जयपुर के स्टार्टअप की अनूठी पहल, अब बच्चे खुद बनेंगे अपनी कहानी के हीरो
Pikori ने लॉन्च किया पर्सनलाइज्ड स्टोरीबुक प्लेटफॉर्म, बच्चों को स्क्रीन से दूर कर किताबों से जोड़ने की कोशिश
जयपुर। डिजिटल युग में जहां बच्चों का अधिकांश समय मोबाइल फोन, टैबलेट और टीवी स्क्रीन के सामने बीत रहा है, वहीं राजस्थान की राजधानी जयपुर के एक स्टार्टअप ने बच्चों को दोबारा किताबों की दुनिया से जोड़ने की अनूठी पहल की है। जयपुर आधारित स्टार्टअप Pikori ने एक ऐसा पर्सनलाइज्ड स्टोरीबुक प्लेटफॉर्म लॉन्च किया है, जिसमें बच्चे केवल कहानी पढ़ते ही नहीं बल्कि स्वयं कहानी के मुख्य किरदार भी बन जाते हैं।
आज के समय में अधिकांश अभिभावकों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि उनके बच्चे किताबों की बजाय डिजिटल स्क्रीन पर अधिक समय बिता रहे हैं। इसका असर न केवल उनकी पढ़ने की आदतों पर पड़ रहा है बल्कि उनकी कल्पनाशक्ति और रचनात्मक सोच पर भी दिखाई देने लगा है। इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए Pikori ने एक ऐसा प्लेटफॉर्म तैयार किया है जो तकनीक और पढ़ाई को एक साथ जोड़ता है।

इस प्लेटफॉर्म की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि बच्चों की वास्तविक तस्वीरों को कहानी के पात्रों और चित्रों में शामिल किया जाता है। जब कोई अभिभावक अपने बच्चे की तस्वीर अपलोड करता है, तो वह तस्वीर कहानी की दुनिया का हिस्सा बन जाती है। इसके बाद बच्चा स्वयं को किसी अंतरिक्ष यात्री, जंगल के राजा, समुद्री खोजकर्ता, सुपरहीरो या परियों की दुनिया के नायक के रूप में देख सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब बच्चे किसी कहानी में स्वयं को देखते हैं तो उनका भावनात्मक जुड़ाव उस कहानी से कई गुना बढ़ जाता है। यही वजह है कि वे किताब को बार-बार पढ़ना पसंद करते हैं। Pikori का यह प्रयोग बच्चों के अंदर पढ़ने की आदत विकसित करने के साथ-साथ उनकी कल्पनाशक्ति को भी नई उड़ान देता है।
स्टार्टअप के संस्थापकों का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल किताबें बेचना नहीं, बल्कि बच्चों को एक ऐसा अनुभव देना है जो उन्हें सीखने के लिए प्रेरित करे। उनका मानना है कि यदि बच्चों को पढ़ाई और कहानियों से भावनात्मक रूप से जोड़ा जाए तो वे स्वाभाविक रूप से स्क्रीन टाइम कम कर सकते हैं। इसी सोच के साथ Pikori ने इस अभिनव प्लेटफॉर्म को विकसित किया है।
शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार व्यक्तिगत अनुभव आधारित शिक्षा आज की सबसे प्रभावी सीखने की तकनीकों में से एक है। जब बच्चा किसी कहानी में स्वयं को मुख्य पात्र के रूप में देखता है तो वह न केवल कहानी को बेहतर तरीके से समझता है बल्कि उससे जुड़ी सीख को भी लंबे समय तक याद रखता है। यही कारण है कि व्यक्तिगत कहानी पुस्तकों की लोकप्रियता दुनियाभर में तेजी से बढ़ रही है।
अभिभावकों ने भी इस पहल का स्वागत किया है। कई माता-पिता का कहना है कि उनके बच्चे पहले किताबें पढ़ने में ज्यादा रुचि नहीं लेते थे, लेकिन जब उन्होंने खुद को कहानी का हिस्सा देखा तो वे उत्साह के साथ किताब पढ़ने लगे। इससे बच्चों में पढ़ने की आदत विकसित होने के साथ-साथ आत्मविश्वास भी बढ़ा है।
बच्चों के मानसिक विकास में कहानियों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। कहानियां न केवल मनोरंजन करती हैं बल्कि बच्चों को नैतिक मूल्यों, समस्याओं के समाधान और रचनात्मक सोच के बारे में भी सिखाती हैं। Pikori का यह प्लेटफॉर्म इन्हीं मूल उद्देश्यों को आधुनिक तकनीक के माध्यम से नए स्वरूप में प्रस्तुत कर रहा है।
जयपुर से शुरू हुई यह पहल अब देशभर के अभिभावकों और बच्चों के बीच लोकप्रिय हो रही है। स्टार्टअप का दावा है कि आने वाले समय में विभिन्न आयु वर्गों के बच्चों के लिए नई कहानियां और थीम आधारित पुस्तकें भी लॉन्च की जाएंगी। इसके साथ ही प्लेटफॉर्म को और अधिक इंटरैक्टिव बनाने पर भी काम किया जा रहा है।
तकनीक के इस दौर में जहां बच्चों को स्क्रीन से दूर रखना एक बड़ी चुनौती बन गया है, वहीं Pikori की यह पहल एक सकारात्मक उदाहरण बनकर उभरी है। यह न केवल बच्चों को किताबों की ओर आकर्षित कर रही है बल्कि उनकी रचनात्मकता, कल्पनाशक्ति और सीखने की क्षमता को भी मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

