सीकर में राष्ट्रीय इतिहास सम्मेलन, 11 यूनिवर्सिटी के विद्वान करेंगे शेखावाटी की विरासत पर मंथन
राजस्थान के सीकर जिले में इस वर्ष अगस्त महीने में एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय इतिहास सम्मेलन आयोजित होने जा रहा है, जिसमें देश की 11 प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों के वरिष्ठ प्रोफेसर, इतिहासकार, शोधकर्ता और विशेषज्ञ भाग लेंगे। तीन दिवसीय इस नेशनल कॉन्फ्रेंस का मुख्य उद्देश्य शेखावाटी क्षेत्र की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और पुरातात्विक विरासत पर गहन शोध और विचार-विमर्श करना है। सम्मेलन के दौरान विशेष रूप से शेखावाटी की विश्वप्रसिद्ध हवेलियों के भित्ति चित्रों, प्राचीन मूर्तिकला, शिलालेखों और ऐतिहासिक धरोहरों पर व्यापक चर्चा होगी।
यह सम्मेलन सीकर स्थित त्रिलोक सिंह रिसर्च एंड डेवलपमेंट संस्थान के तत्वावधान में आयोजित किया जाएगा। संस्थान का उद्देश्य शेखावाटी की समृद्ध ऐतिहासिक विरासत को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना तथा इस क्षेत्र में नए शोध को प्रोत्साहित करना है। आयोजन में देशभर के इतिहासकार शेखावाटी के उन ऐतिहासिक पहलुओं पर मंथन करेंगे, जिन पर अब तक सीमित शोध हुआ है।

संस्थान के सचिव केडी नेहरा ने बताया कि यह सम्मेलन लगातार तीन दिनों तक चलेगा और इसमें कई अकादमिक सत्र आयोजित किए जाएंगे। इन सत्रों में देश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों के प्रोफेसर, शोधकर्ता और विशेषज्ञ अपने शोध पत्र प्रस्तुत करेंगे। साथ ही भारतीय इतिहास के विभिन्न विषयों पर विस्तृत चर्चा भी होगी।
सम्मेलन के पहले दिन का पूरा कार्यक्रम भारतीय इतिहास के व्यापक परिप्रेक्ष्य पर केंद्रित रहेगा। इस दौरान इतिहास लेखन की नई प्रवृत्तियों, शोध की दिशा, भारतीय इतिहास की चुनौतियों और राष्ट्रीय दृष्टिकोण से जुड़े विषयों पर विशेषज्ञ अपने विचार रखेंगे। विभिन्न विश्वविद्यालयों के विद्वान भारतीय इतिहास के नए शोध और बदलते अकादमिक दृष्टिकोण पर भी चर्चा करेंगे।
सम्मेलन का दूसरा दिन पूरी तरह शेखावाटी क्षेत्र के ऐतिहासिक स्थलों के अध्ययन के लिए समर्पित रहेगा। सभी इतिहासकार, प्रोफेसर और शोधार्थी ऑन-फील्ड भ्रमण करेंगे। इस दौरान वे शेखावाटी की प्रसिद्ध हवेलियों में बने दुर्लभ भित्ति चित्रों (फ्रेस्को पेंटिंग्स), प्राचीन मंदिरों, ऐतिहासिक शिलालेखों, मूर्तिकला और महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों का विस्तृत अध्ययन करेंगे। विशेषज्ञ इन धरोहरों का सर्वेक्षण कर उनके ऐतिहासिक महत्व और संरक्षण की संभावनाओं का भी मूल्यांकन करेंगे।
सम्मेलन के अंतिम दिन विशेष रूप से शेखावाटी के इतिहास पर केंद्रित सत्र आयोजित किए जाएंगे। इस दौरान क्षेत्र से जुड़े नए ऐतिहासिक साक्ष्यों, पुरातात्विक खोजों और भविष्य में संभावित शोध विषयों पर विस्तार से चर्चा होगी। विद्वान यह भी बताएंगे कि शेखावाटी की ऐतिहासिक धरोहर को वैश्विक स्तर पर कैसे अधिक पहचान दिलाई जा सकती है और इसके संरक्षण के लिए किन कदमों की आवश्यकता है।
संस्थान के सचिव केडी नेहरा ने जानकारी दी कि सम्मेलन की मुख्य थीम और विस्तृत कार्यक्रम की आधिकारिक घोषणा 8 जुलाई को की जाएगी। इसी दिन एक प्रारंभिक कार्यक्रम भी आयोजित होगा, जिसकी अध्यक्षता अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) के इतिहास विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रोफेसर बीएल भादानी करेंगे। इस अवसर पर सम्मेलन की रूपरेखा, विषय और विभिन्न सत्रों की जानकारी मीडिया और प्रतिभागियों के साथ साझा की जाएगी।
बुधवार को आयोजित प्रेस वार्ता में शिक्षाविद् शिवनाथ सिंह भड़िया, संस्थान के चेयरमैन गणेश बेरवाल और अधिवक्ता सूरजभान सिंह भी मौजूद रहे। सभी वक्ताओं ने इस सम्मेलन को शेखावाटी के इतिहास और संस्कृति के लिए एक महत्वपूर्ण पहल बताया। उनका कहना था कि इस आयोजन से क्षेत्र की ऐतिहासिक धरोहरों पर नए शोध को बढ़ावा मिलेगा और देशभर के शोधार्थियों को शेखावाटी के समृद्ध इतिहास को समझने का बेहतर अवसर मिलेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि शेखावाटी केवल अपनी भव्य हवेलियों और फ्रेस्को पेंटिंग्स के लिए ही नहीं, बल्कि समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, प्राचीन मंदिरों, शिलालेखों और ऐतिहासिक घटनाओं के लिए भी प्रसिद्ध है। ऐसे में यह राष्ट्रीय सम्मेलन इतिहास, पुरातत्व और संस्कृति के क्षेत्र में नए शोध की दिशा तय करने के साथ-साथ शेखावाटी को अकादमिक जगत में नई पहचान दिलाने का महत्वपूर्ण मंच साबित हो सकता है।

