फास्टैग रिचार्ज के दौरान किसान के खाते से उड़े 5 लाख रुपये, जयपुर में साइबर ठगी का मामला दर्ज
जयपुर। राजधानी जयपुर में साइबर अपराधियों ने एक किसान को निशाना बनाते हुए उसके बैंक खाते से 5 लाख रुपये से अधिक की रकम पार कर दी। मामला करणी विहार थाना क्षेत्र का है, जहां फास्टैग रिचार्ज के दौरान ऑनलाइन प्रक्रिया के बीच साइबर ठगों ने बैंक खाते में सेंध लगाकर लाखों रुपये निकाल लिए। पीड़ित किसान को मोबाइल पर ट्रांजैक्शन संबंधी मैसेज मिलने के बाद धोखाधड़ी का पता चला, जिसके बाद उसने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई।
करणी विहार थाना पुलिस के अनुसार मीनावाला निवासी 52 वर्षीय किसान ने इस संबंध में एफआईआर दर्ज करवाई है। किसान खेती-बाड़ी का कार्य करता है और अपने परिवार के साथ क्षेत्र में रहता है। शिकायत में बताया गया है कि 5 जून को उसका बेटा एक ऑनलाइन पेमेंट एप के माध्यम से वाहन का फास्टैग रिचार्ज कर रहा था। रिचार्ज प्रक्रिया के दौरान लगातार कई विकल्प और पेज खुलते गए, जिनमें पूछी गई जानकारी भरने का प्रयास किया गया।

पीड़ित के अनुसार ऑनलाइन प्रक्रिया के दौरान कई बार अलग-अलग ऑप्शन सामने आने लगे। कुछ सवालों और विकल्पों को भरने के बाद प्रक्रिया काफी जटिल लगने लगी। इस कारण बीच में ही रिचार्ज प्रक्रिया को बंद कर दिया गया और आगे कोई कार्रवाई नहीं की गई। परिवार को लगा कि रिचार्ज पूरा नहीं हुआ है और मामला वहीं समाप्त हो गया।
हालांकि कुछ समय बाद साइबर अपराधियों ने इसी प्रक्रिया का फायदा उठाकर बैंक खाते तक पहुंच बना ली। आरोप है कि ठगों ने किसी तकनीकी माध्यम से ऑनलाइन सिस्टम में सेंध लगाई और खाते से कुल 5 लाख 7 हजार रुपये निकाल लिए। यह पूरी रकम अलग-अलग ट्रांजैक्शन के जरिए खाते से निकाली गई।
घटना का खुलासा तब हुआ जब पीड़ित के मोबाइल फोन पर बैंक से पैसे कटने के लगातार मैसेज आने लगे। शुरुआत में परिवार को कुछ समझ नहीं आया, लेकिन खाते की जानकारी जांचने पर लाखों रुपये निकलने का पता चला। इसके बाद पीड़ित ने तुरंत बैंक से संपर्क किया और फिर करणी विहार थाने पहुंचकर साइबर फ्रॉड की शिकायत दर्ज करवाई।
मामले की जांच कर रहे एसआई बृजेश यादव ने बताया कि पुलिस ने साइबर धोखाधड़ी की धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है। घटना से जुड़े तकनीकी साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं और बैंक खाते से रकम किस खाते में ट्रांसफर हुई, इसकी जानकारी निकाली जा रही है। साथ ही साइबर सेल की मदद से ट्रांजैक्शन की पूरी चेन की जांच की जा रही है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि हाल के वर्षों में फास्टैग, केवाईसी अपडेट, बैंकिंग सेवाओं और ऑनलाइन भुगतान के नाम पर साइबर ठगी के मामलों में तेजी आई है। साइबर अपराधी फर्जी लिंक, नकली वेबसाइट और संदिग्ध एप्लीकेशन के जरिए लोगों की निजी एवं बैंकिंग जानकारी हासिल कर लेते हैं। इसके बाद खातों से रकम निकाल ली जाती है।
विशेषज्ञों ने लोगों को ऑनलाइन भुगतान करते समय सतर्क रहने की सलाह दी है। किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करने, ओटीपी साझा करने या संदिग्ध वेबसाइट पर बैंकिंग जानकारी दर्ज करने से बचने की अपील की गई है। इसके अलावा किसी भी तरह की संदिग्ध गतिविधि दिखाई देने पर तुरंत बैंक और साइबर हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करने की सलाह दी गई है।
फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है और साइबर अपराधियों तक पहुंचने के प्रयास किए जा रहे हैं। वहीं इस घटना ने एक बार फिर ऑनलाइन लेन-देन के दौरान सावधानी बरतने की जरूरत को उजागर कर दिया है। साइबर ठग लगातार नए-नए तरीके अपनाकर लोगों को निशाना बना रहे हैं, ऐसे में जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव माना जा रहा है।

