अवैध वसूली के विरोध में ट्रांसपोर्ट यूनियन की बैठक, खनन अधिकारियों पर लगाए गंभीर आरोप

अवैध वसूली के विरोध में ट्रांसपोर्ट यूनियन की बैठक, खनन अधिकारियों पर लगाए गंभीर आरोप
बरेली। उत्तर प्रदेश ट्रांसपोर्ट यूनियन की महानगर इकाई की एक महत्वपूर्ण बैठक रविवार को नरकुलागंज स्थित यूनियन कार्यालय में महानगर अध्यक्ष रामकृष्ण शुक्ला की अध्यक्षता में आयोजित हुई। बैठक में शहर एवं आसपास के क्षेत्रों से आए ट्रांसपोर्टरों और यूनियन पदाधिकारियों ने खनन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए मंडलीय खनन अधिकारी और जिला खनन अधिकारी पर ट्रांसपोर्टरों के उत्पीड़न तथा कथित अवैध वसूली के आरोप लगाए। बैठक में इस मुद्दे को लेकर गहरा रोष व्यक्त किया गया और उच्च अधिकारियों से शिकायत करने का निर्णय लिया गया।
प्रति ट्रक ₹5,000 सुविधा शुल्क का आरोप
बैठक को संबोधित करते हुए महानगर अध्यक्ष रामकृष्ण शुक्ला ने कहा कि प्रदेश सरकार लगातार अवैध खनन पर अंकुश लगाने और पारदर्शी व्यवस्था लागू करने की बात कर रही है, लेकिन बरेली में ट्रांसपोर्टरों को कथित तौर पर परेशान किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तराखंड से आने वाले रेता-बजरी से लदे ट्रकों से वैध आईएसटीपी (ISTP) शुल्क की रसीद कटवाने के बजाय प्रति ट्रक लगभग ₹5,000 सुविधा शुल्क देने का दबाव बनाया जा रहा है। उनका कहना था कि यदि कोई ट्रांसपोर्टर इस कथित मांग का विरोध करता है तो उसके वाहनों की अनावश्यक जांच, रोक-टोक और उत्पीड़न किया जाता है।
मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपेगी यूनियन
रामकृष्ण शुक्ला ने कहा कि इस प्रकार की कथित अवैध वसूली से ईमानदारी से कारोबार करने वाले ट्रांसपोर्टरों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि परिवहन व्यवसाय पहले ही बढ़ती लागत और अन्य चुनौतियों से जूझ रहा है, ऐसे में यदि अधिकारियों द्वारा कथित रूप से अतिरिक्त धन की मांग की जाती है तो इसका सीधा असर व्यापार पर पड़ता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यूनियन इस पूरे मामले को लेकर जिलाधिकारी, मंडलायुक्त और मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपेगी तथा निष्पक्ष जांच की मांग करेगी।
वैध दस्तावेज होने पर भी उत्पीड़न का आरोप: महामंत्री
यूनियन के महामंत्री दीपक द्विवेदी ने कहा कि उत्तराखंड से आने वाले सभी रेता-बजरी के ट्रकों का संचालन वैध आईएसटीपी रसीद के आधार पर होना चाहिए। यदि किसी ट्रांसपोर्टर के पास वैध दस्तावेज मौजूद हैं, तब भी उसे परेशान करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि खनन विभाग द्वारा किसी प्रकार का उत्पीड़न या कथित अवैध वसूली की जाती है तो यूनियन इस संबंध में सभी साक्ष्यों के साथ शासन और प्रशासन के समक्ष शिकायत दर्ज कराएगी।
पारदर्शिता की मांग, आंदोलन की भी चेतावनी
कोषाध्यक्ष सरदार प्रभजीत सिंह ने भी ट्रांसपोर्टरों की समस्याओं को उठाते हुए कहा कि विभागीय कार्रवाई कानून के दायरे में और पूरी पारदर्शिता के साथ होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि वैध दस्तावेज रखने वाले वाहन चालकों और ट्रांसपोर्टरों को अनावश्यक रूप से परेशान नहीं किया जाना चाहिए। यदि ऐसा होता है तो यूनियन लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करने के लिए भी बाध्य होगी।
बैठक में उपस्थित अन्य पदाधिकारियों ने भी एक स्वर में कहा कि ट्रांसपोर्टरों का उत्पीड़न किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने मांग की कि यदि लगाए गए आरोपों में सच्चाई है तो पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाए। साथ ही ट्रांसपोर्टरों के लिए ऐसी व्यवस्था बनाई जाए जिससे उन्हें बिना किसी अनावश्यक बाधा के वैध तरीके से अपना कारोबार संचालित करने का अवसर मिल सके।
बैठक में प्रदीप सक्सेना, सोनू मौर्य, हेमंत, सुमित रघुवंशी, अनिल राजपूत, रामाशंकर सहित बड़ी संख्या में यूनियन पदाधिकारी और ट्रांसपोर्टर मौजूद रहे।
नोट: इस समाचार में खनन विभाग के अधिकारियों पर लगाए गए आरोप ट्रांसपोर्ट यूनियन के पदाधिकारियों द्वारा लगाए गए हैं। समाचार प्रकाशित किए जाने तक संबंधित खनन अधिकारियों की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
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