नक्सलवाद पर पीएम मोदी का कांग्रेस पर हमला, बोले- जो आज संविधान दिखा रहे हैं, तब उनके हाथ कांप रहे थे
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में दशकों से चली आ रही नक्सलवाद की समस्या को लेकर कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने बिना किसी का नाम लिए कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि जो लोग आज संविधान की प्रति हाथ में लेकर घूम रहे हैं, उनके हाथ उस समय कांप रहे थे जब देश नक्सली हिंसा के सबसे कठिन दौर से गुजर रहा था। प्रधानमंत्री ने दावा किया कि उनकी सरकार के प्रयासों के कारण आज माओवादी-नक्सलवाद अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है और देश के कई नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास की नई धारा बह रही है।
सोमवार को रिपब्लिक भारत न्यूज चैनल के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि कई दशकों तक देश के विभिन्न हिस्से नक्सली हिंसा से प्रभावित रहे। इस दौरान अनेक सरकारें आईं और चली गईं, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकाला जा सका। उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा लगने लगा था कि नक्सलवाद का यह दुर्भाग्य हमेशा के लिए देश के साथ जुड़ा रहेगा, लेकिन उनकी सरकार ने ‘राष्ट्र प्रथम’ के संकल्प के साथ इस चुनौती का सामना करने का निर्णय लिया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछली कांग्रेस सरकारों ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों को केवल पिछड़े इलाके मानकर छोड़ दिया था। उन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसर सीमित थे। इससे वहां के युवाओं में निराशा बढ़ती गई और नक्सली संगठन इस स्थिति का फायदा उठाते रहे। उन्होंने कहा कि एनडीए सरकार ने इन क्षेत्रों को बदलने का संकल्प लिया और वहां बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के साथ विकास कार्यों को प्राथमिकता दी।
पीएम मोदी ने कहा कि सरकार ने नक्सल प्रभावित इलाकों में सड़क, बिजली, मोबाइल कनेक्टिविटी, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने का काम किया। इसके साथ ही सुरक्षा बलों को आधुनिक संसाधन उपलब्ध कराए गए और समन्वित रणनीति के तहत नक्सलवाद के खिलाफ अभियान चलाया गया। उन्होंने कहा कि विकास और सुरक्षा के इस दोहरे मॉडल ने सकारात्मक परिणाम दिए हैं और आज कई जिले नक्सल प्रभाव से मुक्त हो चुके हैं।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि नक्सलवाद जैसी समस्या से निपटने के लिए केवल राजनीतिक बयानबाजी नहीं, बल्कि पूर्ण समर्पण और दृढ़ इच्छाशक्ति की आवश्यकता होती है। उन्होंने दावा किया कि सरकार की नीतियों के कारण हजारों युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ा गया है और प्रभावित क्षेत्रों में लोगों के जीवन स्तर में सुधार आया है। उन्होंने कहा कि आज वहां के लोगों के भीतर नई उम्मीद और विश्वास पैदा हुआ है।
प्रधानमंत्री की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी कई सार्वजनिक कार्यक्रमों और राजनीतिक अभियानों में संविधान की प्रति हाथ में लेकर नजर आए हैं। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद सांसद के रूप में शपथ ग्रहण के दौरान भी राहुल गांधी संविधान की प्रति लेकर संसद पहुंचे थे। कांग्रेस लगातार संविधान और लोकतांत्रिक संस्थाओं की सुरक्षा को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाती रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी का यह बयान केवल नक्सलवाद के मुद्दे तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके जरिए उन्होंने कांग्रेस और राहुल गांधी की राजनीतिक रणनीति पर भी निशाना साधने की कोशिश की है। आने वाले समय में इस मुद्दे पर सियासी बयानबाजी और तेज होने की संभावना है, क्योंकि दोनों प्रमुख दल राष्ट्रीय सुरक्षा, विकास और संविधान जैसे विषयों को लेकर आमने-सामने हैं।

