10 लाख के विवाद में बरेली पुलिस पर गंभीर आरोप, 4 पुलिसकर्मी निलंबित; SSP ने बैठाई विभागीय जांच
बरेली में 10 लाख रुपये के लेनदेन से जुड़े विवाद ने पुलिस विभाग में हलचल मचा दी है। मामले में गंभीर आरोप सामने आने के बाद वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) बरेली अनुराग आर्य ने थाना बारादरी में तैनात चार पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। साथ ही पूरे प्रकरण की विभागीय जांच के आदेश भी जारी कर दिए गए हैं। इस कार्रवाई के बाद पुलिस महकमे में चर्चा का माहौल है और मामले को विभागीय अनुशासन से जोड़कर देखा जा रहा है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि उसने 12 मई 2026 को एक प्लॉट खरीदने के उद्देश्य से एक प्रॉपर्टी डीलर को 10 लाख रुपये दिए थे। आरोप है कि रकम लेने के बावजूद प्रॉपर्टी डीलर ने न तो जमीन का कोई एग्रीमेंट कराया और न ही शिकायतकर्ता की रकम वापस की। जब पीड़ित ने अपने पैसे वापस मांगने शुरू किए तो मामला विवाद में बदल गया।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि प्रॉपर्टी डीलर ने थाना बारादरी में तैनात कुछ पुलिसकर्मियों से सांठगांठ कर ली थी। आरोपों के मुताबिक, संबंधित पुलिसकर्मियों ने कानून के दायरे से बाहर जाकर शिकायतकर्ता को पकड़ लिया और उसे अपने आवास पर अवैध रूप से बैठाए रखा। इतना ही नहीं, शिकायत में यह भी कहा गया है कि शिकायतकर्ता को छोड़ने के बदले पैसों की मांग की गई और कथित रूप से आर्थिक दबाव बनाकर उसे परेशान किया गया।
मामले की शिकायत उच्च अधिकारियों तक पहुंचने के बाद SSP अनुराग आर्य ने तत्काल संज्ञान लिया। प्रारंभिक जांच में आरोपों को गंभीर मानते हुए उन्होंने चार पुलिसकर्मियों को निलंबित करने का निर्णय लिया। SSP ने साफ कहा है कि पुलिस विभाग में किसी भी प्रकार की अनुशासनहीनता, भ्रष्टाचार या पद के दुरुपयोग को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
निलंबित किए गए पुलिसकर्मियों में थाना बारादरी के मुख्य आरक्षी आशीष मिश्रा, मुख्य आरक्षी राहुल कुमार, आरक्षी सिद्धांत चौधरी और आरक्षी आदित्य प्रताप सिंह शामिल हैं। चारों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर विभागीय जांच शुरू कर दी गई है। जांच के दौरान इन पुलिसकर्मियों की भूमिका, शिकायतकर्ता के आरोपों की सत्यता और पूरे घटनाक्रम की विस्तृत पड़ताल की जाएगी।
पुलिस विभाग का कहना है कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से कराई जाएगी। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ कठोर विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है। वहीं, यदि आरोपों में अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
SSP अनुराग आर्य ने कहा कि पुलिस की जिम्मेदारी आम नागरिकों को न्याय दिलाना और कानून व्यवस्था बनाए रखना है। यदि कोई पुलिसकर्मी अपने पद का दुरुपयोग करता है या किसी व्यक्ति के अधिकारों का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि विभाग की छवि खराब करने वाले किसी भी कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा।
इस घटना के बाद पुलिस विभाग ने अपने अधिकारियों और कर्मचारियों को स्पष्ट संदेश दिया है कि भ्रष्टाचार, अनुशासनहीनता और अवैध गतिविधियों में शामिल पाए जाने पर कठोर कार्रवाई तय है। फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है और विभागीय जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। अब सभी की नजर जांच के नतीजों पर टिकी हुई है, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और मामले में आगे क्या कदम उठाए जाएंगे।


