लॉन्च होते ही CBSC का री-इवैल्यूएशन पोर्टल ठप; 4 लाख से अधिक छात्रों का भविष्य अधर में, ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम (OSM) पर उठे गंभीर सवाल

मुख्य हाइलाइट्स:
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पोर्टल क्रैश: करीब 4 दिनों के लंबे इंतजार के बाद मंगलवार (02 जून 2026) को खुला सीबीएसई का आधिकारिक पुनर्मूल्यांकन पोर्टल (Re-evaluation Portal) भारी ट्रैफिक के कारण लॉन्च के चंद मिनटों के भीतर ठप हो गया।
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लाखों छात्र प्रभावित: इस तकनीकी कुप्रबंधन से देश भर के लगभग 4,04,319 से अधिक छात्र सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं।
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समय-सीमा और कड़े नियम: बोर्ड की आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति “image_8dc9e2.jpg” के मुताबिक, आवेदन की खिड़की केवल 02 जून से 06 जून 2026 (मध्यरात्रि) तक ही खुली रहेगी, जिससे छात्रों में हताशा और बढ़ गई है।
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गंभीर विसंगतियां: उत्तर पुस्तिकाओं के डिजिटलीकरण में भारी चूक आई सामने; स्कैन कॉपी से मुख्य पृष्ठ, सप्लीमेंट्री शीट्स, और मैप/ग्राफ तक गायब होने की शिकायतें।
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शिक्षा मंत्री का रुख: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने पहले ही ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली में मानवीय और तकनीकी त्रुटियों की दर अधिक होने का अनुमान लगाया था।
1. चार दिन का थकाऊ इंतजार और चंद मिनटों का ‘तकनीकी कबाड़’
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की मुश्किलें और प्रशासनिक लापरवाही थमने का नाम नहीं ले रही हैं। कक्षा 12वीं के परिणाम घोषित होने के बाद से ही देश भर में मूल्यांकन प्रक्रिया गंभीर जांच के दायरे में बनी हुई है। देश भर से सैकड़ों छात्रों और शिक्षक संगठनों ने शिकायत दर्ज कराई थी कि इस साल अंकों के आवंटन में अप्रत्याशित और अस्वाभाविक विसंगतियां देखी गई हैं। छात्रों की भारी मांग और भारी जनाक्रोश के बाद, सीबीएसई ने उत्तर पुस्तिकाओं के सत्यापन और पुनर्मूल्यांकन के लिए एक ऑनलाइन पोर्टल शुरू करने का वादा किया था।
करीब चार दिनों के लंबे और मानसिक रूप से थका देने वाले इंतजार के बाद, आज मंगलवार, 02 जून 2026 को जैसे ही बोर्ड का आधिकारिक पुनर्मूल्यांकन पोर्टल (यूआरएल: [https://www.cbse.gov.in/newsite_old/rchk.html](https://www.cbse.gov.in/newsite_old/rchk.html)) लाइव हुआ, छात्रों के चेहरों पर आई खुशी कुछ ही पलों में भारी गुस्से में बदल गई। देश भर से एक साथ लाखों छात्रों, अभिभावकों और साइबर कैफे संचालकों ने जब पोर्टल पर लॉगिन करने का प्रयास किया, तो सीबीएसई का सर्वर इस लोड को संभालने में पूरी तरह नाकाम रहा। वेबसाइट पर लगातार ‘504 गेटवे टाइमआउट’ और ‘सर्विस अनअवेलेबल’ के एरर मैसेज आने लगे।
इसके बाद से छात्रों और अभिभावकों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। सोशल मीडिया पर छात्रों ने सीबीएसई को आड़े हाथों लेते हुए पूछा— “क्या देश का सबसे बड़ा शिक्षा बोर्ड कभी कोई तकनीकी प्रणाली बिना किसी बड़ी खामी के सुचारू रूप से संचालित कर सकता है?”
2. सीबीएसई की प्रेस विज्ञप्ति (“image_8dc9e2.jpg”) का विस्तृत विश्लेषण: नियम और कड़े प्रावधान 
तकनीकी गड़बड़ी और चौतरफा घिरने के बाद सीबीएसई ने आधिकारिक बयान जारी कर दावा किया है कि उनकी आईटी टीम ने तुरंत काम शुरू कर दिया और पोर्टल को दोबारा सक्रिय (Active) कर दिया गया है। हालांकि, जमीनी स्तर पर पड़ताल करने पर न्यूज़ 21 को पता चला कि छात्र अभी भी ओटीपी न आने, आधार वेरिफिकेशन फेल होने और पेमेंट गेटवे अटकने जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रहे हैं।
संदर्भ फाइल https://www.cbse.gov.in/cbsenew/documents/Press_Release_Verification_02062026.pdf के रूप में उपलब्ध सीबीएसई की मूल प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, बोर्ड ने इस साल की पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया के लिए बेहद कड़े नियम, समय-सीमा और शुल्क ढांचा निर्धारित किया है:
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सख्त समय-सीमा (Timelines): स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाओं में विसंगतियों के सत्यापन और प्रश्नों के पुनर्मूल्यांकन का पोर्टल 02.06.2026 (मंगलवार) से 06.06.2026 (शनिवार) की मध्यरात्रि (Midnight) तक ही खुला रहेगा। बोर्ड ने साफ कर दिया है कि इस समय-सीमा के बाद किसी भी ऑफलाइन या ऑनलाइन अनुरोध पर विचार नहीं किया जाएगा।
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आधार प्रमाणीकरण अनिवार्य: सुरक्षा और पारदर्शिता का हवाला देते हुए बोर्ड ने अनिवार्य किया है कि छात्रों को पोर्टल में लॉगिन करने के लिए अपने सीबीएसई क्रेडेंशियल्स के साथ-साथ अपना आधार नंबर (Aadhar Number) दर्ज करना होगा।
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डिजिटल भुगतान: पूरी प्रक्रिया को डिजिटल मोड में रखा गया है। छात्र केवल यूपीआई (UPI), क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड या नेट बैंकिंग के माध्यम से ही शुल्क का भुगतान कर सकते हैं।
भारी-भरकम शुल्क ढांचा (Fee Structure):
बोर्ड की अपनी गलतियों का खामियाजा छात्रों को आर्थिक रूप से भी भुगतना पड़ रहे है। प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार शुल्क निम्नलिखित है:
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उत्तर पुस्तिका में विसंगतियों का सत्यापन: रू. 100/- प्रति उत्तर पुस्तिका (Per Answer Book)
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प्रश्नों का पुनर्मूल्यांकन: रू. 25/- प्रति प्रश्न (Per Question)
3. 4,04,319 से अधिक छात्र प्रभावित: डिजिटल मूल्यांकन में गंभीर चूक
इस साल बोर्ड की लापरवाही का शिकार होने वाले छात्रों का आंकड़ा बेहद चौंकाने वाला है। 4 लाख से अधिक (4,04,319) छात्र इस समय अनिश्चितता के भंवर में फंसे हैं। प्रेस विज्ञप्ति Press_Release के खंड ‘a’ (Verification of Issues in Scanned Copy of Answer Book) को देखने पर साफ पता चलता है कि बोर्ड खुद यह मान रहा है कि उनकी डिजिटल प्रणाली में कितनी बड़ी कमियां हो सकती हैं।
विज्ञप्ति के अनुसार, छात्र निम्नलिखित विसंगतियों के खिलाफ ऑनलाइन शिकायत दर्ज करा सकते हैं:
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गायब मुख्य पृष्ठ (Missing Pages): कॉपियों को स्कैन करते समय कई पन्ने छोड़ दिए गए।
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लापता अतिरिक्त शीट (Missing Supplementary Sheets): छात्रों द्वारा ली गई सप्लीमेंट्री कॉपियों को रिकॉर्ड में ही नहीं जोड़ा गया।
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नक्शे और ग्राफ गायब (Missing Maps/Graphs): भूगोल, अर्थशास्त्र और इतिहास जैसे विषयों में छात्रों द्वारा लगाए गए मुख्य नक्शे और ग्राफ मूल्यांकन से गायब हैं।
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धुंधले पन्ने (Blurred Pages): अपलोड की गई स्कैन कॉपियां इतनी धुंधली हैं कि शिक्षक या छात्र उन्हें पढ़ ही नहीं सकते।
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गलत उत्तर पुस्तिका (Incorrect Answer Book): छात्र के अकाउंट में किसी अन्य छात्र या किसी अन्य विषय की कॉपी प्रदर्शित हो रही है।
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गलत प्रश्नपत्र सेट से मूल्यांकन (Evaluation against a different set): छात्र को कोई और सेट मिला था, जबकि उसकी जांच किसी अन्य सेट की आंसर-की (Answer Key) से कर दी गई।
4. ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली का विवाद और शिक्षा मंत्री का हस्तक्षेप
इस पूरे गतिरोध के पीछे सीबीएसई द्वारा इस वर्ष बड़े पैमाने पर लागू की गई नई ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। इस व्यवस्था के तहत शिक्षकों को भौतिक रूप से पेन-पेपर से कॉपियां जांचने के बजाय कंप्यूटर स्क्रीन पर कॉपियों का मूल्यांकन करना था।
शिक्षकों के संगठनों का आरोप है कि उन्हें इस जटिल सॉफ्टवेयर को चलाने का न तो उचित प्रशिक्षण दिया गया और न ही प्रति कॉपी मूल्यांकन के लिए पर्याप्त समय मिला। जल्दीबाजी में कंप्यूटर स्क्रीन पर कॉपियां जांचने के कारण हजारों मेधावी छात्रों के 15 से 30 अंक तक कट गए।
पिछले हफ़्तों में लगातार मिल रही शिकायतों के बीच, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भी इस मामले में हस्तक्षेप किया था। उन्होंने प्रारंभिक समीक्षा बैठकों के बाद खुद यह अनुमान लगाया था कि इस नई तकनीकी प्रणाली के कारण मूल्यांकन की गई उत्तर पुस्तिकाओं में मानवीय और तकनीकी त्रुटियों की दर इस बार अप्रन्याशित रूप से अधिक हो सकती है। शिक्षा मंत्रालय ने बोर्ड को सख्त निर्देश दिए थे कि पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया को पारदर्शी और सुगम बनाया जाए, लेकिन पोर्टल के पहले ही दिन क्रैश होने से बोर्ड की अधूरी तैयारियों की पोल खुल गई है।
5. न्यूज़ 21 ग्राउंड रिपोर्ट: करियर दांव पर, अभिभावकों में आक्रोश
न्यूज़ 21 की टीम ने राजस्थान के जयपुर और अलवर सहित कई क्षेत्रों में पीड़ित छात्रों और उनके परिजनों से बात की। जयपुर के एक प्रतिष्ठित स्कूल के छात्र अक्षत राज ने बताया, “मुझे साल भर आंतरिक परीक्षाओं में 95% से अधिक अंक मिल रहे थे, लेकिन मुख्य परीक्षा के परिणाम में मुझे भौतिक विज्ञान (Physics) में केवल 58 अंक दिए गए हैं। जब मैंने बड़ी मुश्किल से स्कैन कॉपी डाउनलोड की, तो पता चला कि मेरे तीन बड़े उत्तरों वाले पन्ने स्कैनिंग में कटे हुए और पूरी तरह धुंधले हैं। आज जब मैं शिकायत दर्ज करने के लिए सुबह से पोर्टल खोलने का प्रयास कर रहा हूँ, तो वेबसाइट क्रैश बता रही है। 6 जून के बाद पोर्टल बंद हो जाएगा, अगर मेरा फॉर्म नहीं भरा गया तो मेरा पूरा साल बर्बाद हो जाएगा।”
अभिभावकों का गुस्सा इस बात पर है कि दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) और अन्य केंद्रीय विश्वविद्यालयों में सीयूईटी (CUET) के माध्यम से प्रवेश प्रक्रियाएं शुरू होने वाली हैं। यदि सीबीएसई अपने पुनर्मूल्यांकन के परिणामों में देरी करती है या तकनीकी खामियों के कारण छात्रों को आवेदन से वंचित रखती है, तो छात्र उच्च शिक्षा के बेहतरीन अवसरों से हमेशा के लिए चूक जाएंगे।
6. न्यूज़ 21 का संपादकीय दृष्टिकोण और निष्कर्ष
सीबीएसई का यह री-इवैल्यूएशन पोर्टल विवाद केवल एक सामान्य सर्वर डाउन होने की घटना नहीं है, बल्कि यह देश के 4 लाख से अधिक होनहार युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य और उनके भविष्य के साथ किया जा रहा प्रशासनिक खिलवाड़ है। बोर्ड का यह दावा कि पोर्टल को दोबारा सक्रिय कर दिया गया है, कागजी अधिक और व्यावहारिक कम नजर आता है, क्योंकि जमीनी स्तर पर अब भी हजारों छात्र लॉगिन की कतार में फंसे हैं।
हमारी मांगें और भावी समाधान:
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समय-सीमा का विस्तार: पोर्टल के ठप रहने और शुरुआती गड़बड़ियों को देखते हुए सीबीएसई को तुरंत आवेदन की अंतिम तिथि को 06 जून से बढ़ाकर कम से कम 15 जून 2026 करना चाहिए।
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शुल्क की माफी: गायब पन्नों, धुंधली प्रतियों और गलत सेट से मूल्यांकन जैसी बोर्ड स्तर की तकनीकी चूकों के लिए छात्रों से लिया जाने वाला शुल्क (रू. 100 और रू. 25) पूरी तरह माफ होना चाहिए।
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स्वतंत्र जांच: ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सॉफ्टवेयर और कॉपियों के डिजिटलीकरण में हुई गड़बड़ियों की जांच के लिए शिक्षा मंत्रालय द्वारा एक स्वतंत्र उच्च स्तरीय तकनीकी समिति का गठन किया जाना चाहिए ताकि भविष्य में देश के छात्रों को ऐसा मानसिक उत्पीड़न न झेलना पड़े।
यह विस्तृत समाचार रिपोर्ट सीबीएसई द्वारा 02 जून 2026 को जारी आधिकारिक प्रेस रिलीज देश भर के प्रभावित छात्रों से प्राप्त जमीनी इनपुट्स और शिक्षा मंत्रालय के आधिकारिक बयानों पर आधारित है
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