IRAN-USA WAR: ईरान को नहीं झुका पाया अमेरिका? ट्रंप ने बनाया होर्मुज का नया चौंकाने वाला विकल्प, सीरिया-इराक के साथ 70 साल पुरानी तेल पाइपलाइन करेंगे शुरू

Kirkuk Baniyas Pipeline: 1952 में बनी यह पाइपलाइन इराक को भूमध्यसागर के रास्ते सीधे तेल निर्यात का विकल्प देगी और होर्मुज जलडमरूमध्य पर निर्भरता कम करेगी.
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य पर मंडरा रहे खतरे के बीच अमेरिका, इराक और सीरिया एक बड़े ऊर्जा समझौते की तैयारी में हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, तीनों देश अगले सप्ताह उत्तरी इराक को सीरिया के भूमध्यसागरीय तट से जोड़ने वाली दशकों पुरानी तेल पाइपलाइन को फिर से शुरू करने की योजना का ऐलान कर सकते हैं. इस परियोजना का मकसद होर्मुज जलडमरूमध्य पर निर्भरता घटाना और इराक के तेल निर्यात के लिए एक वैकल्पिक और सुरक्षित रास्ता तैयार करना है.
अगले सप्ताह हो सकता है समझौते का ऐलान
रिपोर्ट के अनुसार, इराक के प्रधानमंत्री अली अल-जायदी अगले सप्ताह अमेरिका के दौरे पर जाएंगे. इस दौरान उनकी व्हाइट हाउस में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात प्रस्तावित है. माना जा रहा है कि इसी दौरे में तीनों देशों के बीच पाइपलाइन समझौते की औपचारिक घोषणा हो सकती है. रिपोर्टों में यह भी सामने आया है कि सीरिया के विदेश मंत्री असद अल-शैबानी भी इस समझौते पर हस्ताक्षर समारोह में शामिल होने के लिए अमेरिका जा सकते हैं.
ईरान-अमेरिका WAR: किर्कुक-बनियास पाइपलाइन होगी फिर से चालू
प्रस्तावित योजना के केंद्र में किर्कुक-बनियास पाइपलाइन है, जो इराक के उत्तरी शहर किर्कुक से सीरिया के भूमध्यसागरीय बंदरगाह बनियास तक करीब 800 किलोमीटर लंबी है. इसके दोबारा शुरू होने से इराक को भूमध्यसागर के जरिए अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक सीधे तेल निर्यात करने का रास्ता मिलेगा और खाड़ी के समुद्री मार्गों पर उसकी निर्भरता काफी हद तक कम हो जाएगी. इराक फिलहाल अपने कुल तेल निर्यात के करीब 95 फीसदी हिस्से के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य पर निर्भर है, जिससे यह परियोजना उसके लिए रणनीतिक रूप से बेहद अहम मानी जा रही है.
हाल ही में इराक की सरकार ने अमेरिकी कंपनियों कैपिटल टीआई और शेवरॉन के साथ-साथ एक कतरी कंपनी को भी किर्कुक और अनबार प्रांत के हदीथा से बनियास तक पाइपलाइन परियोजनाओं का सर्वेक्षण करने के लिए प्रारंभिक मंजूरी दी है. यह कदम अमेरिकी कंपनियों को इस बड़ी परियोजना में सीधे भाग लेने का रास्ता खोल सकता है.
ईरान-अमेरिका WAR: अमेरिका कर रहा है बातचीत की अगुवाई
रिपोर्ट में कहा गया है कि तुर्किये में अमेरिका के राजदूत और सीरिया-इराक मामलों के विशेष दूत टॉम बैरक इस समझौते को लेकर बातचीत का नेतृत्व कर रहे हैं. अमेरिका इसे क्षेत्रीय आर्थिक सहयोग बढ़ाने और पश्चिम एशिया में अपनी रणनीतिक स्थिति मजबूत करने वाली एक अहम परियोजना के तौर पर देख रहा है. इराकी प्रधानमंत्री अपने इस दौरे के दौरान अमेरिका के प्रमुख ऊर्जा केंद्र माने जाने वाले टेक्सास राज्य का भी दौरा करेंगे. जानकारों के मुताबिक बैरक और अल-जायदी के बीच बेहतर तालमेल बना है और अमेरिका इस पाइपलाइन परियोजना को क्षेत्र में आपसी कारोबारी सहयोग के एक मॉडल के तौर पर पेश करना चाहता है.
पिछले महीने ही इराकी प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी एक बयान में बताया गया था कि अल-जायदी अमेरिकी निवेश कंपनी टीआई कैपिटल के साथ किर्कुक-बनियास पाइपलाइन के पुनर्वास से जुड़े एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर करेंगे. अनुमान है कि इस परियोजना पर करीब 8 अरब डॉलर की लागत आ सकती है और बहाल होने के बाद पाइपलाइन की क्षमता 7 लाख बैरल प्रतिदिन तक हो सकती है.
1952 में बनी थी पाइपलाइन, कई बार हुई बंद
किर्कुक-बनियास पाइपलाइन का निर्माण 1952 में इराक पेट्रोलियम कंपनी ने कराया था. उस समय इसकी क्षमता करीब तीन लाख बैरल प्रतिदिन थी. यह पाइपलाइन अपने समय की सबसे बड़ी परियोजनाओं में से एक थी और मध्य पूर्व में बनी दूसरी सबसे बड़ी “बिग-इंच” तेल पाइपलाइन थी.
इस पाइपलाइन का इतिहास उतार-चढ़ाव भरा रहा है. 1956-57 के स्वेज संकट के दौरान तोड़फोड़ की वजह से इसे बंद करना पड़ा था. इसके बाद 1980 के दशक में ईरान-इराक युद्ध के दौरान सीरिया के ईरान के समर्थन में आने के बाद इराक ने इस पाइपलाइन का संचालन 1982 से 2000 तक बंद रखा. वर्ष 2000 में संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंधों को दरकिनार करने के लिए इसे कुछ समय के लिए फिर शुरू किया गया था. लेकिन 2003 में अमेरिका के नेतृत्व वाले इराक युद्ध के दौरान पाइपलाइन को भारी नुकसान पहुंचा और तब से यह करीब दो दशकों से बंद पड़ी है.
गौरतलब है कि 2007 में भी सीरिया और इराक ने इस पाइपलाइन के पुनर्वास पर सहमति बनाई थी और इसका जिम्मा रूसी कंपनी गैज़प्रोम की सहायक इकाई स्ट्रॉयट्रांसगाज़ को सौंपा गया था, लेकिन बाद में हालात बदलने से यह योजना आगे नहीं बढ़ सकी.
होर्मुज पर तनाव के बीच बढ़ा महत्व
हाल के दिनों में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंता काफी बढ़ गई है. दुनिया के एक बड़े हिस्से का तेल इसी रास्ते से होकर गुजरता है, और ईरान की ओर से इस जलमार्ग पर नियंत्रण मजबूत करने की कोशिशों ने कई देशों को वैकल्पिक निर्यात मार्गों पर गंभीरता से सोचने को मजबूर किया है.
युद्ध के दौरान इराक ने सीरिया के रास्ते टैंकर ट्रकों के जरिए कच्चे तेल का निर्यात शुरू किया था, हालांकि इसकी मात्रा बहुत सीमित रही. विश्लेषकों का कहना है कि युद्ध के बाद इराक ने सीरिया को एक नए नजरिए से देखना शुरू किया है. ऐसे में इस पाइपलाइन के फिर से शुरू होने से मध्य पूर्व में तेल निर्यात की पूरी व्यवस्था में बड़ा बदलाव आ सकता है और होर्मुज पर निर्भरता कम करने में काफी मदद मिलेगी.
सीरिया के लिए भी बड़ा आर्थिक अवसर
यह परियोजना सिर्फ इराक के लिए ही नहीं, बल्कि सीरिया के लिए भी बेहद अहम मानी जा रही है. लंबे गृह युद्ध के बाद सीरिया की अर्थव्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है और देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए ज्यादातर आयात पर निर्भर है. जनवरी 2026 में हुए एक व्यापक संघर्ष-विराम समझौते के बाद दमिश्क सरकार ने सीरिया के उत्तर-पूर्वी हिस्से के तेल और गैस संसाधनों पर फिर से नियंत्रण हासिल कर लिया है, जिससे सीमा-पार पाइपलाइन परियोजनाओं के लिए अनुबंध और राजस्व संग्रह जैसी प्रक्रियाएं आसान हो गई हैं.
अनुमान है कि यह पाइपलाइन शुरू होने पर सीरिया को हर साल करीब 20 करोड़ डॉलर का पारगमन राजस्व (ट्रांजिट रेवेन्यू) मिल सकता है. इसके अलावा, इराकी कच्चा तेल मिलने से सीरिया की रूस पर निर्भरता भी कम होगी, जो अभी प्रतिबंधित टैंकरों के जरिए तेल आयात कर रहा है. जुलाई 2025 की शुरुआत में अमेरिका ने सीरिया के तेल मंत्रालय, उसकी दो रिफाइनरियों और समुद्री प्राधिकरण पर लगे प्रतिबंध भी हटा दिए थे, जिससे सीरिया के लिए दूसरे देशों के साथ ऊर्जा सहयोग बढ़ाने का रास्ता और साफ हो गया.
अब तक नहीं हुई है आधिकारिक पुष्टि
हालांकि, अब तक अमेरिका, इराक और सीरिया की ओर से इस प्रस्तावित समझौते की पूरी तरह आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है. जून 2026 में इराकी प्रधानमंत्री अली अल-जायदी और अमेरिकी विशेष दूत टॉम बैरक के बीच बगदाद में हुई बातचीत में इस पाइपलाइन के पुनर्वास को लेकर साझा प्रतिबद्धता जताई गई थी, लेकिन अंतिम और औपचारिक समझौते का ऐलान अब तक बाकी है.
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह योजना पूरी तरह लागू होती है, तो यह पश्चिम एशिया के ऊर्जा और व्यापार ढांचे में एक बड़ा बदलाव साबित हो सकती है. यह न सिर्फ इराक को होर्मुज जलडमरूमध्य पर निर्भरता से मुक्त करेगी, बल्कि सीरिया के पुनर्निर्माण में भी अहम भूमिका निभा सकती है और क्षेत्र में अमेरिका के रणनीतिक प्रभाव को भी मजबूत करेगी.

