Jaipur: खो नागोरियान अग्निकांड मामले में बड़ी कार्रवाई, थाना प्रभारी समेत 8 पुलिसकर्मी सस्पेंड; शहरभर में सघन जांच के आदेश 
जयपुर। राजधानी के खो नागोरियान क्षेत्र में संचालित एक अवैध पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण अग्निकांड मामले को जयपुर पुलिस कमिश्नर ने बेहद गंभीरता से लिया है। प्रारंभिक जांच में लापरवाही बरतने के आरोप में पुलिस कमिश्नर सचिन मित्तल ने खो नागोरियान थाना अधिकारी (SHO) समेत 8 पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इसके साथ ही पूरी घटना की विस्तृत जांच के लिए एक विशेष कमेटी का गठन किया गया है।
इन पुलिसकर्मियों पर गिरी निलंबन की गाज
प्रारंभिक जांच में सामने आई लापरवाही के आधार पर खो नागोरियान थाना क्षेत्र में तैनात कई पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। निलंबित किए गए पुलिसकर्मियों में थाना अधिकारी ओमप्रकाश मातवा, हेड कांस्टेबल अशोक तथा कांस्टेबल रामावतार, दिनेश, आसिफ, हरेन्द्र और अशोक शामिल हैं।
इसके अलावा घटना के तुरंत बाद पुलिस उपायुक्त (पूर्व) रंजीता शर्मा द्वारा एएसआई अमर सिंह और हेड कांस्टेबल पप्पू राम को भी निलंबित किया जा चुका है। इस प्रकार अब तक कुल नौ पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की जा चुकी है। पुलिस मुख्यालय का मानना है कि क्षेत्र में अवैध गतिविधियों की समय रहते जानकारी और रोकथाम नहीं हो पाने के कारण यह गंभीर हादसा हुआ।
अंतरिम जांच रिपोर्ट के आधार पर पुलिस प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए निम्नलिखित पुलिसकर्मियों को सस्पेंड किया है:
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ओमप्रकाश मातवा (थानाधिकारी, खो नागोरियान)
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अशोक (हेड कांस्टेबल)
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रामावतार (कांस्टेबल)
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दिनेश (कांस्टेबल)
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आसिफ (कांस्टेबल)
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हरेन्द्र (कांस्टेबल)
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अशोक (कांस्टेबल)
इसके अतिरिक्त, घटना के तुरंत बाद पुलिस उपायुक्त (पूर्व) श्रीमती रंजीता शर्मा द्वारा ASI अमर सिंह और हेड कांस्टेबल पप्पू राम को भी निलंबित किया जा चुका है।
एडिशनल कमिश्नर (क्राइम) करेंगे विस्तृत जांच
जयपुर पुलिस कमिश्नर सचिन मित्तल ने मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (अपराध) अजय सिंह को जांच अधिकारी नियुक्त किया है। उनके नेतृत्व में गठित विशेष जांच समिति हादसे के सभी पहलुओं की बारीकी से जांच करेगी।
जांच में यह देखा जाएगा कि अवैध पटाखा फैक्ट्री किस प्रकार संचालित हो रही थी, क्या स्थानीय प्रशासन और पुलिस को इसकी जानकारी थी, सुरक्षा मानकों का कितना पालन किया गया और किन स्तरों पर लापरवाही बरती गई। जांच समिति अपनी रिपोर्ट पुलिस कमिश्नर को सौंपेगी, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
पुलिस कमिश्नर सचिन मित्तल ने बताया कि घटना की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (अपराध) श्री अजय सिंह को जिम्मेदारी सौंपी गई है। उनके निर्देशन में गठित जांच समिति हादसे के सभी पहलुओं, सुरक्षा मानकों की अनदेखी और स्थानीय पुलिस की भूमिका की विस्तृत जांच कर रिपोर्ट पेश करेगी। कमिश्नर ने साफ किया कि जनसुरक्षा से जुड़े मामलों में लापरवाही किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई होगी।
अवैध पटाखा फैक्ट्रियों और गोदामों के खिलाफ चलेगा अभियान
इस हादसे के बाद जयपुर पुलिस ने शहरभर में अवैध विस्फोटक सामग्री, पटाखा गोदामों और बिना अनुमति संचालित कारखानों के खिलाफ विशेष अभियान शुरू करने का निर्णय लिया है। पुलिस कमिश्नर ने सभी जिला पुलिस अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में व्यापक सर्वे और निरीक्षण अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं।
निर्देशों के अनुसार थाना स्तर पर बीट अधिकारियों के माध्यम से डोर-टू-डोर सर्वे किया जाएगा। इस दौरान अवैध रूप से विस्फोटक सामग्री संग्रहित करने वाले स्थानों की पहचान कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही प्रत्येक थाना क्षेत्र से विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर पुलिस मुख्यालय को भेजी जाएगी।
नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता
पुलिस कमिश्नर सचिन मित्तल ने कहा कि नागरिकों की सुरक्षा प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन और संपत्ति को खतरे में डालने वाली किसी भी अवैध गतिविधि को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सख्त निवारक कदम उठाए जा रहे हैं और जिम्मेदार लोगों को किसी भी स्थिति में बख्शा नहीं जाएगा।
खो नागोरियान अग्निकांड के बाद पुलिस प्रशासन की इस कार्रवाई को एक महत्वपूर्ण संदेश के रूप में देखा जा रहा है। प्रशासन अब यह सुनिश्चित करने में जुटा है कि शहर में कहीं भी अवैध रूप से विस्फोटक सामग्री का भंडारण या निर्माण न हो, ताकि भविष्य में किसी भी बड़े हादसे को रोका जा सके।
इस हादसे से सबक लेते हुए पुलिस कमिश्नर ने जयपुर शहर के सभी जिला पुलिस अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में अवैध कारखानों, गोदामों और पटाखा भंडारण स्थलों के खिलाफ एक विशेष सर्वे और निरीक्षण अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं।
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डोर-टू-डोर सर्वे: थाना स्तर पर बीट अधिकारियों के माध्यम से घर-घर जाकर अवैध विस्फोटक सामग्री की पहचान की जाएगी।
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पालना रिपोर्ट: सभी अधिकारियों को इस अभियान की प्रगति और की गई कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट एक निश्चित समय सीमा के भीतर मुख्यालय को सौंपनी होगी।
“नागरिकों की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। सार्वजनिक जीवन और संपत्ति को खतरे में डालने वाली किसी भी अवैध गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सख्त निवारक कदम उठाए जा रहे हैं।” – सचिन मित्तल, पुलिस कमिश्नर, जयपुर
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