मिडिल ईस्ट तनाव से शेयर बाजार में भारी दबाव, सेंसेक्स 500 अंक टूटा, निफ्टी भी फिसला
मुंबई। मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर सोमवार को भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखाई दिया। सप्ताह के पहले कारोबारी दिन घरेलू बाजार भारी दबाव में नजर आया और प्रमुख सूचकांकों सेंसेक्स तथा निफ्टी में गिरावट दर्ज की गई। निवेशकों की बिकवाली के चलते सेंसेक्स करीब 500 अंक यानी 0.70 प्रतिशत टूटकर 73,800 के स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया। वहीं निफ्टी भी लगभग 150 अंकों की गिरावट के साथ 23,200 के स्तर पर पहुंच गया।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। इसी वजह से बाजार में जोखिम लेने की प्रवृत्ति कमजोर हुई है और निवेशकों ने मुनाफावसूली के साथ-साथ सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख करना शुरू कर दिया है। इसका सीधा असर शेयर बाजार के कारोबार पर देखने को मिल रहा है।

सोमवार के कारोबार में सबसे अधिक दबाव आईटी, मेटल और रियल्टी सेक्टर के शेयरों पर देखा गया। इन क्षेत्रों की अधिकांश प्रमुख कंपनियों के शेयर लाल निशान में कारोबार करते नजर आए। आईटी कंपनियों में विदेशी निवेशकों की बिकवाली बढ़ने से गिरावट दर्ज की गई, जबकि मेटल शेयरों पर वैश्विक मांग और कमोडिटी कीमतों से जुड़ी चिंताओं का असर दिखाई दिया। रियल्टी सेक्टर में भी निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया, जिससे इस क्षेत्र के शेयरों में कमजोरी बनी रही।
विश्लेषकों के अनुसार बाजार में गिरावट का मुख्य कारण ईरान और इजराइल के बीच बढ़ता सैन्य तनाव है। अप्रैल में हुए संघर्ष विराम यानी सीजफायर के बाद पहली बार ईरान ने इजराइल पर मिसाइल हमला किया है। इस हमले के बाद पूरे क्षेत्र में तनाव की स्थिति फिर से बढ़ गई है। इसके जवाब में इजराइल ने सोमवार तड़के पश्चिमी और मध्य ईरान के कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हुए जवाबी कार्रवाई की।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार ईरान की राजधानी तेहरान सहित तबरीज और इस्फहान जैसे महत्वपूर्ण शहरों में धमाकों की खबरें सामने आई हैं। इन घटनाओं के बाद अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के बीच अनिश्चितता बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह तनाव और बढ़ता है तो वैश्विक आर्थिक गतिविधियों, ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी असर पड़ सकता है।
भू-राजनीतिक संकट के दौरान आमतौर पर निवेशक जोखिम वाले निवेश से दूरी बनाने लगते हैं। इसी वजह से वैश्विक बाजारों में भी दबाव देखने को मिल रहा है। भारतीय बाजार पर इसका असर विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की गतिविधियों के माध्यम से दिखाई दे रहा है। निवेशकों द्वारा शेयरों में बिकवाली किए जाने से बाजार में कमजोरी बनी हुई है।
विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि कच्चे तेल की कीमतों पर भी इस तनाव का असर पड़ सकता है। मिडिल ईस्ट दुनिया के प्रमुख तेल उत्पादक क्षेत्रों में शामिल है। यदि क्षेत्र में संघर्ष बढ़ता है तो तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं। भारत जैसे तेल आयातक देश के लिए यह स्थिति महंगाई और आर्थिक दबाव बढ़ाने वाली हो सकती है।
हालांकि कुछ बाजार विश्लेषकों का मानना है कि वर्तमान गिरावट अल्पकालिक हो सकती है। यदि आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच तनाव कम होता है और कूटनीतिक प्रयास सफल रहते हैं तो बाजार में फिर से स्थिरता लौट सकती है। लेकिन फिलहाल निवेशकों की नजर पूरी तरह मिडिल ईस्ट के घटनाक्रमों पर टिकी हुई है।
बाजार विशेषज्ञों ने निवेशकों को सलाह दी है कि वे घबराहट में निर्णय लेने से बचें और दीर्घकालिक निवेश रणनीति पर कायम रहें। फिलहाल वैश्विक तनाव और अंतरराष्ट्रीय संकेतकों के कारण बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना बनी हुई है। ऐसे में निवेशकों को सतर्क रहकर बाजार की दिशा पर नजर बनाए रखने की जरूरत है।

