Polygraph Test: 22 महीने पुराने अपहरण मामले में बड़ा अपडेट,6 संदिग्धों का होगा पॉलीग्राफ टेस्ट, कोर्ट से मिली मंजूरी

बरेली। भमोरा थाना क्षेत्र से करीब 22 महीने पहले रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हुए युवक सचिन कुमार के अपहरण मामले में जांच ने नया मोड़ ले लिया है। मामले की विवेचना कर रही पुलिस को अब कोर्ट से बड़ी सफलता मिली है। न्यायालय ने पांच नामजद आरोपियों समेत कुल छह संदिग्धों का दिल्ली स्थित सीबीआई की फॉरेंसिक साइंस लैब में पॉलीग्राफ (लाई डिटेक्टर) टेस्ट कराने की अनुमति दे दी है। अब पुलिस टेस्ट की तारीख तय कराने की प्रक्रिया में जुट गई है। अधिकारियों का मानना है कि पॉलीग्राफ टेस्ट से मामले की कई अहम कड़ियां सामने आ सकती हैं और लंबे समय से उलझी जांच को नई दिशा मिल सकती है।
Polygraph Test: 22 महीने से लापता है सचिन कुमार
भमोरा थाना क्षेत्र के गांव रामपुरा बुजुर्ग निवासी 26 वर्षीय सचिन कुमार करीब 22 महीने पहले संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गए थे। काफी तलाश के बावजूद जब उनका कोई सुराग नहीं लगा तो परिजनों ने पुलिस से शिकायत की। बाद में मामले में अपहरण की रिपोर्ट दर्ज कराई गई। परिवार शुरू से ही युवक की हत्या की आशंका जताता रहा है और लगातार निष्पक्ष जांच की मांग करता आया है।
परिजनों ने लगाया था हत्या की साजिश का आरोप
सचिन के परिजनों का आरोप है कि युवक का अपहरण कर उसकी हत्या कर दी गई और साक्ष्य छिपाने की कोशिश की गई। उन्होंने पुलिस को कई संदिग्ध लोगों के नाम भी बताए थे। इसी आधार पर पुलिस ने पांच लोगों को नामजद करते हुए मुकदमा दर्ज किया था। जांच के दौरान एक अन्य व्यक्ति की भूमिका भी संदिग्ध मिलने पर उसे भी जांच के दायरे में शामिल किया गया।
Polygraph Test: मोबाइल पीलीभीत में महिला के पास मिला था
जांच के दौरान पुलिस को एक अहम सुराग उस समय मिला जब लापता युवक का मोबाइल फोन पीलीभीत जिले में एक महिला के पास से बरामद हुआ। मोबाइल की बरामदगी के बाद पुलिस ने कॉल डिटेल, लोकेशन और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जांच को आगे बढ़ाया। हालांकि अब तक युवक का कोई पता नहीं चल सका है और न ही उसके जीवित या मृत होने के संबंध में कोई ठोस प्रमाण सामने आया है।
Polygraph Test: इन लोगों पर है शक
पुलिस जांच में अजय, वीरेंद्र कुमार समेत पांच लोगों को नामजद किया गया था। इसके अलावा एक अन्य संदिग्ध व्यक्ति की भूमिका भी सामने आने पर उसे भी जांच में शामिल किया गया। पुलिस सभी छह लोगों से कई बार पूछताछ कर चुकी है, लेकिन पूछताछ में मिले बयानों में विरोधाभास सामने आने के बाद पॉलीग्राफ टेस्ट कराने की आवश्यकता महसूस की गई।
Polygraph Test: कोर्ट ने दी पॉलीग्राफ टेस्ट की अनुमति
मामले की विवेचना कर रहे कैंट थाना प्रभारी निरीक्षक संजय धीर ने न्यायालय में प्रार्थना पत्र देकर छह संदिग्धों का पॉलीग्राफ टेस्ट कराने की अनुमति मांगी थी। सुनवाई के बाद कोर्ट ने पुलिस की मांग स्वीकार कर ली। अब सभी संदिग्धों का दिल्ली स्थित सीबीआई लैब में लाई डिटेक्टर टेस्ट कराया जाएगा। इसके लिए संबंधित एजेंसियों से समय लिया जा रहा है।
क्या होता है Polygraph Test?
पॉलीग्राफ टेस्ट के दौरान व्यक्ति के शरीर में होने वाले बदलाव, जैसे हृदय गति, रक्तचाप, सांस लेने की गति और पसीने जैसी शारीरिक प्रतिक्रियाओं को रिकॉर्ड किया जाता है। पूछे गए सवालों के दौरान इन प्रतिक्रियाओं के आधार पर विशेषज्ञ विश्लेषण करते हैं। हालांकि भारतीय कानून के अनुसार पॉलीग्राफ टेस्ट की रिपोर्ट अपने आप में अंतिम साक्ष्य नहीं मानी जाती, लेकिन यह जांच को सही दिशा देने और नए सुराग जुटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
रिपोर्ट के आधार पर आगे बढ़ेगी जांच
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पॉलीग्राफ टेस्ट की रिपोर्ट मिलने के बाद जांच को आगे बढ़ाया जाएगा। यदि रिपोर्ट में कोई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आते हैं तो उसके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। लंबे समय से लंबित इस मामले में परिजनों को उम्मीद है कि अब सच सामने आएगा और सचिन कुमार के लापता होने की गुत्थी सुलझ सकेगी।
मुख्य बिंदु
22 महीने पुराने सचिन कुमार अपहरण मामले में बड़ा अपडेट।
कोर्ट ने 5 नामजद आरोपियों समेत 6 संदिग्धों के पॉलीग्राफ टेस्ट की अनुमति दी।
टेस्ट दिल्ली स्थित सीबीआई लैब में कराया जाएगा।
जांच अधिकारी इंस्पेक्टर संजय धीर की अर्जी पर कोर्ट ने दी मंजूरी।
लापता युवक का मोबाइल पहले पीलीभीत में एक महिला के पास से बरामद हुआ था।
पॉलीग्राफ रिपोर्ट के आधार पर जांच को नई दिशा मिलने की उम्मीद है

