मिडिल ईस्ट तनाव के बीच सोना-चांदी में बड़ी गिरावट, निवेशकों में बढ़ी सतर्कता
नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और निवेशकों की बदलती रणनीति के बीच सोने और चांदी की कीमतों में सोमवार को बड़ी गिरावट दर्ज की गई। मिडिल ईस्ट में लगातार बढ़ रहे तनाव का असर वैश्विक वित्तीय बाजारों के साथ-साथ भारतीय सर्राफा बाजार पर भी देखने को मिला है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के ताजा आंकड़ों के अनुसार 24 कैरेट सोने और चांदी दोनों की कीमतों में उल्लेखनीय कमी आई है।

आईबीजेए के मुताबिक 10 ग्राम 24 कैरेट सोने की कीमत में 3,470 रुपये की गिरावट दर्ज की गई है। इसके बाद सोने का भाव घटकर लगभग 1.51 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया है। पिछले कुछ समय से लगातार रिकॉर्ड ऊंचाई पर कारोबार कर रहे सोने के दाम में आई यह गिरावट निवेशकों और बाजार विशेषज्ञों के लिए चर्चा का विषय बनी हुई है।
वहीं चांदी की कीमतों में भी बड़ी गिरावट देखने को मिली है। एक किलो चांदी का भाव 15,748 रुपये कम होकर 2.41 लाख रुपये प्रति किलो रह गया है। गौरतलब है कि 31 मई को चांदी की कीमत 2,63,350 रुपये प्रति किलो के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थी। ऐसे में कुछ ही दिनों में चांदी की कीमत में आई यह बड़ी गिरावट बाजार में बढ़ती अनिश्चितता को दर्शाती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और संभावित सैन्य संघर्ष की आशंकाओं ने वैश्विक निवेशकों को सतर्क कर दिया है। सामान्य परिस्थितियों में भू-राजनीतिक संकट के दौरान निवेशक सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख करते हैं, लेकिन मौजूदा समय में स्थिति कुछ अलग नजर आ रही है। बाजार विश्लेषकों के अनुसार निवेशक फिलहाल अपनी पूंजी को बाजार से निकालकर नकदी के रूप में सुरक्षित रखने को प्राथमिकता दे रहे हैं।
आर्थिक जानकारों का कहना है कि जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनिश्चितता बढ़ती है तो निवेशक जोखिम भरे निवेश से दूरी बनाने लगते हैं। मौजूदा समय में शेयर बाजार, कमोडिटी बाजार और अन्य निवेश विकल्पों में उतार-चढ़ाव के कारण बड़ी संख्या में निवेशक अपनी होल्डिंग बेचकर नकदी जमा कर रहे हैं। इसका सीधा असर सोना और चांदी जैसी कीमती धातुओं की मांग पर पड़ रहा है।
विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि हाल के महीनों में सोने और चांदी की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई थी। कई निवेशकों ने ऊंचे स्तर पर मुनाफावसूली भी शुरू कर दी है। ऐसे में बाजार में बिकवाली का दबाव बढ़ने से कीमतों में गिरावट देखने को मिल रही है। इसके अलावा वैश्विक केंद्रीय बैंकों की नीतियां, डॉलर की मजबूती और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक संकेतक भी कीमती धातुओं की कीमतों को प्रभावित कर रहे हैं।
सर्राफा कारोबारियों के अनुसार फिलहाल बाजार में ग्राहकों की गतिविधि सामान्य बनी हुई है, लेकिन कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण खरीदार और निवेशक दोनों ही सतर्क रुख अपना रहे हैं। कई लोग कीमतों के और नीचे आने का इंतजार कर रहे हैं, जबकि कुछ निवेशक इसे खरीदारी का अवसर भी मान रहे हैं।
विश्लेषकों का कहना है कि आने वाले दिनों में मिडिल ईस्ट की स्थिति, वैश्विक आर्थिक घटनाक्रम और निवेशकों की रणनीति के आधार पर सोने और चांदी की कीमतों में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। यदि अंतरराष्ट्रीय तनाव और बढ़ता है तो बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है। वहीं स्थिति सामान्य होने पर कीमती धातुओं में फिर से तेजी लौटने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
फिलहाल सोना और चांदी दोनों ही अपने हालिया उच्च स्तरों से नीचे कारोबार कर रहे हैं और निवेशक वैश्विक घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। बाजार विशेषज्ञों की सलाह है कि निवेशक किसी भी निर्णय से पहले बाजार की स्थिति और जोखिमों का सावधानीपूर्वक आकलन करें।

