जयपुर के SMS हॉस्पिटल में बड़ा मिसमैनेजमेंट, 45 मिनट तक बिजली रही गुल
SMS हॉस्पिटल की मुख्य बिल्डिंग में अचानक बिजली बंद, प्रशासन को नहीं लगी भनक
राजस्थान के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल सवाई मानसिंह हॉस्पिटल (SMS) में गुरुवार सुबह बड़ा मिसमैनेजमेंट सामने आया, जिसने अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। सुबह करीब 7:30 बजे अस्पताल की मुख्य बिल्डिंग के लगभग 30 फीसदी हिस्से की बिजली सप्लाई अचानक बंद हो गई और करीब 45 मिनट तक हालात ऐसे ही बने रहे। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि इस दौरान मेंटेनेंस का जिम्मा संभाल रहे अधिकारियों और कर्मचारियों को भी इसकी जानकारी नहीं थी। अस्पताल जैसे संवेदनशील संस्थान में इस तरह की लापरवाही को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं।
जानकारी के अनुसार, अस्पताल की मुख्य बिल्डिंग के उस हिस्से में बिजली बाधित हुई जहां प्रशासनिक कार्यालय संचालित होते हैं। सुबह जब करीब 8 बजे कर्मचारी और अधिकारी अपने कार्यालय पहुंचे तो वहां अंधेरा मिला। इसके बाद उन्होंने संबंधित विभाग को सूचना दी। सूचना मिलने के बाद तकनीकी टीम हरकत में आई और करीब 8:15 बजे बिजली सप्लाई बहाल की जा सकी। हालांकि इस दौरान अस्पताल के जनरल वार्ड और आईसीयू में बिजली व्यवस्था सुचारू बनी रही, जिससे मरीजों को किसी बड़े संकट का सामना नहीं करना पड़ा।

अस्पताल प्रशासन की सबसे बड़ी चिंता इस बात को लेकर है कि यदि बिजली कटौती का असर आईसीयू, ऑपरेशन थिएटर या इमरजेंसी सेवाओं पर पड़ता तो स्थिति बेहद गंभीर हो सकती थी। SMS हॉस्पिटल राजस्थान ही नहीं बल्कि पूरे उत्तर भारत के प्रमुख सरकारी अस्पतालों में गिना जाता है, जहां रोजाना हजारों मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में बिना सूचना बिजली कटौती और उसकी जानकारी तक संबंधित अधिकारियों को नहीं होना प्रशासनिक लापरवाही का बड़ा उदाहरण माना जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार बिजली कटौती को लेकर अस्पताल के तकनीकी विभाग में भी स्पष्ट जानकारी नहीं मिल सकी। कुछ कर्मचारियों का कहना है कि संभवतः किसी तकनीकी खराबी या मेंटेनेंस कार्य के कारण सप्लाई बाधित हुई होगी, लेकिन इसकी पूर्व सूचना किसी को नहीं दी गई। वहीं कई कर्मचारियों ने यह भी कहा कि यदि समय रहते स्टाफ इसकी सूचना नहीं देता तो बिजली सप्लाई और अधिक समय तक बाधित रह सकती थी।

इस घटना के बाद अस्पताल में काम करने वाले कर्मचारियों और मरीजों के परिजनों में भी नाराजगी देखने को मिली। लोगों का कहना है कि सरकारी अस्पतालों में पहले ही व्यवस्थाओं को लेकर कई शिकायतें रहती हैं और अब इस तरह की घटनाएं मरीजों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा रही हैं। अस्पताल में इलाज कराने आए कई लोगों ने कहा कि यदि बिजली बंद होने से किसी गंभीर मरीज की जान पर बन आती तो जिम्मेदारी कौन लेता।
विशेषज्ञों का मानना है कि अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थानों पर बिजली व्यवस्था के लिए बैकअप सिस्टम और मॉनिटरिंग सिस्टम पूरी तरह सक्रिय रहना चाहिए। किसी भी प्रकार की तकनीकी खराबी या सप्लाई बाधित होने की स्थिति में तुरंत अलर्ट सिस्टम काम करना जरूरी है। लेकिन SMS हॉस्पिटल में जिस तरह करीब 45 मिनट तक बिजली बंद रही और जिम्मेदार अधिकारियों को इसकी जानकारी तक नहीं लगी, वह सिस्टम की कमजोरियों को उजागर करता है।
हालांकि राहत की बात यह रही कि इस दौरान आईसीयू और जनरल वार्ड में बिजली चालू रही। यदि वहां बिजली बाधित होती तो वेंटिलेटर, मॉनिटर और अन्य जरूरी मेडिकल उपकरण प्रभावित हो सकते थे, जिससे मरीजों की जान को खतरा पैदा हो सकता था। अस्पताल प्रशासन ने फिलहाल मामले की जांच शुरू करने की बात कही है और तकनीकी कारणों का पता लगाया जा रहा है।
SMS हॉस्पिटल राज्य का सबसे बड़ा सरकारी चिकित्सा संस्थान है, जहां जयपुर सहित पूरे राजस्थान और पड़ोसी राज्यों से भी मरीज इलाज के लिए आते हैं। यहां हर दिन हजारों मरीज ओपीडी में पहुंचते हैं और सैकड़ों गंभीर मरीज भर्ती रहते हैं। ऐसे अस्पताल में बिजली व्यवस्था जैसी बुनियादी सुविधा में लापरवाही सामने आना चिंता का विषय माना जा रहा है।
इस घटना ने एक बार फिर सरकारी अस्पतालों की व्यवस्थाओं और निगरानी तंत्र को लेकर बहस छेड़ दी है। लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य सेवाओं में छोटी सी लापरवाही भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। इसलिए प्रशासन को ऐसी घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए भविष्य में दोबारा इस तरह की स्थिति पैदा न हो, इसके लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।
फिलहाल अस्पताल प्रशासन ने तकनीकी टीम से रिपोर्ट मांगी है और बिजली सप्लाई बाधित होने के कारणों की जांच की जा रही है। उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में अस्पताल की बिजली व्यवस्था और मॉनिटरिंग सिस्टम को और मजबूत किया जाएगा ताकि मरीजों और कर्मचारियों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
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