ईरान के सर्वोच्च नेता के अंतिम संस्कार में भारत के नेताओं को न्योता, भाजपा-कांग्रेस समेत कई प्रमुख हस्तियां होंगी शामिल
ईरान ने अपने दिवंगत सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए भारत के कई प्रमुख राजनीतिक और सामाजिक नेताओं को औपचारिक निमंत्रण भेजा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस निमंत्रण में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के साथ-साथ अन्य प्रमुख हस्तियों के नाम भी शामिल हैं। इस कदम को भारत और ईरान के बीच लंबे समय से चले आ रहे कूटनीतिक और सांस्कृतिक संबंधों का महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, भाजपा की ओर से राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन को आमंत्रित किया गया है। वहीं कांग्रेस की ओर से पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा और पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद को अंतिम संस्कार समारोह में शामिल होने का न्योता मिला है। इसके अलावा जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती को भी विशेष रूप से आमंत्रित किया गया है।

राजनीतिक नेताओं के अलावा आध्यात्मिक जगत की प्रमुख हस्ती जैन संत और अहिंसा विश्व भारती के संस्थापक आचार्य लोकेश मुनि को भी ईरान सरकार ने अंतिम संस्कार कार्यक्रम में शामिल होने का निमंत्रण भेजा है। इसे धार्मिक और सांस्कृतिक संवाद को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, ईरान ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी अंतिम संस्कार समारोह में शामिल होने का निमंत्रण भेजा था। हालांकि भारत सरकार ने पहले ही यह स्पष्ट कर दिया है कि इस अवसर पर भारत की ओर से एक आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल ईरान जाएगा। सरकार की ओर से यह निर्णय राजनयिक स्तर पर लिया गया है ताकि भारत की ओर से सम्मान भी व्यक्त किया जा सके और दोनों देशों के संबंधों को मजबूती भी मिले।
भारत सरकार द्वारा भेजे जा रहे प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व विदेश राज्य मंत्री पबित्र मार्गेरिटा करेंगे। उनके साथ बिहार के राज्यपाल और भारतीय सेना के सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन भी मौजूद रहेंगे। दोनों नेता अंतिम संस्कार समारोह में भारत सरकार का आधिकारिक प्रतिनिधित्व करेंगे और ईरान के नेतृत्व के प्रति संवेदना प्रकट करेंगे।
ईरानी अधिकारियों का अनुमान है कि अंतिम यात्रा में करीब 1.5 करोड़ से 2 करोड़ लोगों के शामिल होने की संभावना है। यदि ऐसा होता है तो यह ईरान के इतिहास का सबसे बड़ा राजकीय अंतिम संस्कार माना जाएगा। देशभर से लाखों लोग राजधानी और अन्य प्रमुख शहरों की ओर रवाना हो रहे हैं। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी व्यापक इंतजाम किए गए हैं और बड़ी संख्या में सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इतने बड़े स्तर पर आयोजित होने वाला यह अंतिम संस्कार केवल एक धार्मिक या राष्ट्रीय कार्यक्रम नहीं होगा, बल्कि इसका अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक महत्व भी होगा। दुनिया के कई देशों के प्रतिनिधियों और नेताओं के शामिल होने की संभावना है, जिससे यह आयोजन वैश्विक स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है।
भारत और ईरान के संबंध ऐतिहासिक रूप से मजबूत रहे हैं। दोनों देशों के बीच ऊर्जा, व्यापार, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और सामरिक सहयोग के कई महत्वपूर्ण आयाम हैं। ऐसे में भारत की ओर से आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल का अंतिम संस्कार में शामिल होना दोनों देशों के पारंपरिक संबंधों और आपसी सम्मान का प्रतीक माना जा रहा है।
हालांकि भाजपा, कांग्रेस और अन्य नेताओं की यात्रा को लेकर अंतिम कार्यक्रम और आधिकारिक पुष्टि संबंधित दलों या नेताओं की ओर से की जानी बाकी है। वहीं भारत सरकार के प्रतिनिधिमंडल की यात्रा को लेकर आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
दुनिया की नजर अब इस ऐतिहासिक अंतिम संस्कार पर टिकी हुई है। यदि अनुमान के अनुसार करोड़ों लोग इसमें शामिल होते हैं, तो यह ईरान के इतिहास का सबसे विशाल सार्वजनिक और राजकीय श्रद्धांजलि समारोह बन सकता है, जिसमें भारत सहित कई देशों की महत्वपूर्ण भागीदारी देखने को मिलेगी।

