ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर अमेरिका-ईरान के दावे अलग, ट्रम्प बोले- जांच को तैयार हुआ तेहरान
ईरान के अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया है कि ईरान अपने परमाणु ठिकानों की अंतरराष्ट्रीय जांच के लिए तैयार हो गया है। ट्रम्प के अनुसार, यह कदम वैश्विक स्तर पर भरोसा बहाल करने में महत्वपूर्ण साबित होगा और इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम केवल शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है, न कि परमाणु हथियार विकसित करने के लिए। ट्रम्प ने कहा कि यदि यह प्रक्रिया आगे बढ़ती है तो संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी एजेंसी इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी (IAEA) के निरीक्षकों की ईरान में दोबारा तैनाती संभव हो सकती है।
अमेरिकी राष्ट्रपति का यह बयान ऐसे समय में आया है जब स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु मुद्दे को लेकर लंबी बातचीत हुई है। दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच लगभग 18 घंटे तक चली चर्चा में परमाणु कार्यक्रम, आर्थिक प्रतिबंधों और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया। हालांकि बातचीत के बाद अमेरिका ने सकारात्मक संकेत दिए हैं, लेकिन ईरान ने ट्रम्प के दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है।

ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी IRNA के अनुसार, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने स्पष्ट किया कि ईरान ने अंतरराष्ट्रीय परमाणु एजेंसी के साथ किसी नए समझौते या अतिरिक्त प्रतिबद्धता को स्वीकार नहीं किया है। उन्होंने कहा कि IAEA के साथ सहयोग पहले से निर्धारित नियमों और अंतरराष्ट्रीय दायित्वों के तहत जारी रहेगा। बघाई ने कहा कि स्विट्जरलैंड में हुई वार्ता के दौरान परमाणु निरीक्षण को लेकर कोई नई सहमति नहीं बनी और अमेरिका द्वारा किए जा रहे दावे वास्तविक स्थिति को नहीं दर्शाते।
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बयानों में अंतर दोनों देशों की रणनीतिक और राजनीतिक प्राथमिकताओं को दर्शाता है। अमेरिका लंबे समय से चाहता रहा है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह पारदर्शी बनाए और अंतरराष्ट्रीय निरीक्षकों को सभी महत्वपूर्ण स्थलों तक पहुंच प्रदान करे। वहीं ईरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम ऊर्जा, चिकित्सा और वैज्ञानिक अनुसंधान जैसे शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है तथा वह परमाणु हथियार विकसित करने की दिशा में काम नहीं कर रहा है।
हालिया वार्ता के बाद अमेरिका ने ईरानी तेल निर्यात पर लागू कुछ प्रतिबंधों में 60 दिनों की अस्थायी ढील देने का फैसला किया है। माना जा रहा है कि यह कदम बातचीत को आगे बढ़ाने और दोनों पक्षों के बीच विश्वास बहाली के प्रयासों का हिस्सा है। प्रतिबंधों में राहत मिलने से ईरान को सीमित आर्थिक लाभ मिल सकता है, जबकि अमेरिका उम्मीद कर रहा है कि इससे आगे की वार्ताओं के लिए सकारात्मक माहौल बनेगा।
हालांकि सबसे जटिल और विवादास्पद मुद्दे अभी भी अनसुलझे हैं। इनमें ईरान के यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम, उच्च स्तर के यूरेनियम भंडार और भविष्य में परमाणु गतिविधियों की निगरानी से जुड़े प्रश्न शामिल हैं। पश्चिमी देशों को आशंका है कि अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम का उपयोग भविष्य में परमाणु हथियार बनाने के लिए किया जा सकता है, जबकि ईरान इन आरोपों को लगातार खारिज करता रहा है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस मामले पर करीबी नजर रखी जा रही है क्योंकि ईरान का परमाणु कार्यक्रम लंबे समय से वैश्विक कूटनीति और मध्य-पूर्व की सुरक्षा का प्रमुख मुद्दा रहा है। यदि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत सफल होती है तो क्षेत्रीय तनाव कम हो सकता है और वैश्विक ऊर्जा बाजारों को भी स्थिरता मिल सकती है। फिलहाल दोनों देशों के बयानों में स्पष्ट विरोधाभास दिखाई दे रहा है, जिससे यह संकेत मिलता है कि परमाणु समझौते की दिशा में अभी कई कठिन दौर की बातचीत बाकी है।

