श चुनाव आचार संहिता क्या है?
आदर्श चुनाव आचार संहिता एक तरह की नियमावली है, जो चुनाव आयोग राजनीतिक दलों, उम्मीदवारों और सत्ताधारी सरकार के लिए जारी करता है। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि चुनाव स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण माहौल में हों, और सत्ता में बैठा दल अपनी सरकारी मशीनरी, सरकारी खजाने या पद का इस्तेमाल करके चुनाव में अनुचित फायदा न उठा सके।
दिलचस्प बात यह है कि आचार संहिता किसी कानून की तरह संविधान या किसी अधिनियम में लिखी हुई नहीं है। यह चुनाव आयोग की प्रशासनिक शक्तियों और वर्षों की परंपरा से विकसित हुई एक व्यवस्था है, जिसे राजनीतिक दलों की सहमति से अपनाया गया है। इसके बावजूद इसका पालन करना हर उम्मीदवार, राजनीतिक दल, मंत्री और सरकारी अधिकारी के लिए अनिवार्य होता है, और उल्लंघन करने पर चुनाव आयोग कड़ी कार्रवाई कर सकता है।
आचार संहिता कब लागू होती है और कब हटती है?
आचार संहिता उसी दिन से लागू हो जाती है, जिस दिन चुनाव आयोग चुनाव कार्यक्रम यानी तारीखों की घोषणा करता है। राजस्थान के मामले में यह आज शाम 4 बजे से प्रभावी हो चुकी है। यह पूरी चुनावी प्रक्रिया के दौरान लागू रहेगी और मतगणना पूरी होकर नतीजे घोषित होने के बाद ही समाप्त होगी। यानी नामांकन, प्रचार, मतदान और मतगणना, इन सभी चरणों के दौरान यह पूरी सख्ती के साथ लागू रहेगी। राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार दो चरणों में मतदान होने की संभावना है — पहला चरण सितंबर के पहले सप्ताह में और दूसरा चरण सितंबर के दूसरे सप्ताह में। यानी अगले कुछ महीनों तक राजस्थान में यह संहिता लगातार असर दिखाती रहेगी।
आचार संहिता लागू होते ही क्या-क्या बंद हो गया?
राजस्थान में आज शाम 4 बजे से संहिता लागू होते ही सरकार और प्रशासन के कामकाज पर कई तरह की रोक लग गई है। मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
1. नई योजनाओं और घोषणाओं पर रोक सरकार अब कोई नई विकास योजना, नई परियोजना या नई सरकारी घोषणा नहीं कर सकती। सड़क, पुल, अस्पताल, स्कूल जैसी किसी भी नई योजना का शिलान्यास या उद्घाटन नहीं किया जा सकता, ताकि मतदाताओं को लुभाने के लिए इनका इस्तेमाल न हो सके।
2. सरकारी खजाने से लोक-लुभावन ऐलान नहीं सत्ताधारी दल या सरकार किसी नई सब्सिडी, अनुदान, या वित्तीय लाभ की घोषणा नहीं कर सकती। किसी भी तरह के नकद हस्तांतरण या मुफ्त योजनाओं के नए ऐलान पर पूरी तरह रोक रहती है।
3. मंत्रियों और सरकारी अधिकारियों के दौरे मंत्री अपने सरकारी दौरों के दौरान चुनाव प्रचार से जुड़ा कोई काम नहीं कर सकते और न ही सरकारी दौरे को चुनावी प्रचार के साथ मिला सकते हैं। सरकारी वाहन, हेलीकॉप्टर, बंगले या सरकारी सुविधाओं का उपयोग पार्टी के प्रचार-प्रसार के लिए नहीं किया जा सकता।
4. तबादलों और नई नियुक्तियों पर पाबंदी आचार संहिता के दौरान बड़े पैमाने पर प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मचारियों के तबादले और नई नियुक्तियां नहीं की जा सकतीं, जब तक चुनाव आयोग से विशेष अनुमति न ली जाए। इसका मकसद यह है कि निष्पक्ष अधिकारियों को हटाकर मनचाहे अधिकारी न बिठाए जाएं।
5. सरकारी विज्ञापन और प्रचार सामग्री पर रोक सरकार की उपलब्धियां गिनाने वाले विज्ञापन, होर्डिंग, सरकारी योजनाओं का प्रचार करने वाले पोस्टर और सार्वजनिक स्थानों पर लगे सरकारी बैनर हटा दिए जाते हैं। सरकारी खर्च पर मीडिया में प्रचार अभियान भी रोक दिए जाते हैं।
6. सार्वजनिक संपत्तियों पर दीवार लेखन और पोस्टर सरकारी भवनों, दीवारों और सार्वजनिक स्थानों पर बिना अनुमति के पोस्टर चिपकाना, नारे लिखना या बैनर लगाना प्रतिबंधित होता है। निजी संपत्ति पर भी प्रचार सामग्री लगाने के लिए मालिक की अनुमति जरूरी होती है।
7. लाउडस्पीकर और सभाओं पर नियंत्रण चुनावी सभाओं, रैलियों और जुलूसों के लिए स्थानीय पुलिस-प्रशासन से पहले अनुमति लेनी अनिवार्य हो जाती है। लाउडस्पीकर के इस्तेमाल के लिए तय समय-सीमा और नियमों का पालन करना होता है।
8. मतदान से पहले शराब की दुकानें बंद मतदान की तारीख से 48 घंटे पहले उस क्षेत्र में शराब की बिक्री और वितरण पर पूरी तरह रोक लगा दी जाती है, ताकि मतदाताओं को प्रलोभन देकर वोट न खरीदा जा सके।
9. एग्जिट पोल और सर्वे पर पाबंदी मतदान समाप्त होने तक एग्जिट पोल के नतीजे प्रसारित करने पर रोक रहती है, ताकि आगामी चरणों के मतदान पर इसका असर न पड़े।
10. जाति, धर्म के नाम पर वोट मांगने पर रोक कोई भी उम्मीदवार या दल जाति, धर्म, संप्रदाय या भाषा के आधार पर वोट मांगकर मतदाताओं के बीच वैमनस्य नहीं फैला सकता। इसका उल्लंघन करने पर सख्त कार्रवाई हो सकती है।
क्या-क्या चालू रहेगा?
आचार संहिता का मतलब यह नहीं कि सरकार और प्रशासन का पूरा कामकाज ठप हो जाता है। जिन विकास परियोजनाओं के वर्क ऑर्डर संहिता प्रभावी होने से पहले ही जारी हो चुके हैं, वे बिना किसी रुकावट के जारी रहेंगे। जो निर्माण कार्य पहले से जमीन पर चल रहे हैं, उन पर भी कोई असर नहीं पड़ेगा। इसके अलावा जरूरी सरकारी सेवाएं, जैसे स्वास्थ्य, आपदा प्रबंधन, कानून-व्यवस्था और आपातकालीन सेवाएं पूरी तरह सामान्य ढंग से काम करती रहेंगी। विधानसभा या नगर निकाय में सामान्य कामकाज जैसे बिल पेश करना भी हो सकेगा, हालांकि प्रचार से जुड़े नियमों का पालन सख्ती से करना होगा। रोजमर्रा का प्रशासनिक कामकाज भी सामान्य रूप से चलता रहेगा, बस उसमें राजनीतिक फायदे की मंशा नहीं होनी चाहिए।
आचार संहिता का उल्लंघन करने पर क्या होता है?
अगर कोई उम्मीदवार, राजनीतिक दल, मंत्री या सरकारी अधिकारी आचार संहिता का उल्लंघन करता है, तो चुनाव आयोग को शिकायत मिलने पर जांच करने और कार्रवाई करने का अधिकार है। इसमें चेतावनी देने से लेकर, प्रचार पर रोक लगाने, उम्मीदवारी रद्द करने और गंभीर मामलों में जन प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत आपराधिक कार्रवाई तक शामिल हो सकती है। अधिकारियों के मामले में तबादला या निलंबन जैसी कार्रवाई भी हो सकती है।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर आदर्श चुनाव आचार संहिता का मकसद यही है कि सत्ता में बैठा दल चुनाव के दौरान सरकारी संसाधनों और ताकत का इस्तेमाल करके किसी तरह की बढ़त न हासिल कर सके, और सभी राजनीतिक दलों तथा उम्मीदवारों को बराबरी का मौका मिले। राजस्थान में निकाय चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के साथ आज शाम 4 बजे से यह संहिता लागू हो चुकी है और सितंबर में होने वाले दो चरणों के मतदान तथा 15 नवंबर 2026 तक चलने वाली पूरी चुनाव प्रक्रिया के दौरान लागू रहेगी। ऐसे में आने वाले हफ्तों में सरकार, प्रशासन और राजनीतिक दलों की हर गतिविधि इसी दायरे में तय होगी।
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