Bareilly Suicide Attempt: पत्नी-बेटी संग आत्मदाह करने पहुंचा व्यक्ति, सतर्क टीम ने बचाई तीन जिंदगियां

बरेली। जिला अधिकारी कार्यालय जैसी सुरक्षा के लिहाज से संवेदनशील जगह पर गुरुवार को एक ऐसा वाकया हुआ, जिसने वहां मौजूद हर किसी की सांसें थाम दीं। एक शख्स अपनी पत्नी और नाबालिग बेटी के साथ आत्मदाह करने की नीयत से डीएम कार्यालय परिसर में पहुंच गया। गनीमत रही कि वहां तैनात सुरक्षा और खुफिया टीम की सतर्कता ने समय रहते इस बड़े हादसे को टाल दिया, वरना कलेक्ट्रेट परिसर में एक बड़ा हादसा हो सकता था।
Bareilly Suicide Attempt: क्या हुआ था कलेक्ट्रेट परिसर में
घटना बरेली के थाना मीरगंज क्षेत्र के गांव खमरिया साहनी के रहने वाले 47 वर्षीय लालसिंह गंगवार से जुड़ी है। वह गुरुवार को अपनी 46 वर्षीय पत्नी राजरानी और 8 वर्षीय बेटी नंदनी के साथ जिला अधिकारी कार्यालय के बाहर पहुंचा। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, तीनों ने खुद पर ज्वलनशील पदार्थ डाल लिया और आत्मदाह करने की कोशिश की।
गनीमत यह रही कि उसी वक्त वहां तैनात इंटेलिजेंस के ओमपाल सिंह, एलआईयू के अमित कुमार और होमगार्ड संदीप मिश्रा की नजर परिवार पर पड़ गई। जैसे ही उन्होंने देखा कि लालसिंह खुद पर पेट्रोल डाल रहा है, तीनों बिना देर किए मौके की ओर दौड़ पड़े। पूरी सतर्कता और फुर्ती दिखाते हुए उन्होंने परिवार को काबू में लिया और आग लगाने की नौबत आने से पहले ही उन्हें रोक दिया। अधिकारियों का कहना है कि अगर टीम की प्रतिक्रिया में कुछ सेकंड की भी देरी होती, तो यह हादसा बेहद भयावह रूप ले सकता था
Bareilly Suicide Attempt: आखिर क्यों उठाया गया यह कदम
इस पूरे मामले के पीछे की वजह जानकर पता चलता है कि यह अचानक लिया गया फैसला नहीं था, बल्कि लंबे समय से चली आ रही एक जमीनी विवाद की परिणति थी। दरअसल, मीरगंज तहसील क्षेत्र के गांव खमरिया साहनी में एक सरकारी खड़ंजा मार्ग को लेकर विवाद काफी समय से गहराया हुआ था। लालसिंह और सुंदर लाल नामक व्यक्ति का आरोप है कि चन्द्रपाल और होमगार्ड रामप्रकाश, जो एसडीएम मीरगंज कार्यालय में तैनात है, ने मंडनपुर रोड से जुड़ने वाले सरकारी रास्ते पर वाहन खड़े कर, पशु बांधकर और लकड़ियां रखकर आवागमन को बाधित कर दिया था।
इस शिकायत के बाद राजस्व टीम ने मौके की स्थलीय जांच की, जिसमें अस्थायी कब्जा पाए जाने की बात सामने आई। हालांकि दूसरे पक्ष का कहना था कि विवादित भूमि उनकी निजी संपत्ति है, जिसे उन्होंने वर्ष 1959 में एक बैनामे के जरिए खरीदा था। जांच के दौरान आरोपी पक्ष के लोग, चन्द्रपाल और रामप्रकाश, मौके पर मौजूद नहीं हुए, जिससे मामला और उलझ गया।
अधिकारियों के अनुसार 1959 के बाद वर्ष 1986 में इलाके में चकबंदी हो चुकी है, ऐसे में पुराने बैनामे की वर्तमान कानूनी स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई। रिपोर्ट में यह भी दर्ज है कि रास्ते को लेकर गांव में लगातार तनाव बना हुआ है और पुलिस बल की मौजूदगी के बिना इस विवाद का समाधान निकालना मुश्किल है। गौरतलब है कि इससे पहले भी यह मामला प्रशासन के संज्ञान में आ चुका था। वर्ष 2023 में दोनों पक्षों के बीच एक बार समझौता भी कराया गया था, जबकि 2025 में प्रशासन ने रास्ते से अतिक्रमण भी हटवाया था।
Bareilly Suicide Attempt: दूसरी जांच में सामने आया अलग पहलू
इस पूरे प्रकरण में राजस्व विभाग की एक और जांच रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें मामले को आबादी भूमि से जुड़ा विवाद बताया गया है। इस रिपोर्ट के अनुसार, इलाके के मानचित्र में विवादित रास्ता दर्ज ही नहीं है और शिकायतकर्ता के पास आवागमन के लिए एक वैकल्पिक निकास भी मौजूद है। यानी प्रशासनिक स्तर पर इस मामले को लेकर दो अलग-अलग रिपोर्टें और निष्कर्ष हैं, जो विवाद को और पेचीदा बना देते हैं।
बार-बार शिकायत करने और समाधान न मिलने से तंग आकर ही लालसिंह ने यह अत्यंत गंभीर और खतरनाक कदम उठाने का फैसला किया, ताकि प्रशासन का ध्यान उसकी समस्या की ओर खींचा जा सके।
Bareilly Suicide Attempt: प्रशासनिक सतर्कता ने बचाई जान
इस पूरी घटना ने एक तरफ जहां प्रशासनिक कार्यालयों के बाहर तैनात सुरक्षा और खुफिया कर्मियों की सजगता को उजागर किया, वहीं दूसरी तरफ यह सवाल भी खड़ा किया कि आखिर एक परिवार को इतना बड़ा कदम उठाने की नौबत क्यों आई। स्थानीय प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए अब जल्द से जल्द विवाद के स्थायी समाधान के लिए पुलिस बल की मौजूदगी में कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल राहत की बात यह है कि इंटेलिजेंस, एलआईयू और होमगार्ड टीम की सूझबूझ की वजह से एक बड़ा हादसा टल गया और तीन जिंदगियां बच गईं। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि पीड़ित परिवार की शिकायत पर गंभीरता से विचार कर जल्द उचित कार्रवाई की जाएगी।

