Bareilly Temple Land Dispute: मंदिर की 119 बीघा कृषि भूमि के कथित अवैध विक्रय का आरोप, डीएम से जांच की मांग

Bareilly Temple Land Dispute को लेकर उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में एक गंभीर मामला सामने आया है। फरीदपुर तहसील के ग्राम बिलौआ ता. नगरिया स्थित श्री पृथ्वीनाथ महादेव मंदिर की करीब 119 बीघा कृषि भूमि के कथित अवैध विक्रय और उससे प्राप्त धन के दुरुपयोग के आरोप लगाए गए हैं। इस मामले में मंदिर से जुड़े महंत प्रमोद पुरी नागा बाबा ने जिलाधिकारी को शिकायती पत्र सौंपकर निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
फिलहाल यह मामला शिकायत और आरोपों के स्तर पर है। प्रशासन की ओर से जांच की प्रक्रिया शुरू किए जाने की मांग की गई है और आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
क्या है पूरा मामला?
शिकायत के अनुसार, फरीदपुर तहसील के ग्राम बिलौआ ता. नगरिया स्थित श्री पृथ्वीनाथ महादेव मंदिर के नाम राजस्व अभिलेखों में लगभग 119 बीघा कृषि भूमि दर्ज है। शिकायत में कहा गया है कि यह भूमि गाटा संख्या 277 सहित कुल आठ गाटा संख्याओं में दर्ज है और मंदिर की संपत्ति मानी जाती है।
महंत प्रमोद पुरी नागा बाबा का आरोप है कि मंदिर की इस भूमि का संरक्षण और प्रबंधन करने वाले सरवराकार सुशील कुमार गिरी ने कथित रूप से राजस्व अधिकारियों से मिलीभगत कर भूमि का एक हिस्सा अपने नाम दर्ज करा लिया।
शिकायत में क्या लगाए गए हैं आरोप?
शिकायतकर्ता ने अपने प्रार्थना पत्र में कई गंभीर आरोप लगाए हैं। प्रमुख आरोप इस प्रकार हैं—
- मंदिर की करीब 119 बीघा कृषि भूमि में से कुछ हिस्सा कथित रूप से अपने नाम दर्ज कराया गया।
- सरवराकार होने के बावजूद मंदिर की भूमि बेचने अथवा हस्तांतरित करने का अधिकार नहीं होने का दावा।
- कुछ कृषि भूमि ईंट-भट्ठा संचालकों को उपयोग के लिए दिए जाने का आरोप।
- ग्रामीणों से धन लेकर भूमि को आवासीय उपयोग के लिए देने का आरोप।
- कई स्थानों पर मकानों का निर्माण हो जाने का दावा।
- मंदिर की संपत्ति लगातार कम होने की बात।
- भूमि से प्राप्त धन का मंदिर के विकास पर उपयोग न होकर निजी एवं पारिवारिक उपयोग में खर्च किए जाने का आरोप।
इन आरोपों की अभी किसी सक्षम प्राधिकारी द्वारा पुष्टि नहीं की गई है।
मंदिर की स्थिति को लेकर भी उठाए सवाल
महंत प्रमोद पुरी नागा बाबा का कहना है कि यदि मंदिर की भूमि से आय प्राप्त हो रही है, तो उसका उपयोग मंदिर के संरक्षण, रखरखाव और धार्मिक गतिविधियों के लिए किया जाना चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि—
- मंदिर की इमारत जर्जर स्थिति में है।
- विकास और मरम्मत कार्यों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया।
- मंदिर की संपत्ति से होने वाली आय का उचित उपयोग नहीं हो रहा।
हालांकि इन आरोपों पर संबंधित पक्ष की प्रतिक्रिया सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई है।
जिलाधिकारी से क्या मांग की गई?
शिकायतकर्ता ने जिलाधिकारी से कई महत्वपूर्ण मांगें की हैं।
इनमें प्रमुख रूप से—
- मंदिर की भूमि के कथित अवैध विक्रय पर तत्काल रोक।
- पूरे मामले की निष्पक्ष राजस्व एवं प्रशासनिक जांच।
- राजस्व अभिलेखों की जांच।
- कथित रूप से की गई नामांतरण प्रक्रिया की जांच।
- यदि आरोप सही पाए जाएं तो संबंधित लोगों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई।
- मंदिर की भूमि को सुरक्षित रखने के लिए प्रशासनिक निगरानी।
सरवराकार की भूमिका क्या होती है?
धार्मिक संस्थाओं में सरवराकार (Shebait/Manager) की भूमिका मंदिर की संपत्ति और धार्मिक कार्यों के प्रबंधन से जुड़ी होती है।
सामान्यतः—
- सरवराकार मंदिर की संपत्ति का प्रबंधन करता है।
- धार्मिक गतिविधियों की व्यवस्था देखता है।
- संपत्ति का संरक्षण उसकी जिम्मेदारी होती है।
- मंदिर की संपत्ति के संबंध में उसके अधिकार संबंधित कानूनों और न्यायालयों के निर्णयों पर निर्भर करते हैं।
इस मामले में शिकायतकर्ता का दावा है कि संबंधित व्यक्ति को भूमि बेचने का अधिकार नहीं था। हालांकि इस दावे की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
धार्मिक संपत्तियों की सुरक्षा क्यों है महत्वपूर्ण?
मंदिरों, मठों और धार्मिक संस्थाओं की संपत्तियां समाज की आस्था से जुड़ी होती हैं।
यदि ऐसी संपत्तियों को लेकर विवाद सामने आते हैं तो—
- धार्मिक भावनाएं प्रभावित हो सकती हैं।
- लंबे समय तक कानूनी विवाद चलते हैं।
- स्थानीय प्रशासन को हस्तक्षेप करना पड़ता है।
- राजस्व अभिलेखों की जांच आवश्यक हो जाती है।
इसी कारण शिकायतकर्ता ने प्रशासन से शीघ्र कार्रवाई की मांग की है।
प्रशासन की भूमिका क्या होगी?
यदि शिकायत पर जांच शुरू होती है तो प्रशासन निम्न बिंदुओं की जांच कर सकता है—
- राजस्व रिकॉर्ड का सत्यापन।
- गाटा संख्या और भूमि स्वामित्व की स्थिति।
- नामांतरण (Mutation) की वैधता।
- कथित बिक्री या हस्तांतरण के दस्तावेज।
- भूमि उपयोग में परिवर्तन की स्थिति।
- शिकायतकर्ता एवं संबंधित पक्ष के बयान।
जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है।
स्थानीय स्तर पर क्या चर्चा है?
मामला सामने आने के बाद क्षेत्र में मंदिर की भूमि को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि—
- धार्मिक संपत्तियों का संरक्षण जरूरी है।
- यदि किसी प्रकार की अनियमितता हुई है तो निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
- दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
- यदि आरोप गलत हैं तो जांच के माध्यम से वास्तविक स्थिति सामने आनी चाहिए।
फिलहाल क्या स्थिति है?
- महंत प्रमोद पुरी नागा बाबा ने जिलाधिकारी को शिकायत दी।
- 119 बीघा मंदिर भूमि के कथित अवैध विक्रय का आरोप।
- भूमि से प्राप्त धन के दुरुपयोग का भी आरोप।
- मंदिर की जर्जर स्थिति का मुद्दा उठाया गया।
- निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग।
- प्रशासनिक स्तर पर शिकायत के परीक्षण की अपेक्षा।
निष्कर्ष
Bareilly Temple Land Dispute फिलहाल शिकायत और आरोपों पर आधारित मामला है। शिकायतकर्ता ने मंदिर की भूमि के कथित अवैध विक्रय, राजस्व रिकॉर्ड में गड़बड़ी और धन के दुरुपयोग के गंभीर आरोप लगाए हैं। दूसरी ओर, संबंधित पक्ष का विस्तृत पक्ष अभी सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है। ऐसे में पूरे मामले की वास्तविक स्थिति प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई की जा सकती है। वहीं यदि आरोप निराधार पाए जाते हैं तो जांच रिपोर्ट से स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।

