Quad Meeting in Delhi 2026: दिल्ली क्वाड बैठक में ऑस्ट्रेलिया ने उठाया होर्मुज का मुद्दा:- कहा- समुद्री रास्तों की आज़ादी ज़रूरी,
जयशंकर बोले- आतंकवाद पर हो ‘ज़िरो टॉलरेंस’, 3 बड़े फैसलों पर बनी सहमति

नई दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली में आयोजित क्वाड (Quad) देशों के विदेश मंत्रियों की हाई-प्रोफाइल बैठक समाप्त हो गई है। इस बैठक में भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्रियों ने हिस्सा लिया। बैठक के बाद चारों देशों के नेताओं ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर एक ‘जॉइंट स्टेटमेंट’ जारी किया, जिसमें इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की सुरक्षा, वैश्विक सप्लाई चेन और ऊर्जा संकट को लेकर कई बड़े और ऐतिहासिक ऐलान किए गए हैं।
इस बैठक का मुख्य आकर्षण ऑस्ट्रेलिया द्वारा उठाया गया होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) का मुद्दा और भारत-अमेरिका के बीच हुआ क्रिटिकल मिनरल्स (महत्वपूर्ण खनिज) महा-समझौता रहा।
* होर्मुज स्ट्रेट संकट पर ऑस्ट्रेलिया की बड़ी चेतावनी

बैठक के दौरान ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग ने पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात और समुद्री सुरक्षा पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने सीधे तौर पर ईरान का नाम लेते हुए कहा, “ईरान की तरफ से होर्मुज स्ट्रेट को बंद किए जाने या वहां पैदा की जा रही बाधाओं का सीधा असर अब वैश्विक तेल और ऊर्जा सप्लाई पर दिखने लगा है। इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के कई देश इस समय भारी आर्थिक और रणनीतिक दबाव झेल रहे हैं।”
क्वाड देशों ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास करते हुए कहा कि वैश्विक व्यापार के लिए समुद्री रास्तों की आज़ादी (Free and Open Sea Lanes) बनाए रखना बेहद ज़रूरी है। अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों पर किसी भी तरह का अवैध टोल या पाबंदी नहीं लगनी चाहिए।
* आतंकवाद पर एस. जयशंकर का कड़ा रुख: ‘देशों को अपनी सुरक्षा का अधिकार’

भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने वैश्विक मंच से आतंकवाद को पनाह देने वाले देशों को कड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा, “आतंकवाद के खिलाफ दुनिया में ‘जीरो टॉलरेंस’ (Zero Tolerance) की नीति होनी चाहिए। इसमें कोई समझौता नहीं हो सकता। जिन देशों पर आतंकी हमले होते हैं, उन्हें अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत अपनी सुरक्षा करने और जवाबी कार्रवाई करने का पूरा अधिकार है।”
जयशंकर ने सोशल मीडिया पर भी लिखा कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों के बीच इंडो-पैसिफिक क्षेत्र दुनिया की अर्थव्यवस्था, ऊर्जा व्यापार और समुद्री कारोबार के लिए और ज्यादा महत्वपूर्ण बनने वाला है, इसलिए क्वाड देशों की जिम्मेदारी भी अब पहले से काफी बढ़ गई है।
* क्वाड के 3 बड़े फैसले और 5 बड़े ऐतिहासिक ऐलान
दिल्ली में हुई इस बैठक में क्वाड केवल चर्चा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसे एक ‘एक्शन-ओरिएंटेड’ साझेदारी बताते हुए 5 बड़े ऐतिहासिक ऐलान किए गए:
1. क्वाड क्रिटिकल मिनरल्स फ्रेमवर्क (Critical Minerals Framework)
आधुनिक तकनीकों, सेमीकंडक्टर और ईवी (EV) इंडस्ट्री के लिए बेहद जरूरी महत्वपूर्ण खनिजों की सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए ‘क्वाड क्रिटिकल मिनरल्स फ्रेमवर्क’ शुरू करने का फैसला लिया गया है। इसके तहत चारों देश मिलकर माइनिंग, प्रोसेसिंग और रीसाइक्लिंग के क्षेत्र में निवेश बढ़ाएंगे ताकि किसी एक देश (चीन) पर वैश्विक निर्भरता को खत्म किया जा सके।
2. भारत-अमेरिका द्विपक्षीय खनिज समझौता
क्वाड बैठक के इतर भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने क्रिटिकल मिनरल्स और रेयर अर्थ (दुर्लभ खनिज) की सप्लाई सुरक्षित करने के लिए एक द्विपक्षीय समझौते (Bilateral Pact) पर हस्ताक्षर किए।
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मार्को रुबियो ने कहा: “यह समझौता भारत-अमेरिका की मजबूत रणनीतिक साझेदारी का वास्तविक उदाहरण है। हम नहीं चाहते कि इन महत्वपूर्ण खनिजों की सप्लाई किसी एक देश या स्रोत के नियंत्रण में रहे, क्योंकि इससे भविष्य में संकट पैदा हो सकता है।”
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एस. जयशंकर ने कहा: “इसका मुख्य मकसद महत्वपूर्ण खनिजों की एक मजबूत और डाइवर्सिफाइड (विविधतापूर्ण) सप्लाई चेन तैयार करना है, जिससे किसी एक सोर्स पर निर्भरता कम हो सके।”
3. इंडो-पैसिफिक ऊर्जा सुरक्षा पहल
क्षेत्र में फ्यूल और एनर्जी सुरक्षा बढ़ाने के लिए एक नई पहल शुरू की गई है। इसके तहत अमेरिका का ऊर्जा विभाग इसी साल क्वाड देशों के साथ मिलकर एक ‘फ्यूल सिक्योरिटी फोरम’ (Fuel Security Forum) का आयोजन करेगा, जिसमें इमरजेंसी अभ्यास और नीतियां तैयार की जाएंगी।
4. सैटेलाइट डेटा शेयरिंग (समुद्री निगरानी)
हिंद महासागर और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अवैध रूप से मछली पकड़ने, हथियारों/नशीले पदार्थों की तस्करी को रोकने और आपदा राहत कार्यों में तेजी लाने के लिए चारों देश आपस में सैटेलाइट डेटा साझा करेंगे।
5. फिजी में ‘पोर्ट्स ऑफ द फ्यूचर’ प्रोजेक्ट
क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को मजबूत करने और चीन के बढ़ते प्रभाव को काउंटर करने के लिए क्वाड देशों ने प्रशांत महासागरीय द्वीप देश फिजी (Fiji) में ‘पोर्ट्स ऑफ द Future’ परियोजना के तहत बंदरगाह इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने का फैसला लिया है।
*जब जयशंकर की हाजिरजवाबी पर हंस पड़ा पूरा हॉल
गंभीर कूटनीतिक चर्चाओं के बीच प्रेस ब्रीफिंग के दौरान एक बेहद हल्का-फुल्का और मजेदार पल भी देखने को मिला। दरअसल, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो का ट्रांसलेशन हेडफोन अचानक काम नहीं कर रहा था। इस पर जापानी विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी ने चुटकी लेते हुए कहा, “मुझे लगा कि आप जापानी भाषा जानते हैं (इसलिए हेडफोन नहीं लगा रहे)।”
मोतेगी की इस बात पर भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने हंसते हुए तुरंत जवाब दिया, “वो जापानी सीख रहे हैं!” जयशंकर के इस मजाकिया अंदाज पर पूरा हॉल ठहाकों से गूंज उठा।
📊 पर्दे के पीछे की कहानी: ट्रम्प युग में क्वाड के अंदरूनी समीकरण
इस बैठक की सफलता के बीच अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने क्वाड के अंदरूनी कूटनीतिक तनावों का भी विश्लेषण किया है।
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2025 की वो समिट जो टल गई: तय कार्यक्रम के अनुसार साल 2025 में मुख्य क्वाड लीडर्स समिट (Quad Leaders’ Summit) की मेजबानी भारत को करनी थी, लेकिन वह नहीं हो सकी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसकी एक बड़ी वजह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और भारत के बीच हाल के महीनों में बढ़ा व्यापारिक और नीतिगत तनाव रहा।
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तनाव के मुख्य कारण: ट्रम्प प्रशासन द्वारा भारतीय सामानों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाना, भारत द्वारा रूस से हथियार और तेल खरीदने की आलोचना करना और भारत-पाकिस्तान मामले में मध्यस्थता के दावे करना जैसी वजहों से दोनों देशों के रिश्तों में कुछ असहजता आई थी। इसके अलावा ट्रम्प द्वारा गाजा सीजफायर के लिए बनाए गए ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में पाकिस्तान को सदस्य बनाना भी भारत के लिए संवेदनशील मुद्दा रहा।
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रुबियो पर बड़ी जिम्मेदारी: अमेरिकी विदेश मंत्री के रूप में पद संभालने के बाद मार्को रुबियो की यह पहली बड़ी बैठक थी। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रम्प प्रशासन में भारत-अमेरिका के रिश्तों को दोबारा पटरी पर लाने और क्वाड को बिखरने से बचाने की बड़ी जिम्मेदारी अब रुबियो के कंधों पर है।
जापान और ऑस्ट्रेलिया लगातार कोशिश कर रहे हैं कि यह समूह कमजोर न पड़े, क्योंकि अमेरिकी विशेषज्ञ डेरेक ग्रॉसमैन ने चेतावनी दी है कि अगर क्वाड कमजोर पड़ता है, तो इसका सबसे बड़ा सीधा फायदा चीन (China) को होगा। क्वाड के राष्ट्राध्यक्षों की अगली मुख्य बैठक 2026 के अंत में ऑस्ट्रेलिया में होने की संभावना है।
* आप क्या सोचते हैं?
क्या भारत-अमेरिका का यह क्रिटिकल मिनरल्स समझौता चीन के व्यापारिक एकाधिकार को खत्म कर पाएगा? नीचे कमेंट बॉक्स में अपनी राय जरूर दें और इस खबर को शेयर करें।
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