ईरान ने अमेरिकी एयरबेस को बनाया निशाना, जवाब में अमेरिका का क़ेशम द्वीप पर हमला; सेंटकॉम ने दावों को बताया ग़लत

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ईरानी रिवोल्यूशनरी गॉर्ड कोर (आईआरजीसी) का दावा: देर रात अमेरिका की फ़िफ़्थ फ़्लीट और एयरबेस पर दागीं मिसाइलें।
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अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) का पलटवार: सभी ईरानी मिसाइलें और ड्रोन नष्ट; आत्मरक्षा में क़ेशम द्वीप के सैन्य स्टेशन को बनाया निशाना।
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मार्को रुबियो की चेतावनी: होर्मुज़ स्ट्रेट खुलने के बाद भी ईरान पर से नहीं हटेंगे अमेरिकी प्रतिबंध।
तेहरान/वॉशिंगटन:
मिडिल ईस्ट में तनाव बेहद गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। ईरानी रिवोल्यूशनरी गॉर्ड कोर (आईआरजीसी) ने बुधवार को दावा किया है कि उसने देर रात बहरीन स्थित अमेरिका की फ़िफ़्थ फ़्लीट (5th Fleet) के मुख्यालय और क्षेत्र में स्थित एक अमेरिकी एयरबेस को निशाना बनाया है।
आईआरजीसी के अनुसार, यह एक जवाबी हमला था क्योंकि इससे पहले अमेरिका ने उनके टेलीकॉम एंटीना और एक ईरानी तेल टैंकर को निशाना बनाया था। आईआरजीसी ने अपने बयान में कहा, “हमने पहले ही चेतावनी दी थी कि आक्रामकता की स्थिति में, प्रतिक्रिया अलग और अधिक गंभीर होगी और हमने उसी के अनुसार कार्रवाई की।”
सेंटकॉम का पलटवार: ‘ईरान के सभी हमले रहे विफल’
दूसरी ओर, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने फ़िफ़्थ फ़्लीट और एयरबेस पर हमले के ईरानी दावों को पूरी तरह से ग़लत बताया है। सेंटकॉम का कहना है कि उसने “पूरे क्षेत्र में हमले करने के ईरानी प्रयासों” के जवाब में अपनी आत्मरक्षा में यह कार्रवाई की है।
अमेरिकी सेना द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार:
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कुवैत पर हमला: ईरान द्वारा कुवैत पर दागी गईं दो मिसाइलें अपने लक्ष्य तक पहुंचने से पहले ही गिर गईं या रास्ते में ही नष्ट हो गईं।
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बहरीन पर हमला: बहरीन पर दागी गईं तीन अन्य मिसाइलों को अमेरिकी और बहरीनी हवाई रक्षा प्रणालियों द्वारा तुरंत रोक दिया गया।
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नागरिक जहाजों पर हमला: इलाके से गुजर रहे नागरिक जहाजों पर ईरान की ओर से दागे गए तीन सुसाइड ड्रोन को भी सेंटकॉम बलों ने मार गिराया।
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, इन झड़पों में अमेरिकी सेना का कोई भी जवान घायल नहीं हुआ है और अमेरिकी बल ईरान की किसी भी अनुचित आक्रामक कार्रवाई का जवाब देने के लिए पूरी तरह सतर्क हैं।
हालांकि, बीबीसी फ़ारसी के अनुसार, ईरानी सूत्रों ने दावा किया है कि कुवैत में कम से कम तीन विस्फोट हुए और वहां तैनात एक अमेरिकी पैट्रियट सिस्टम निष्क्रिय हो गया।
अमेरिका ने क़ेशम द्वीप पर किया हमला

सैन्य अभियानों की पुष्टि करते हुए सेंटकॉम ने कहा कि अमेरिकी सेना ने आत्मरक्षा में कार्रवाई करते हुए क़ेशम द्वीप पर स्थित एक ईरानी सैन्य ज़मीनी कंट्रोल स्टेशन को निशाना बनाया है। यह रिपोर्ट आईआरजीसी के उस दावे से मेल खाती है, जिसमें क़ेशम द्वीप के दक्षिण में स्थित एक दूरसंचार टॉवर (Telecom Tower) को निशाना बनाए जाने की बात कही गई थी। ईरान का कहना है कि इसी कार्रवाई के विरोध में उसने अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े के मुख्यालय पर हमला किया था।
होर्मुज़ स्ट्रेट की नाकेबंदी और तेल टैंकर पर कार्रवाई

इस ताज़ा विवाद की शुरुआत तब हुई जब अमेरिका ने दावा किया कि उसने होर्मुज़ स्ट्रेट पर वॉशिंगटन की नौसैनिक नाकेबंदी के तहत ईरान की तरफ़ जा रहे एक ख़ाली तेल टैंकर पर हमला कर उसे “निष्क्रिय” कर दिया है।
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जहाज पर मिसाइल हमला: सेंटकॉम के अनुसार, एक अमेरिकी विमान ने बोत्सवाना के झंडे वाले एम/टी लेक्सी जहाज पर हेलफ़ायर मिसाइल दागी, जो सीधे उसके इंजन रूम में लगी। यह जहाज अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र से होकर ख़ार्ग द्वीप की ओर जा रहा था।
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चेतावनी की अनदेखी: अमेरिका का कहना है कि जहाज के चालक crew ने बार-बार दी गई चेतावनियों को नज़रअंदाज़ किया था, जिसके बाद मंगलवार को यह कार्रवाई की गई और इसका वीडियो फ़ुटेज भी जारी किया गया। ईरान ने इस मामले पर अभी तक सार्वजनिक रूप से कोई टिप्पणी नहीं की है।
अमेरिकी सेना ने 13 अप्रैल से ईरानी बंदरगाहों में आने-जाने वाले सभी जहाज़ों पर अपनी नाकेबंदी लागू की है। सेंटकॉम के अनुसार, इस नाकेबंदी के तहत अब तक कुल 6 कमर्शियल जहाज़ों को निष्क्रिय किया जा चुका है और 122 अन्य जहाज़ों का रास्ता बदला गया है।
विदेश मंत्री मार्को रुबियो का बड़ा बयान: ‘प्रतिबंध नहीं हटेंगे’

United States Secretary of State
मंगलवार को अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने अमेरिकी सीनेट की विदेश मामलों से जुड़ी समिति के सामने अमेरिकी अभियानों का बचाव किया और उन्हें ‘बहुत सफल’ बताया। उन्होंने कहा कि ‘ऑपरेशन एपिक फ़्यूरी’ अपने सैन्य उद्देश्यों को हासिल करने में सफल रहा है, जिससे ईरान का रक्षा उद्योग कमज़ोर हो गया है। उन्होंने यह दावा भी किया कि “ईरान के पास आज कोई नौसेना नहीं है।”
प्रतिबंधों के मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए रुबियो ने कहा:
“अगर होर्मुज़ स्ट्रेट पूरी तरह खुल भी जाता है, तो भी अमेरिका ईरान पर लगे प्रतिबंधों को नहीं हटाएगा। इस पर कोई चर्चा नहीं हुई है और ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं दिया गया है।”
हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट किया कि बातचीत में प्रतिबंध हटाना एक प्रमुख मुद्दा रहा है और यदि ईरान अपने संवर्द्धित यूरेनियम और परमाणु कार्यक्रम से जुड़े पहलुओं को छोड़ देता है, तो ‘शर्तों के तहत’ प्रतिबंधों में राहत मिल सकती है। रुबियो ने यह भी कहा कि दोनों देशों के बीच बातचीत में ईरान के परमाणु कार्यक्रम के उन पहलुओं पर भी चर्चा हुई है जिनका ज़िक्र ईरान एक महीने या एक साल पहले तक नहीं कर रहा था, लेकिन इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि कोई स्वीकार्य समझौता हो पाएगा।
सेंटकॉम ने अंत में कहा है कि मौजूदा युद्धविराम के दौरान उसकी सेनाएं सतर्क रहेंगी और ईरान की बिना उकसावे वाली आक्रामकता का मुकाबला करने के लिए तैयार हैं।

