
कासगंज/लखनऊ। अखंड आर्यावर्त निर्माण संघ सोरों के बैनर तले राजधानी लखनऊ में विधानसभा के निकट महात्मा गांधी पार्क में एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन आयोजित किया गया। यह प्रदर्शन संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष भूपेश शर्मा के नेतृत्व में हुआ, जिसमें प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए पदाधिकारी और कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।
धरने के दौरान उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को संबोधित एक ज्ञापन लखनऊ प्रशासन को सौंपा गया। ज्ञापन में प्रदेश के कक्षा 1 से 12 तक के सभी निजी विद्यालयों में एनसीईआरटी पाठ्यक्रम अनिवार्य रूप से लागू कराने, मनमानी फीस वृद्धि पर रोक लगाने तथा शिक्षा व्यवस्था में व्याप्त अनियमितताओं पर सख्त कार्रवाई की मांग की गई।
संघ ने आरोप लगाया कि निजी विद्यालयों द्वारा अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाला जा रहा है, महंगे कोर्स और किताबों की अनिवार्यता थोपकर शोषण किया जा रहा है, जिससे आम परिवारों पर भारी दबाव बढ़ रहा है।
प्रमुख मांगें
धरने में संगठन ने निम्न प्रमुख मांगें उठाईं—
- सभी निजी विद्यालयों में एनसीईआरटी पाठ्यक्रम अनिवार्य किया जाए
- महंगे कोर्स और किताबों की बाध्यता समाप्त की जाए
- फीस वृद्धि पर सख्त नियंत्रण के लिए ठोस नीति बनाई जाए
- नियमों का उल्लंघन करने वाले विद्यालयों पर कठोर कार्रवाई की जाए
नेताओं के बयान
राष्ट्रीय अध्यक्ष भूपेश शर्मा ने कहा कि प्रदेश में शिक्षा का तेजी से निजीकरण हो रहा है और स्कूल मनमाने ढंग से फीस वसूल रहे हैं। अभिभावक आर्थिक दबाव में हैं, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हो रही। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द ठोस कदम नहीं उठाए तो प्रदेशव्यापी आंदोलन किया जाएगा।
अशोक कुमार पांडे ने कहा कि शिक्षा के नाम पर अभिभावकों का शोषण किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। सरकार को इस मुद्दे पर तुरंत संज्ञान लेकर सख्त निर्देश जारी करने चाहिए।
वहीं सभासद नितेश उर्फ रिंकू पचौरी ने कहा कि यह आंदोलन केवल एक संगठन का नहीं बल्कि हर उस अभिभावक की आवाज है जो महंगी शिक्षा व्यवस्था से परेशान है। प्रशासन को जमीनी स्तर पर जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करनी चाहिए।
मौजूद रहे प्रमुख पदाधिकारी
धरने में राष्ट्रीय अध्यक्ष भूपेश शर्मा, अशोक कुमार पांडे, कपिल पंडित, रामदास सभासद, नितेश उर्फ रिंकू पचौरी सहित कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
चेतावनी
संघ ने स्पष्ट किया कि यदि निर्धारित समय सीमा में मांगों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई तो प्रदेशभर में बड़े स्तर पर आंदोलन शुरू किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।

