खेत की मेड़ को लेकर खूनी संघर्ष, पांच घायल, महिला की हालत गंभीर
बरेली में पुराने जमीनी विवाद ने लिया हिंसक रूप, पुलिस ने शुरू की जांच
बरेली। जिले के थाना नवाबगंज क्षेत्र स्थित गांव ज्यौरा मकरंदपुर में गुरुवार को खेत की मेड़ को लेकर वर्षों पुराना विवाद अचानक खूनी संघर्ष में तब्दील हो गया। दोनों पक्षों के बीच हुई हिंसक झड़प और मारपीट में पांच लोग घायल हो गए, जिनमें एक महिला की हालत गंभीर बनी हुई है। घटना ने पूरे गांव में सनसनी फैला दी और आसपास के इलाकों में भी इसकी चर्चा तेज हो गई है।
खेत की मेड़ को लेकर खूनी संघर्ष: कैसे हुई घटना की शुरुआत
जानकारी के मुताबिक, गांव निवासी भगवानदास और गांव के ही चेतराम, हेमंत, अमित तथा अभिषेक के बीच खेत की मेड़ को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। भगवानदास का आरोप है कि इन चारों आरोपियों के साथ मेड़ के मुद्दे पर पहले भी कई बार कहासुनी और तनातनी हो चुकी है, लेकिन मामला कभी पूरी तरह सुलझ नहीं पाया।
गुरुवार सुबह जब भगवानदास अपने खेत पर पहुंचे तो उन्होंने देखा कि आरोपी पक्ष के लोग एक बार फिर खेत की मेड़ काट रहे थे। यह देखकर भगवानदास ने तुरंत इसका विरोध किया। उनके मुताबिक, जैसे ही उन्होंने मेड़ काटने पर आपत्ति जताई, आरोपियों ने गाली-गलौज शुरू कर दी। देखते ही देखते बातचीत का यह विवाद हाथापाई और फिर पूरी तरह हिंसक झड़प में बदल गया।
खेत की मेड़ को लेकर खूनी संघर्ष: लाठी-डंडों और फावड़े से हमला
पीड़ित पक्ष के अनुसार, विरोध बढ़ने पर दूसरे पक्ष के लोगों ने लाठी-डंडों और फावड़े जैसे धारदार व भारी औजारों से हमला बोल दिया। अचानक हुए इस हमले से मौके पर अफरा-तफरी मच गई। खेतों में काम कर रहे और आसपास मौजूद ग्रामीण जब शोर-शराबा सुनकर मौके पर पहुंचे, तब तक दोनों पक्षों के बीच जमकर मारपीट हो चुकी थी। स्थानीय लोगों ने किसी तरह बीच-बचाव कर दोनों पक्षों को अलग किया, तब जाकर स्थिति काबू में आई।
इस पूरी झड़प में रीना देवी, रामकली, अनीता, कविता और भगवानदास घायल हो गए। घटना की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पांच लोग एक साथ घायल हुए, जिनमें महिलाओं की संख्या अधिक रही।
महिला की हालत गंभीर, अस्पताल में भर्ती
घायलों को तुरंत उपचार के लिए स्थानीय अस्पताल ले जाया गया। जांच के दौरान चिकित्सकों ने पाया कि रीना देवी की हालत अन्य घायलों की तुलना में अधिक गंभीर है। इसे देखते हुए उन्हें तत्काल जिला अस्पताल रेफर किया गया, जहां फिलहाल उनका उपचार जारी है। वहीं अन्य घायलों— रामकली, अनीता, कविता और भगवानदास— का प्राथमिक उपचार कर मेडिकल परीक्षण कराया गया है।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और सभी घायलों को तत्काल चिकित्सीय परीक्षण के लिए भिजवाया। पुलिस ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया और मौके पर मौजूद ग्रामीणों से भी घटना के बारे में जानकारी जुटाई।
पीड़ित पक्ष ने थाने में दी तहरीर
घटना के बाद पीड़ित पक्ष सीधे थाना नवाबगंज पहुंचा और आरोपियों चेतराम, हेमंत, अमित व अभिषेक के खिलाफ लिखित तहरीर देकर सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की। पीड़ितों का कहना है कि खेत की मेड़ को लेकर वर्षों से यह विवाद चला आ रहा है। इस दौरान कई बार दोनों पक्षों के बीच आपसी समझौते की कोशिश भी की गई, ग्रामीणों और बुजुर्गों ने पंचायत के जरिए मामला सुलझाने का प्रयास भी किया, लेकिन कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया।
पीड़ित पक्ष का साफ आरोप है कि गुरुवार को आरोपियों ने जानबूझकर और सुनियोजित तरीके से मेड़ काटने का काम शुरू किया था, ताकि विवाद को फिर हवा दी जा सके। जब भगवानदास ने इसका विरोध किया, तो आरोपियों ने पहले से तैयार होकर हमला किया, जिसमें लाठी-डंडे और फावड़े जैसे हथियारों का इस्तेमाल हुआ।
पुलिस जांच में जुटी, बयान दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू
तहरीर मिलने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, सभी घायलों का मेडिकल परीक्षण कराया गया है और दोनों पक्षों के बयान दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जांच अधिकारी घटनास्थल से जुटाए गए साक्ष्यों, चश्मदीदों के बयान और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर मामले की तह तक जाने का प्रयास कर रहे हैं।
पुलिस का कहना है कि तहरीर, मेडिकल रिपोर्ट और जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी। यदि जांच में यह पुष्टि होती है कि आरोपियों ने जानबूझकर मारपीट की और हमला किया, तो संबंधित धाराओं में विधिवत मुकदमा दर्ज कर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
गांव में पहले भी हो चुके हैं ऐसे विवाद
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि गांव ज्यौरा मकरंदपुर में खेतों की मेड़ को लेकर यह कोई पहला विवाद नहीं है। इससे पहले भी गांव में इसी तरह के जमीनी विवाद कई बार सामने आ चुके हैं। ग्रामीणों के अनुसार, ऐसे मामलों में अक्सर समय रहते उचित समाधान नहीं हो पाता, जिसके चलते छोटे-मोटे विवाद भी धीरे-धीरे बड़ा रूप ले लेते हैं और अंततः हिंसक झड़प में तब्दील हो जाते हैं।
गांव के कई लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि राजस्व विभाग की टीम भेजकर खेतों की विधिवत पैमाइश कराई जाए, ताकि सीमाओं को लेकर चल रहे भ्रम और विवाद को हमेशा के लिए खत्म किया जा सके। ग्रामीणों का मानना है कि अगर समय रहते पैमाइश करा कर मेड़बंदी का स्थायी समाधान निकाला जाए, तो भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोका जा सकता है।
प्रशासन से स्थायी समाधान की मांग
इस घटना के बाद गांव में प्रशासन के प्रति नाराजगी भी देखी जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर प्रशासन समय रहते इस तरह के भूमि विवादों में हस्तक्षेप कर स्थायी हल निकाले, तो आए दिन होने वाली इन घटनाओं को रोका जा सकता है। ग्रामीणों ने प्रशासन से अपील की है कि जल्द से जल्द राजस्व विभाग की टीम गांव भेजकर विवादित खेतों की सीमाओं का सीमांकन कराया जाए।
पुलिस का आश्वासन: निष्पक्ष होगी जांच
फिलहाल पूरा मामला पुलिस जांच के दायरे में है। पुलिस अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि इस मामले की जांच पूरी तरह निष्पक्ष तरीके से की जाएगी। जांच में जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कानून के अनुसार सख्त से सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। पुलिस ने ग्रामीणों से भी अपील की है कि वे कानून अपने हाथ में लेने की बजाय प्रशासन और पुलिस पर भरोसा रखें तथा किसी भी विवाद की स्थिति में तुरंत नजदीकी थाने को सूचित करें।
सारांश: बरेली के थाना नवाबगंज क्षेत्र के गांव ज्यौरा मकरंदपुर में खेत की मेड़ को लेकर पुराना विवाद गुरुवार को हिंसक संघर्ष में बदल गया, जिसमें पांच लोग घायल हुए। घायलों में रीना देवी की हालत गंभीर होने पर उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जबकि रामकली, अनीता, कविता और भगवानदास का प्राथमिक उपचार किया गया। पीड़ित पक्ष की तहरीर पर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन दिया है। ग्रामीणों ने प्रशासन से खेतों की पैमाइश कराकर स्थायी समाधान की मांग की है।


