Cockroach Janta Party का PM Modi को खुला पत्र: NEET Paper Leak से जुड़ी छात्रों की मौत पर मुआवज़े और इस्तीफे की मांग 
19 जून 2026, शुक्रवार को छात्रों के अधिकारों के लिए सक्रिय संगठन Cockroach Janta Party (CJP) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक खुला पत्र लिखा है। इस पत्र में संगठन ने NEET पेपर लीक विवाद से जुड़ी कथित आत्महत्याओं के मामलों में प्रभावित परिवारों के लिए एक करोड़ रुपये के मुआवज़े की मांग की है, साथ ही केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को भी दोहराया है।
क्या है पूरा मामला
यह विवाद इस साल मई में हुई NEET-UG 2026 परीक्षा से जुड़ा है, जिसमें पेपर लीक और गड़बड़ियों के गंभीर आरोप लगे थे। 3 मई को आयोजित हुई इस परीक्षा में 22.7 लाख से ज्यादा अभ्यर्थियों ने हिस्सा लिया था, जो मेडिकल और डेंटल कोर्सेज में दाखिले के लिए जरूरी मानी जाती है। जांच में यह सामने आया कि पहले से प्रसारित एक “गेस पेपर” और असली प्रश्नपत्र के बीच कई समानताएं थीं, जिसके बाद 12 मई को यह परीक्षा रद्द कर दी गई।
राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) ने बाद में स्पष्ट किया कि छात्रों द्वारा पहले से जमा की गई परीक्षा फीस वापस कर दी जाएगी और दोबारा परीक्षा के लिए किसी नए रजिस्ट्रेशन या अतिरिक्त शुल्क की जरूरत नहीं होगी। 15 मई को NTA ने ऐलान किया कि दोबारा परीक्षा 21 जून 2026 को आयोजित की जाएगी।
इस पूरे घटनाक्रम ने देशभर में बड़े पैमाने पर जांच को जन्म दिया। राजस्थान में स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG) ने जांच शुरू की और लीक हुई सामग्री व असली परीक्षा के बीच “गहरी समानताएं” पाईं।
छात्रों की आत्महत्याओं को लेकर बढ़ी चिंता
CJP के संस्थापक अभिजीत डिप्के ने अपने पत्र में बताया कि परीक्षा रद्द होने के बाद के घटनाक्रम के दौरान 11 NEET अभ्यर्थियों ने कथित तौर पर आत्महत्या कर ली। डिप्के के अनुसार, 3 मई की परीक्षा रद्द होने के बाद के 48 घंटों के भीतर ही पांच मेडिकल अभ्यर्थियों ने अपनी जान गंवा दी थी।
डिप्के ने पत्र में यह भी बताया कि कई प्रभावित परिवार पहले से ही गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं, क्योंकि उन्होंने अपने बच्चों की परीक्षा की तैयारी के लिए शिक्षा ऋण लिया था, और अब उनके सामने उस कर्ज को चुकाने की चुनौती भी खड़ी हो गई है।
पत्र में संगठन ने इसे छात्रों के बीच बढ़ते मानसिक स्वास्थ्य संकट के रूप में वर्णित किया और सरकार पर बार-बार होने वाली परीक्षा संबंधी अनियमितताओं के लिए जवाबदेही सुनिश्चित करने में नाकाम रहने का आरोप लगाया।
मुआवज़े और इस्तीफे की मांग
अपने पत्र में अभिजीत डिप्के ने प्रधानमंत्री मोदी से अपील की कि आत्महत्या से जान गंवाने वाले छात्रों के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवज़ा दिया जाए। इसके साथ ही उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाने की मांग को भी दोहराया, जो संगठन की एक महीने से चली आ रही प्रमुख मांगों में से एक है।
डिप्के ने कहा, “हम छात्र सिर्फ इतना चाहते हैं कि इन मौतों के लिए कोई जवाबदेही तय हो। नेतृत्व को जवाबदेह बनाना लाखों छात्रों और अभिभावकों का हमारी शिक्षा व्यवस्था पर भरोसा बहाल करने की दिशा में एक अहम कदम है। अगर इन प्रणालीगत खामियों को दूर करने और इसके लिए जिम्मेदार नेतृत्व को बदलने के लिए तेज और निर्णायक कार्रवाई नहीं की जाती, तो यह एक तरह से यह संदेश देता है कि प्रशासन मौजूदा स्थिति को स्वीकार कर चुका है।”
बता दें कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने 15 मई 2026 को इस मामले में “कमांड चेन में चूक” की जिम्मेदारी स्वीकार की थी।
संगठन का दावा — व्यवस्थागत खामियां जिम्मेदार
CJP के पत्र के अनुसार, बार-बार हो रहे पेपर लीक, कथित प्रशासनिक कुप्रबंधन और दोबारा परीक्षाओं को लेकर बनी अनिश्चितता, ये सभी शिक्षा क्षेत्र में गहरी प्रणालीगत खामियों की ओर इशारा करते हैं। संगठन का कहना है कि वह देशभर में लगातार विरोध प्रदर्शन आयोजित कर रहा है, और नेतृत्व को जवाबदेह ठहराना छात्रों व अभिभावकों का भरोसा बहाल करने के लिए जरूरी कदम है।
CJP प्रवक्ता सौरव दास के अनुसार, संगठन को दिल्ली पुलिस से 20 जून को जंतर-मंतर पर एक प्रदर्शन की अनुमति मिल चुकी है, जिसमें देशभर से छात्र, अभिभावक, शिक्षक और आम नागरिक शांतिपूर्ण तरीके से जुटकर पेपर लीक, परीक्षाओं में अनियमितताओं और छात्रों की बढ़ती आत्महत्याओं के मामलों में जवाबदेही की मांग करेंगे।
आंदोलन की पृष्ठभूमि
Cockroach Janta Party एक छात्र-नेतृत्व वाला आंदोलन है, जिसकी शुरुआत सोशल मीडिया पर एक व्यंग्यात्मक अभियान के तौर पर हुई थी। शुरुआत में युवाओं ने “मैं भी कॉकरोच” के वायरल नारे के तहत इस कीड़े को अवहेलना के प्रतीक के रूप में अपनाया, जो बाद में देशभर के कई शहरों में वास्तविक प्रदर्शनों में तब्दील हो गया।
इससे पहले संगठन ने दिल्ली के जंतर-मंतर के अलावा पुणे, लखनऊ, अमृतसर, हैदराबाद और नागपुर जैसे शहरों में भी रैलियां आयोजित की थीं। हैदराबाद में हुए एक प्रदर्शन में जलवायु कार्यकर्ता और शिक्षा सुधार के पैरोकार सोनम वांगचुक ने भी मुख्य वक्ता के तौर पर शिरकत की थी। संगठन की मांगों में शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार, परीक्षाओं की सुरक्षा को और कड़ा करना, प्रभावित अभ्यर्थियों के लिए मुआवज़ा, और शीर्ष अधिकारियों की पूर्ण जवाबदेही शामिल है।
संगठन को फिल्म और सोशल मीडिया जगत से भी समर्थन मिलता दिख रहा है — अभिनेता प्रकाश राज ने भी धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर CJP के विरोध प्रदर्शन का समर्थन किया है।
विपक्ष की प्रतिक्रिया और पुराना विवाद
यह पहला मौका नहीं है जब परीक्षा संबंधी अनियमितताओं को लेकर शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग उठी हो। इससे पहले भी विपक्षी दलों ने संसद में इस मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाया था, जिसमें परीक्षा प्रणाली में बड़ी खामियों के आरोप लगाए गए थे। हालांकि सरकार की ओर से पहले भी यह रुख रहा है कि अनियमितताओं की जांच जारी है और जहां भी गड़बड़ी मिली है, उसके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।
आगे क्या
CJP के 20 जून को जंतर-मंतर पर होने वाले प्रस्तावित प्रदर्शन से ठीक पहले यह खुला पत्र सामने आया है। संगठन का कहना है कि वह अपने अभियान को और तेज करेगा और परीक्षा संबंधी अनियमितताओं तथा सरकार की कथित जवाबदेही की कमी के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करता रहेगा। वहीं 21 जून को होने वाली NEET की दोबारा परीक्षा को लेकर भी सबकी निगाहें टिकी हुई हैं, जिसके लिए नए बायोमेट्रिक सत्यापन नियम लागू किए गए हैं ताकि इस बार किसी तरह की गड़बड़ी की आशंका को कम किया जा सके।
निष्कर्ष
NEET पेपर लीक विवाद अब सिर्फ एक परीक्षा से जुड़े मुद्दे तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य, शिक्षा व्यवस्था की जवाबदेही, और प्रशासनिक जिम्मेदारी जैसे बड़े सवालों से जुड़ गया है। Cockroach Janta Party का यह खुला पत्र इस बात को रेखांकित करता है कि छात्र संगठन अब सिर्फ परीक्षा रद्द होने या दोबारा होने तक सीमित मांगों से आगे बढ़कर, इस पूरे घटनाक्रम में हुई जनहानि के लिए ठोस जवाबदेही और सहयोग की मांग कर रहे हैं। आने वाले दिनों में 20 जून के प्रदर्शन और 21 जून की दोबारा परीक्षा, दोनों ही इस पूरे विवाद की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

