JSSC-CGL और TDPL परीक्षा रद्द: 16 दिन बाद देवेंद्र महतो ने तोड़ा अनशन, सोनम वांगचुक ने की तारीफ

JSSC-CGL और TDPL परीक्षा रद्द: 16 दिन बाद देवेंद्र महतो ने तोड़ा अनशन, सोनम वांगचुक ने की तारीफ
झारखंड सरकार के फैसले के बाद छात्र आंदोलन की बड़ी जीत, 2014 से हुई परीक्षाओं की भी होगी जांच
झारखंड में लंबे समय से चल रहे छात्र आंदोलन को बड़ी कामयाबी मिली है। राज्य सरकार ने झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की सामान्य स्नातक स्तरीय संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा (CGL) और टेक्निकल डिप्लोमा/पॉलिटेक्निक लेवल (TDPL) से जुड़ी सभी परीक्षाओं, परिणामों और चयन प्रक्रिया को रद्द करने का फैसला लिया है। इस बड़े फैसले के बाद छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने 16 दिनों से जारी अपनी भूख हड़ताल समाप्त कर दी। अनशन खत्म होने के बाद उन्होंने पर्यावरण व सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से वीडियो कॉल पर बात करते हुए उनके प्रति आभार भी जताया।
क्या था पूरा विवाद?
यह विवाद JSSC-CGL परीक्षा में कथित पेपर लीक और गड़बड़ियों के आरोपों से जुड़ा है। साल 2024 में जब यह परीक्षा आयोजित हुई थी, तभी से लाखों अभ्यर्थी इसमें कदाचार और अनियमितताओं के आरोप लगाते रहे थे। इस परीक्षा के लिए राज्य के विभिन्न विभागों में करीब 2,025 पदों पर नियुक्ति के लिए लगभग 6.5 लाख अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था। परीक्षा के तुरंत बाद रांची में JSSC कार्यालय के बाहर हजारों छात्रों ने प्रदर्शन शुरू कर दिया था, जिसमें परीक्षा रद्द करने और पेपर लीक मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई गई थी।
मामला इतना गंभीर हो गया कि अदालत में भी इस पर सुनवाई हुई। राज्य के महाधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि JSSC-CGL प्रश्नपत्र लीक मामले की जांच अब विशेष जांच दल (SIT) करेगी। इसके साथ ही CID की जांच में भी कई अहम तथ्य सामने आए, जिनके आधार पर सरकार ने आगे बड़ा फैसला लेने का मन बनाया।
देवेंद्र महतो की भूख हड़ताल
छात्रों की मांगों को लेकर छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की थी, जो 16 दिनों तक चली। इस दौरान महतो को कई सामाजिक और पर्यावरण कार्यकर्ताओं का समर्थन मिला, जिनमें लद्दाख के जाने-माने कार्यकर्ता सोनम वांगचुक प्रमुख रहे। महतो ने खुद बताया कि वांगचुक के मार्गदर्शन और प्रेरणा से ही उन्हें इस लंबे आंदोलन को जारी रखने की ताकत मिली।
आंदोलन के दबाव में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने छात्रों से सीधी बातचीत के लिए उन्हें बुलाया। इस बैठक के बाद ही सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए JSSC-CGL के साथ-साथ TDPL से जुड़ी तमाम परीक्षाओं, परिणामों और चयन प्रक्रिया को रद्द करने की घोषणा कर दी। सरकार के इस ऐलान के बाद महतो ने अपना अनशन समाप्त किया और इसे “छात्रों की मांगों की पूर्ण जीत” करार दिया।
सिर्फ एक परीक्षा नहीं, 2014 से जांच के आदेश
इस मामले में सबसे बड़ी बात यह रही कि झारखंड सरकार ने सिर्फ मौजूदा परीक्षा को रद्द करने तक ही सीमित नहीं रखा, बल्कि साल 2014 से आयोजित हुई परीक्षाओं की भी जांच का फैसला लिया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के मुताबिक, CID और SIT की पड़ताल में ऐसे कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं जिनसे कथित तौर पर पिछले वर्षों की परीक्षाओं में भी गड़बड़ी की आशंका जताई गई है। इसका मतलब है कि आने वाले समय में झारखंड की भर्ती परीक्षाओं से जुड़ी पूरी व्यवस्था की गहराई से समीक्षा हो सकती है।
सोनम वांगचुक की प्रतिक्रिया
अनशन खत्म होने की खबर मिलते ही सोनम वांगचुक ने छात्रों के संघर्ष और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के फैसले दोनों की सराहना की। वांगचुक ने कहा कि यह जीत दिखाती है कि जब छात्र संगठित होकर, शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखते हैं, तो सरकारों को झुकना पड़ता है। उन्होंने यह भी उम्मीद जताई कि झारखंड सरकार भविष्य में भर्ती परीक्षाओं को और अधिक पारदर्शी बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाएगी।
देवेंद्र महतो ने वांगचुक के साथ हुई वीडियो कॉल में कहा कि यह जीत सिर्फ उनकी नहीं, बल्कि लाखों उन छात्रों की है जिन्होंने वर्षों तक निष्पक्ष परीक्षा प्रणाली के लिए इंतजार किया। उन्होंने आगे भी छात्रों के हितों के लिए आवाज उठाते रहने की बात कही।
दिल्ली के आंदोलन से जुड़ाव
गौरतलब है कि यह जीत उस समय आई है जब हाल ही में दिल्ली में भी छात्रों के एक आंदोलन को कामयाबी मिली थी। मीडिया रिपोर्ट्स में इसे “दिल्ली के बाद अब झारखंड में भी आंदोलनकारी छात्रों की जीत” के तौर पर पेश किया जा रहा है। इससे यह संकेत मिलता है कि देशभर में परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता को लेकर छात्रों में जागरूकता और एकजुटता बढ़ रही है, और सरकारें भी इन आंदोलनों को गंभीरता से ले रही हैं।
आगे की राह
हालांकि परीक्षाएं रद्द हो चुकी हैं, लेकिन अभी भी कई सवाल बाकी हैं — जैसे नई परीक्षा कब आयोजित होगी, पेपर लीक के दोषियों पर क्या कार्रवाई होगी, और 2014 से जांच में क्या नतीजे निकलते हैं। छात्र संगठनों की मांग है कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष हो और भविष्य में ऐसी गड़बड़ियां रोकने के लिए ठोस कानूनी ढांचा भी तैयार किया जाए।
क्यों है यह खबर महत्वपूर्ण?
यह घटना झारखंड ही नहीं, बल्कि देशभर के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत है। पहला, यह दिखाता है कि संगठित और शांतिपूर्ण छात्र आंदोलन सरकारों को नीतिगत फैसले बदलने पर मजबूर कर सकते हैं। दूसरा, भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक और कदाचार की समस्या अब सिर्फ एक राज्य की नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर की चिंता का विषय बन चुकी है। तीसरा, सोनम वांगचुक जैसे सामाजिक कार्यकर्ताओं की भागीदारी से यह भी साबित होता है कि छात्र आंदोलनों को अब व्यापक सामाजिक समर्थन मिल रहा है, जो आगे की नीति-निर्माण प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है।
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