ईरान राष्ट्रपति बोले- अमेरिका, इजराइल और यूरोप के साथ तनाव, सेना पहले से ज्यादा मजबूत
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने कहा कि अमेरिका, इजराइल और यूरोप के साथ ईरान पूरी तरह जंग की स्थिति में है। उन्होंने सेना की ताकत और जवाबी रणनीति पर जोर दिया। आर्थिक, सैन्य और राजनीतिक दबाव बढ़ने के बावजूद ईरान पहले से ज्यादा मजबूत है।
ईरान राष्ट्रपति ने कहा- अमेरिका और इजराइल के साथ जंग की स्थिति
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने शनिवार को कहा कि उनका देश अमेरिका, इजराइल और यूरोप के साथ पूरी तरह जंग की स्थिति में है। यह बयान सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की आधिकारिक वेबसाइट पर प्रकाशित हुआ।
पेजेशकियन ने इस युद्ध को 1980-88 के ईरान-इराक युद्ध से भी अधिक जटिल और खतरनाक बताया। उन्होंने कहा कि वर्तमान में आर्थिक, सैन्य और राजनीतिक दबाव हर तरफ से बढ़ा है, और यह पारंपरिक जंग से कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण है।
राष्ट्रपति का संदेश- राष्ट्रीय एकता और तैयार सेना
पेजेशकियन ने देशवासियों से राष्ट्रीय एकता बनाए रखने की अपील की और कहा कि दुश्मन देश में आंतरिक विभाजन का फायदा उठाना चाहते हैं।
उन्होंने दावा किया कि ईरान की सेना अब पहले से अधिक मजबूत है, हथियार और मैनपावर दोनों में। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर दुश्मन हमला करेगा तो उन्हें कड़ा जवाब मिलेगा।
जून 2025 में ईरान-इजराइल का 12 दिन का युद्ध

ईराइल और ईरान के बीच जून 2025 में 12 दिन का सीधा युद्ध हुआ था।
-
ईरान के 1000 से अधिक लोग मारे गए।
-
इजराइल में ईरानी मिसाइलों से 28 लोगों की मौत हुई।
-
अमेरिका ने भी इस संघर्ष में भाग लिया और तीन ईरानी परमाणु साइटों पर बमबारी की।
-
अमेरिका और इजराइल का उद्देश्य था ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम को रोकना।
युद्ध के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने दावा किया कि उन्होंने ईरान के सुप्रीम लीडर की हत्या से सेनाओं को रोका।
परमाणु कार्यक्रम और अंतरराष्ट्रीय दबाव

अमेरिका और उसके सहयोगी ईरान पर परमाणु हथियार बनाने का आरोप लगाते आए हैं, जिसे ईरान बार-बार खारिज करता रहा है। ईरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण है।
ट्रम्प सरकार ने जनवरी 2025 में फिर से ‘मैक्सिमम प्रेशर’ नीति लागू की, जिसमें ईरान के तेल निर्यात पर रोक और अतिरिक्त प्रतिबंध शामिल थे।
फ्रांस, जर्मनी और ब्रिटेन ने संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंधों को फिर से लागू किया, जिससे ईरान की अर्थव्यवस्था पर भारी दबाव पड़ा।
युद्ध की संभावित गंभीरताएं
यदि यह तनाव पूर्ण पैमाने के युद्ध में बदलता है तो प्रभाव गंभीर हो सकते हैं:
सैन्य नुकसान : ईरान की मिसाइल और ड्रोन क्षमता मजबूत है। लेकिन अमेरिका और इजराइल की उन्नत तकनीक से ईरानी सैन्य ठिकानों और बुनियादी ढांचे को क्षति पहुँच सकती है।
आर्थिक तबाही : पहले से ही अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध और मुद्रास्फीति के चलते ईरान की अर्थव्यवस्था कमजोर है। तेल निर्यात रुकने से राजस्व घटेगा, मुद्रास्फीति बढ़ेगी और जीवनयापन महंगा होगा। ईरान की अर्थव्यवस्था लंबे समय से अमेरिकी और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों की मार झेल रही है, जिससे मुद्रास्फीति (इन्फ्लेशन) बहुत ज्यादा है, तेल निर्यात कम हुआ है। तेल निर्यात रुकने से राजस्व कम हो जाएगा, मुद्रास्फीति बढ़ेगी, और भोजन-दवा की कमी हो सकती है।
मानवीय संकट: नागरिक क्षेत्रों पर हमलों से लाखों विस्थापित हो सकते हैं। स्वास्थ्य, शिक्षा और बुनियादी सेवाएं ठप हो जाएंगी। ईरान पहले से ही आर्थिक संकट से जूझ रहा है, युद्ध से अकाल या बीमारियां फैल सकती हैं।
राजनीतिक प्रभाव : आंतरिक असंतोष बढ़ सकता है, जो शासन के लिए खतरा है।
वैश्विक असर: युद्ध से वैश्विक अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी (तेल कीमतें), लेकिन ईरान सबसे ज्यादा प्रभावित होगा। हालांकि, ईरान का दावा है कि उसकी सेना अब पहले से मजबूत है और निर्णायक जवाब देगी।
निष्कर्ष
ईरान के राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि अमेरिका, इजराइल और यूरोप के दबाव के बावजूद देश मजबूत है। सेना पहले से अधिक तैयार है। ईरान हर संभावित हमले का कड़ा जवाब देने के लिए तैयार है। राष्ट्रीय एकता और शांति बनाए रखना फिलहाल देश का सर्वोच्च प्राथमिकता है।
इस स्थिति में मध्य-पूर्व का भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर प्रभाव जारी रह सकता है।

