जब विलेन के किरदार से लोगों ने करनी शुरू कर दी नफरत, मां की आंखों में आ गए थे आंसू; राज बब्बर के अनसुने किस्से
हिंदी सिनेमा के विलेन दिग्गज अभिनेता और राजनेता राज बब्बर आज अपना 74वां जन्मदिन मना रहे हैं। चार दशक से अधिक लंबे करियर में उन्होंने कई यादगार किरदार निभाए हैं, लेकिन उनकी पहचान बनाने वाले शुरुआती किरदारों में एक ऐसा रोल भी शामिल है, जिसने उन्हें रातों-रात चर्चा में ला दिया था। यह किरदार इतना प्रभावशाली था कि लोग पर्दे और वास्तविक जीवन के बीच का फर्क तक भूल गए थे।
यह किस्सा वर्ष 1980 में रिलीज हुई फिल्म ‘इंसाफ का तराजू’ से जुड़ा है। फिल्म के निर्माता-निर्देशक बी.आर. चोपड़ा थे, जो बाद में टेलीविजन के ऐतिहासिक धारावाहिक महाभारत के लिए भी जाने गए। उस समय चोपड़ा अपनी फिल्म के लिए एक ऐसे अभिनेता की तलाश में थे, जो कहानी के मुख्य खलनायक रमेश गुप्ता का किरदार निभा सके। यह भूमिका बेहद चुनौतीपूर्ण थी क्योंकि फिल्म में इस किरदार को अभिनेत्री जीनत अमान और पद्मिनी कोल्हापुरे के पात्रों के साथ दुष्कर्म करते हुए दिखाया गया था।

उस दौर के कई बड़े सितारों ने इस भूमिका को निभाने से साफ इनकार कर दिया। उन्हें डर था कि नकारात्मक किरदार निभाने से उनकी छवि पर बुरा असर पड़ेगा और दर्शक उन्हें वास्तविक जीवन में भी उसी नजर से देखने लगेंगे। ऐसे समय में एक नए अभिनेता ने इस चुनौतीपूर्ण भूमिका को स्वीकार किया। वह अभिनेता थे राज बब्बर।
फिल्म रिलीज होने के बाद बॉक्स ऑफिस पर बड़ी सफलता साबित हुई। हालांकि फिल्म की सफलता के साथ राज बब्बर को एक अलग तरह की प्रतिक्रिया का भी सामना करना पड़ा। उन्होंने खलनायक के किरदार को इतनी सच्चाई और प्रभावशाली तरीके से निभाया कि दर्शकों के मन में उनके प्रति गुस्सा पैदा हो गया।
फिल्म के प्रीमियर शो के दौरान एक दिलचस्प और भावुक घटना घटी। राज बब्बर अपनी मां के साथ फिल्म देखने पहुंचे थे। फिल्म खत्म होने के बाद कई दर्शक उनके पास आए, लेकिन उनकी तारीफ करने के बजाय उन्हें बुरा-भला कहने लगे। कुछ लोग नाराजगी जताते हुए उन्हें गालियां तक देने लगे। दर्शकों के मन में फिल्म के खलनायक के प्रति इतनी नफरत थी कि वे अभिनेता और किरदार के बीच का अंतर भूल बैठे थे।
यह दृश्य देखकर राज बब्बर की मां बेहद भावुक हो गईं। उन्होंने बेटे से कहा, “बेटा, हम कम खा लेंगे, लेकिन ऐसे काम मत किया करो।” मां को लगा कि उनका बेटा वास्तव में गलत काम करने वाले व्यक्ति की भूमिका निभा रहा है और लोग उससे नफरत करने लगे हैं। बाद में राज बब्बर ने कई इंटरव्यू में इस घटना का जिक्र करते हुए बताया कि यह उनके अभिनय की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक थी।
राज बब्बर का जन्म 23 जून 1952 को उत्तर प्रदेश के आगरा में हुआ था। उन्होंने राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (NSD) से अभिनय की शिक्षा प्राप्त की और रंगमंच से अपने करियर की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने बॉलीवुड में कदम रखा और धीरे-धीरे अपनी अलग पहचान बनाई।
अपने फिल्मी सफर में राज बब्बर ने ‘निकाह’, ‘प्रेम गीत’, ‘आज की आवाज’, ‘वारिस’, ‘अगर तुम न होते’ और कई अन्य सफल फिल्मों में काम किया। उन्होंने नायक, खलनायक और चरित्र अभिनेता के रूप में हर तरह के किरदार निभाए। बाद में उन्होंने राजनीति में भी सक्रिय भूमिका निभाई और संसद तक पहुंचे।
आज 74 वर्ष की उम्र में भी राज बब्बर भारतीय सिनेमा के उन कलाकारों में गिने जाते हैं, जिन्होंने अपने दमदार अभिनय से दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई। ‘इंसाफ का तराजू’ का वह किरदार आज भी उनके करियर के सबसे चर्चित और यादगार किरदारों में शामिल है, जिसने साबित कर दिया कि एक सच्चा अभिनेता वही होता है, जो अपने अभिनय से दर्शकों को भावनात्मक रूप से जोड़ सके।

