ACB Action: गर्भपात की सफाई के नाम पर रिश्वत लेते सरकारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. महेन्द्र सिंह रंगे हाथों गिरफ्तार

ACB Action: गर्भपात की सफाई के नाम पर रिश्वत लेते डॉक्टर रंगे हाथों गिरफ्तार
श्रीगंगानगर। इलाज के नाम पर मरीजों से पैसे ऐंठने के मामले अक्सर सामने आते रहे हैं, लेकिन जब यह मामला किसी महिला की जान से जुड़ी नाजुक स्थिति का हो, तो इसकी गंभीरता कई गुना बढ़ जाती है। श्रीगंगानगर से भ्रष्टाचार का ऐसा ही एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने एक सरकारी चिकित्सा अधिकारी को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों दबोच लिया। आरोपी डॉक्टर ने एक गर्भवती महिला के गर्भ की सफाई करने की एवज में मोटी रकम मांगी थी, जिसकी शिकायत के बाद पूरा मामला उजागर हुआ
ACB Action: क्या था पूरा मामला
यह घटना श्रीगंगानगर जिले के घड़साना स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की है, जहां डॉ. महेन्द्र सिंह चिकित्सा अधिकारी के पद पर तैनात थे। मामले की शुरुआत तब हुई जब एक परिवादी की पत्नी, जो करीब तीन महीने की गर्भवती थी, तबीयत बिगड़ने पर इलाज के लिए इसी स्वास्थ्य केंद्र पहुंची। जांच के दौरान स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. महेन्द्र सिंह ने परिवार को बताया कि गर्भ में पल रहे बच्चे की मौत हो चुकी है और अब गर्भ की सफाई यानी डीएनसी प्रक्रिया करानी जरूरी है।
अब तक यह मामला एक सामान्य चिकित्सकीय प्रक्रिया जैसा लग रहा था, लेकिन असली खेल यहीं से शुरू हुआ। आरोप है कि डॉक्टर ने इस जरूरी और संवेदनशील प्रक्रिया को अंजाम देने के बदले परिवादी से 4,000 रुपये की रिश्वत की मांग कर डाली। हैरानी की बात यह रही कि जब परिवादी ने रकम देने में असमर्थता जताई, तो डॉक्टर ने साफ तौर पर इलाज करने से ही इनकार कर दिया। एक महिला की गंभीर स्वास्थ्य स्थिति को नजरअंदाज कर पैसों के लिए इलाज रोकने का यह रवैया, पीड़ित परिवार के लिए बेहद तकलीफदेह साबित हुआ।
ACB Action:शिकायत के बाद हरकत में आया एसीबी
अपनी पत्नी की बिगड़ती हालत और डॉक्टर की रिश्वतखोरी से परेशान परिवादी ने आखिरकार भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की श्रीगंगानगर चौकी में इसकी शिकायत दर्ज कराई। शिकायत गंभीर प्रकृति की थी, क्योंकि इसमें एक सरकारी डॉक्टर द्वारा जरूरी इलाज को रिश्वत की शर्त पर रोके जाने का आरोप था। शिकायत मिलते ही एसीबी मुख्यालय के निर्देश पर मामले की पुष्टि के लिए त्वरित कार्रवाई शुरू कर दी गई।
एसीबी की अतिरिक्त महानिदेशक स्मिता श्रीवास्तव के अनुसार, शिकायत की प्रारंभिक जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद ट्रैप की योजना तैयार की गई। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो रेंज बीकानेर के उप महानिरीक्षक पुलिस नारायण टोगस की निगरानी में पूरी रणनीति बनाई गई, ताकि आरोपी डॉक्टर को रंगे हाथों पकड़ा जा सके।
ACB Action: रंगे हाथों गिरफ्तार हुआ आरोपी डॉक्टर
गुरुवार को एसीबी श्रीगंगानगर इकाई के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पवन कुमार मीणा के नेतृत्व में पुलिस निरीक्षक राजेन्द्र कुमार और ब्यूरो की टीम ने जाल बिछाया। तय योजना के मुताबिक परिवादी को डॉक्टर के पास भेजा गया, जहां मोलभाव के बाद रिश्वत की रकम 3,500 रुपये पर तय हुई। जैसे ही डॉ. महेन्द्र सिंह ने यह रकम स्वीकार की, घात लगाकर बैठी एसीबी टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उसे मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया। टीम ने आरोपी डॉक्टर से रिश्वत की पूरी राशि भी बरामद कर ली।
यह गिरफ्तारी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र के भीतर हुई, जिससे इलाके में हड़कंप मच गया। स्थानीय लोगों में इस घटना को लेकर गहरा आक्रोश देखने को मिला, क्योंकि सरकारी अस्पतालों में मुफ्त इलाज का दावा किया जाता है, लेकिन जमीनी हकीकत में मरीजों को पैसे देकर ही उचित इलाज मिल पा रहा है।
ACB Action: आगे की कार्रवाई जारी
गिरफ्तारी के बाद आरोपी डॉक्टर से एसीबी की अतिरिक्त महानिदेशक स्मिता श्रीवास्तव और महानिरीक्षक पुलिस एस. परिमला के सुपरविजन में गहन पूछताछ की जा रही है। एसीबी अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज कर आगे की वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी गई है। जांच के दौरान यह भी पता लगाया जाएगा कि क्या आरोपी डॉक्टर पहले भी इस तरह से मरीजों से रिश्वत वसूलता रहा है।
यह मामला एक बार फिर सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था में फैले भ्रष्टाचार की पोल खोलता है, जहां जरूरतमंद और असहाय मरीजों को इलाज के बदले रिश्वत देने पर मजबूर किया जाता है। स्वास्थ्य विभाग से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई जरूरी है, ताकि आम जनता का सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर भरोसा बना रहे।
फिलहाल एसीबी की टीम इस मामले में आगे की जांच में जुटी है और उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही इस पूरे प्रकरण की तह तक पहुंचा जाएगा
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