नकली सोने के पेंडल से 20 लाख की ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश, तीन आरोपी गिरफ्तार
उत्तर प्रदेश के बरेली में थाना किला पुलिस ने नकली सोने के पेंडल के जरिए सुनारों को लाखों रुपये की चपत लगाने वाले एक शातिर गिरोह का पर्दाफाश करते हुए बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस ने इस मामले में दो पुरुष और एक महिला सहित तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से असली और नकली आभूषण, फर्जी आधार कार्ड, मोबाइल फोन, डायरी और नकदी बरामद की गई है। पुलिस का दावा है कि यह गिरोह बेहद सुनियोजित तरीके से सुनारों को अपना निशाना बनाता था और विश्वास जीतने के बाद करोड़ों के कारोबार में लाखों रुपये की ठगी को अंजाम देता था।
पुलिस के अनुसार, जकाती निवासी विपिन कुमार रस्तोगी ने थाना किला में शिकायत दर्ज कराई थी कि कुछ लोगों ने पहले उनके साथ छोटे स्तर पर लेन-देन कर भरोसा कायम किया। इसके बाद आरोपियों ने करीब 190 ग्राम वजन के 19 नकली सोने के पेंडल असली बताकर उन्हें सौंप दिए। बदले में उन्होंने लगभग 20 लाख रुपये नकद, सोने-चांदी के आभूषण और अन्य कीमती सामान ले लिया। बाद में जब पेंडलों की जांच कराई गई तो वे नकली निकले, जिसके बाद पीड़ित ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

मामले की गंभीरता को देखते हुए थाना किला पुलिस ने जांच शुरू की। पुलिस टीम ने घटनास्थल और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। साथ ही मोबाइल फोन की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) और सर्विलांस की मदद से आरोपियों की पहचान की गई। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि मुकदमे में नामित भगवान सिंह का वास्तविक नाम महेंद्र है और वह अपनी पहचान छिपाकर वारदातों को अंजाम देता था।
बुधवार को पुलिस को सूचना मिली कि आरोपी शहर में मौजूद हैं। इसके बाद पुलिस ने घेराबंदी कर श्मशान भूमि फाटक के पास मिट्टी के टीले से महेंद्र, उसके साथी सुरेश और महिला आरोपी बबली उर्फ बब्बू को गिरफ्तार कर लिया। तीनों से पूछताछ में कई अहम जानकारियां सामने आई हैं, जिनके आधार पर पुलिस अन्य मामलों की भी जांच कर रही है।
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 11 पीली धातु के पेंडल, जिन्हें सोने की मोहरों जैसा बनाया गया था, चार नकली पेंडल, एक सफेद धातु की चेन, चार चूड़ियां, एक अंगूठी, एक फर्जी आधार कार्ड, छह डायरी, तीन मोबाइल फोन और 10,550 रुपये नकद बरामद किए हैं। बरामद सामान के आधार पर पुलिस ने मुकदमे में अतिरिक्त धाराएं भी जोड़ दी हैं।

एसपी सिटी मानुष पारिक ने बताया कि गिरोह का तरीका बेहद शातिर था। आरोपी पहले किसी सुनार के पास असली आभूषण गिरवी रखकर या छोटी खरीद-फरोख्त कर उसका विश्वास जीतते थे। जब भरोसा बन जाता था, तब नकली धातु पर सोने की परत चढ़ाकर तैयार किए गए पेंडल असली बताकर बेच देते थे। बदले में भारी रकम, सोने-चांदी के आभूषण और अन्य कीमती सामान लेकर फरार हो जाते थे। अपनी पहचान छिपाने के लिए गिरोह के सदस्य फर्जी आधार कार्ड और अन्य पहचान पत्रों का इस्तेमाल करते थे।
पूछताछ में यह भी सामने आया कि ठगी से मिलने वाली रकम और सामान को गिरोह के सदस्य आपस में बांट लेते थे। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस गिरोह ने उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों में कितनी वारदातों को अंजाम दिया है और इनके नेटवर्क में कितने अन्य लोग शामिल हैं।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान राजस्थान के भरतपुर निवासी महेंद्र और सुरेश तथा अलवर निवासी बबली उर्फ बब्बू के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, तीनों के खिलाफ पहले से भी बरेली के थाना किला और थाना बिथरी चैनपुर में धोखाधड़ी के मुकदमे दर्ज हैं। उनके आपराधिक रिकॉर्ड की विस्तृत जांच की जा रही है और अन्य राज्यों की पुलिस से भी संपर्क किया जा रहा है।
फिलहाल पुलिस ने तीनों आरोपियों के खिलाफ अग्रिम विधिक कार्रवाई शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि मामले की गहन जांच जारी है और यदि इस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों के नाम सामने आते हैं तो उनके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही पुलिस ने सुनारों और व्यापारियों से अपील की है कि किसी भी बड़े लेन-देन से पहले आभूषणों की गुणवत्ता और पहचान की पूरी तरह जांच अवश्य कर लें, ताकि इस तरह की ठगी से बचा जा सके।

