PM Modi की ‘मन की बात’ सुनने पहुंचे भाजपा नेता, लेकिन पार्टी की अपील पर नहीं चला अमल
ईवी, साइकिल और कार पूलिंग का दिया गया था संदेश, अधिकांश पदाधिकारी निजी वाहनों से पहुंचे
जयपुर। PM Modi के लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के प्रसारण को सुनने के लिए रविवार को राजस्थान में भाजपा कार्यालय से लेकर बूथ स्तर तक विशेष कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। पार्टी की ओर से कार्यकर्ताओं, पदाधिकारियों और नेताओं को बड़ी संख्या में इन कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए कहा गया था। साथ ही एक विशेष अपील भी जारी की गई थी कि सभी लोग पर्यावरण संरक्षण और संसाधनों की बचत का संदेश देने के लिए इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी), साइकिल, कार पूलिंग, सार्वजनिक परिवहन या संभव हो तो पैदल चलकर कार्यक्रम स्थल तक पहुंचें।
भाजपा का उद्देश्य था कि वैश्विक आर्थिक चुनौतियों और ऊर्जा संकट के दौर में जनता को किफायत और संसाधनों के जिम्मेदार उपयोग का संदेश दिया जाए। पार्टी चाहती थी कि उसके कार्यकर्ता और पदाधिकारी स्वयं उदाहरण प्रस्तुत करें ताकि समाज में सकारात्मक संदेश जाए। हालांकि जमीनी स्तर पर स्थिति कुछ अलग ही नजर आई।

राजधानी जयपुर स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान अधिकांश पदाधिकारी और नेता अपनी निजी पेट्रोल और डीजल से चलने वाली गाड़ियों में ही पहुंचे। पार्टी की अपील के बावजूद बहुत कम लोगों ने वैकल्पिक साधनों का उपयोग किया। कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने वाले वाहनों की संख्या देखकर यह स्पष्ट नजर आया कि अपील का व्यापक असर दिखाई नहीं दिया।
जानकारी के अनुसार केवल कुछ चुनिंदा पदाधिकारियों ने ही कार पूलिंग का सहारा लिया, जबकि अधिकांश नेता अपनी-अपनी गाड़ियों में अकेले ही कार्यालय पहुंचे। कई वरिष्ठ पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की गाड़ियां कार्यालय परिसर और आसपास खड़ी दिखाई दीं। इससे यह सवाल भी उठने लगे कि जब पार्टी स्वयं अपने कार्यकर्ताओं से एक संदेश देने की बात कर रही थी तो उसके नेता और पदाधिकारी उस पर कितना अमल कर पाए।
कार्यक्रम में शामिल लोगों के अनुसार किसी भी प्रमुख पदाधिकारी को साइकिल से आते हुए नहीं देखा गया। वहीं सार्वजनिक परिवहन जैसे सरकारी बस या अन्य साझा साधनों का उपयोग करने वाले लोगों की संख्या भी नगण्य रही। पैदल पहुंचने वाले कार्यकर्ताओं की भी कोई उल्लेखनीय संख्या सामने नहीं आई।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि किसी भी सामाजिक या जनजागरूकता अभियान की सफलता तभी संभव होती है जब उसके संदेश को सबसे पहले संगठन के लोग स्वयं अपनाएं। यदि नेतृत्व स्तर पर ही अपील का पालन नहीं होता तो जनता तक उसका प्रभाव सीमित रह जाता है। ऐसे में भाजपा की ओर से दिया गया संदेश और जमीनी हकीकत के बीच अंतर चर्चा का विषय बन गया है।
हालांकि पार्टी के कुछ नेताओं का कहना है कि कई कार्यकर्ताओं को दूर-दराज के क्षेत्रों से कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आना पड़ा, जिसके कारण निजी वाहनों का उपयोग करना उनकी मजबूरी थी। उनका तर्क है कि समय की कमी और दूरी अधिक होने के कारण सभी लोगों के लिए वैकल्पिक परिवहन साधनों का उपयोग करना संभव नहीं था।
इसके बावजूद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा बनी रही कि यदि पार्टी की ओर से विशेष अपील जारी की गई थी तो कम से कम प्रदेश कार्यालय स्तर पर उसका अधिक प्रभाव दिखाई देना चाहिए था। पर्यावरण संरक्षण, ईंधन बचत और कार्बन उत्सर्जन कम करने जैसे मुद्दों पर भाजपा लगातार जागरूकता की बात करती रही है। ऐसे में पार्टी के कार्यक्रम में ही अपील का सीमित असर दिखाई देना सवाल खड़े करता है।
PM Modi अपने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में अक्सर पर्यावरण संरक्षण, ऊर्जा बचत, स्वच्छता और जनभागीदारी जैसे विषयों पर चर्चा करते हैं। इसी सोच को आगे बढ़ाने के लिए पार्टी ने इस बार कार्यकर्ताओं से वैकल्पिक परिवहन साधनों का उपयोग करने का आग्रह किया था। लेकिन अधिकांश पदाधिकारियों के निजी वाहनों से पहुंचने के कारण यह प्रयास पूरी तरह सफल होता नजर नहीं आया।
फिलहाल यह मुद्दा राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना हुआ है। कई लोग इसे संगठनात्मक अनुशासन और संदेश के पालन से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि कुछ का मानना है कि व्यवहारिक परिस्थितियों के कारण ऐसा हुआ। हालांकि इतना तय है कि भविष्य में यदि ऐसे अभियानों को प्रभावी बनाना है तो नेतृत्व और कार्यकर्ताओं दोनों को संदेश के अनुरूप आचरण भी दिखाना होगा।

