क्लबफुट से जंग जीत रहे नन्हें कदम, जिला अस्पताल कासगंज में मनाया गया वर्ल्ड क्लबफुट डे
कासगंज। विश्व क्लबफुट दिवस के अवसर पर बुधवार को जिला अस्पताल कासगंज में क्लबफुट से प्रभावित बच्चों और उनके अभिभावकों के लिए विशेष जागरूकता एवं संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों को क्लबफुट जैसी जन्मजात विकृति के प्रति जागरूक करना, समय पर पहचान और उपचार के महत्व को समझाना तथा उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं की जानकारी देना था। इस अवसर पर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों, चिकित्सकों और सामाजिक संस्था अनुष्का फाउंडेशन के प्रतिनिधियों ने बच्चों और उनके अभिभावकों से संवाद कर उन्हें नियमित उपचार एवं फॉलोअप के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (सीएमएस) डॉ. संजीव सक्सेना ने कहा कि क्लबफुट एक ऐसी जन्मजात समस्या है, जिसका समय रहते उपचार कर दिया जाए तो प्रभावित बच्चे का भविष्य पूरी तरह बदल सकता है। उन्होंने कहा कि सही समय पर इलाज मिलने से बच्चे सामान्य रूप से चल-फिर सकते हैं, शिक्षा प्राप्त कर सकते हैं और जीवन के हर क्षेत्र में सफलतापूर्वक आगे बढ़ सकते हैं। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि यदि नवजात शिशु के पैरों में किसी प्रकार की विकृति दिखाई दे तो तत्काल चिकित्सकीय सलाह लें।
डॉ. संजीव सक्सेना ने क्लबफुट के उपचार और जागरूकता अभियान में सहयोग कर रही अनुष्का फाउंडेशन की सराहना करते हुए कहा कि संस्था के प्रयासों से अनेक बच्चों को नया जीवन मिला है। उन्होंने कहा कि कई ऐसे बच्चे, जिनके लिए चलना-फिरना कभी कठिन था, आज सामान्य बच्चों की तरह जीवन जी रहे हैं। यह उपलब्धि स्वास्थ्य विभाग और सामाजिक संगठनों के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है।
उन्होंने क्लबफुट उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले डॉ. कृष्ण अवतार और डॉ. रोहतास के कार्यों की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि दोनों चिकित्सकों ने अपनी मेहनत और समर्पण से अनेक बच्चों को विकलांगता की संभावित समस्या से बचाया है। उनके प्रयास न केवल बच्चों और उनके परिवारों के लिए उम्मीद की किरण बने हैं, बल्कि अन्य स्वास्थ्यकर्मियों के लिए भी प्रेरणा स्रोत हैं।
कार्यक्रम में मौजूद विशेषज्ञ चिकित्सकों ने अभिभावकों को क्लबफुट के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि क्लबफुट एक जन्मजात विकृति है, जिसमें बच्चे के पैर जन्म के समय अंदर की ओर मुड़े हुए होते हैं। यह समस्या लगभग प्रत्येक 800 नवजात शिशुओं में से एक को प्रभावित करती है। हालांकि समय पर पहचान और सही उपचार के माध्यम से इसे पूरी तरह ठीक किया जा सकता है।
विशेषज्ञों ने बताया कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत संचालित राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के तहत क्लबफुट से प्रभावित बच्चों की पहचान की जाती है और उन्हें उपचार के लिए सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में भेजा जाता है। जिला अस्पताल कासगंज में इस बीमारी के उपचार की सभी सुविधाएं पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध हैं। अस्पताल में नियमित रूप से साप्ताहिक क्लबफुट क्लिनिक का संचालन किया जाता है, जहां बच्चों की जांच, प्लास्टर, परामर्श और आवश्यक उपचार प्रदान किया जाता है।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि जिले में क्लबफुट कार्यक्रम शुरू होने के बाद से अब तक 138 बच्चों का पंजीकरण किया जा चुका है। इनमें से अधिकांश बच्चों का सफलतापूर्वक उपचार किया गया है और वे अब सामान्य जीवन जी रहे हैं। उन्होंने बताया कि आशा, एएनएम और अन्य फ्रंटलाइन स्वास्थ्य कार्यकर्ता गांव-गांव जाकर ऐसे बच्चों की पहचान करने और उन्हें समय पर उपचार केंद्र तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
अधिकारियों ने कहा कि केवल उपचार ही नहीं, बल्कि अभिभावकों की नियमित काउंसलिंग भी की जाती है ताकि वे फॉलोअप प्रक्रिया को गंभीरता से लें और उपचार बीच में न छोड़ें। कई मामलों में लगातार फॉलोअप और देखभाल से बच्चों को पूरी तरह स्वस्थ बनाया जा सका है।
कार्यक्रम में अनुष्का फाउंडेशन के ब्रांच मैनेजर विशाल सक्सेना, कौशल सिंह, हॉस्पिटल मैनेजर, प्लास्टर तकनीशियन शीशपाल सहित स्वास्थ्य विभाग के कई अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे। सभी ने संकल्प लिया कि क्लबफुट जैसी समस्या के प्रति समाज में जागरूकता बढ़ाई जाएगी और प्रत्येक प्रभावित बच्चे तक समय पर उपचार पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयास किए जाएंगे।
विश्व क्लबफुट दिवस पर आयोजित यह कार्यक्रम न केवल जागरूकता बढ़ाने का माध्यम बना, बल्कि उन परिवारों के लिए उम्मीद और विश्वास का संदेश भी लेकर आया, जिनके बच्चे इस समस्या से जूझ रहे हैं। समय पर पहचान और उपचार से क्लबफुट को पूरी तरह ठीक किया जा सकता है और बच्चों को स्वस्थ एवं उज्ज्वल भविष्य दिया जा सकता है।

