कासगंज रिटायर्ड पुलिसकर्मी के कमरे में बंद होने से मचा हड़कंप
कासगंज रिटायर्ड पुलिसकर्मी बाबूराम मंगलवार सुबह अपने नाती दिविजय राजपूत के साथ कासगंज के सहावर गेट क्षेत्र स्थित एक निजी मकान के कमरे में बंद हो गए। कमरे का दरवाजा अंदर से बंद होने और अंदर लाइसेंसी बंदूक होने की सूचना के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया।
बताया गया कि कमरे के अंदर से नाती और पुलिसकर्मियों को गोली मारने की धमकी दिए जाने की बात सामने आई। सूचना मिलते ही कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को संभालने के प्रयास शुरू कर दिए।
पुलिस ने पूरे मामले में बेहद सतर्कता बरती। प्राथमिकता कमरे के अंदर मौजूद नाबालिग की सुरक्षा सुनिश्चित करना और बिना किसी अप्रिय घटना के दोनों को बाहर निकालना रही।

सुबह सात बजे से कमरे में बंद थे दोनों
जानकारी के अनुसार 67 वर्षीय बाबूराम सुबह करीब सात बजे अपने नाती दिविजय के साथ राजपूत डेंटल वाली गली स्थित निजी मकान के एक कमरे में गए थे। इसके बाद उन्होंने दरवाजा अंदर से बंद कर लिया।
काफी देर तक दरवाजा नहीं खुलने पर आसपास के लोगों ने मामले की जानकारी पुलिस को दी। पुलिस टीम मौके पर पहुंची और कमरे के अंदर मौजूद दोनों लोगों से बातचीत करने का प्रयास शुरू किया।
पुलिसकर्मियों ने बाबूराम को समझाने और दरवाजा खोलने के लिए लगातार बातचीत की। परिवार के सदस्यों से भी जानकारी ली गई, ताकि पूरे घटनाक्रम की पृष्ठभूमि को समझा जा सके।
लाइसेंसी बंदूक से धमकी की सूचना
मामले की गंभीरता उस समय बढ़ गई जब कमरे के अंदर लाइसेंसी बंदूक होने और उससे नाती तथा पुलिसकर्मियों को गोली मारने की धमकी दिए जाने की सूचना सामने आई।
इसके बाद पुलिस ने मौके पर सुरक्षा व्यवस्था और अधिक सख्त कर दी। किसी भी संभावित आपात स्थिति से निपटने के लिए फायर ब्रिगेड को भी बुलाया गया।
अधिकारियों की निगरानी में पुलिस टीम लगातार स्थिति पर नजर बनाए रही। आसपास जमा लोगों को भी घटनास्थल से दूर रखने का प्रयास किया गया, ताकि किसी तरह की अतिरिक्त परेशानी न हो।

करीब एक महीने पहले नाती को कासगंज लाए थे
परिजनों के मुताबिक दिविजय राजपूत फर्रुखाबाद स्थित सीपी इंटरनेशनल स्कूल के हॉस्टल में रहकर पढ़ाई करता था। बताया गया कि करीब एक महीने पहले बाबूराम उसे उसके माता-पिता को बिना बताए कासगंज ले आए थे।
परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि बाबूराम नाती की पिटाई करते थे। हालांकि, इन पारिवारिक आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
इसी पारिवारिक पृष्ठभूमि के बीच मंगलवार को दोनों के कमरे में बंद होने की घटना सामने आई। मामले की जानकारी मिलने के बाद बाबूराम के बेटे अविनाश राजपूत भी जयपुर से कासगंज पहुंचे।
पुलिस ने परिजनों से बातचीत कर घटना से संबंधित जानकारी जुटाई और उनके सहयोग से बाबूराम को शांत कराने की कोशिश जारी रखी।

छह घंटे तक नहीं खुला कमरे का दरवाजा
घटना के करीब छह घंटे बाद तक भी पुलिस कमरे का दरवाजा खुलवाने में सफल नहीं हो सकी थी। इस दौरान पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीमें मौके पर मौजूद रहीं।
पुलिसकर्मी लगातार बातचीत के जरिए बाबूराम को समझाने में जुटे रहे। अधिकारियों ने किसी भी तरह की जल्दबाजी से बचते हुए शांतिपूर्ण समाधान पर जोर दिया।
लाइसेंसी हथियार कमरे के अंदर होने की सूचना के कारण पुलिस के लिए स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई थी। नाती की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए हर कदम सावधानी से उठाया जा रहा था।

पत्नी की वर्ष 2021 में हुई थी मौत
परिजनों के अनुसार बाबूराम की पत्नी का वर्ष 2021 में बीमारी के चलते निधन हो चुका है। इसके बाद परिवार से जुड़े कई मामले उनके जीवन का हिस्सा रहे।
दिविजय फर्रुखाबाद में रहकर पढ़ाई कर रहा था। करीब एक महीने पहले उसे कासगंज लाए जाने की जानकारी परिजनों को बाद में हुई।
मंगलवार को घटना की जानकारी मिलते ही परिवार के सदस्य भी मौके पर पहुंचे। पुलिस अधिकारियों ने परिजनों से बातचीत कर स्थिति को सामान्य करने में उनका सहयोग लिया।
पुलिस और फायर ब्रिगेड मौके पर तैनात
सूचना मिलते ही कोतवाली पुलिस के साथ फायर ब्रिगेड की टीम भी मौके पर पहुंच गई। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए आवश्यक तैयारियां रखी गईं।
पुलिस की कोशिश रही कि बातचीत के माध्यम से बाबूराम को समझाया जाए और कमरे का दरवाजा खुलवाया जाए। अधिकारियों का मुख्य उद्देश्य नाती को सुरक्षित बाहर निकालना और किसी भी अप्रिय घटना को रोकना रहा।
मौके पर स्थानीय लोगों की भीड़ जुटने लगी थी। पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करते हुए घटनास्थल के आसपास सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखी।

सुरक्षित समाधान को प्राथमिकता
कासगंज रिटायर्ड पुलिसकर्मी से जुड़े इस मामले में पुलिस फिलहाल बातचीत के जरिए समाधान निकालने पर जोर दे रही थी। अधिकारियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती कमरे के अंदर मौजूद नाती की सुरक्षा सुनिश्चित करना थी।
पुलिस परिवार के सदस्यों से लगातार जानकारी ले रही थी और बाबूराम से संपर्क स्थापित करने की कोशिश कर रही थी।
मामले की वास्तविक वजह क्या है, यह कमरे का दरवाजा खुलने और दोनों के सुरक्षित बाहर आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित रखने के लिए मौके पर पर्याप्त सतर्कता बरती।
घटना को लेकर उठ रहे सवाल
इस पूरे घटनाक्रम के बीच कई सवाल भी सामने आए हैं:
- बाबूराम ने नाती के साथ कमरे में खुद को बंद क्यों किया?
- कमरे के अंदर लाइसेंसी बंदूक लेकर जाने की वजह क्या थी?
- नाती को करीब एक महीने पहले बिना माता-पिता को बताए कासगंज क्यों लाया गया?
- परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों की वास्तविकता क्या है?
- पुलिस की बातचीत के बावजूद दरवाजा खोलने में इतना समय क्यों लगा?
इन सवालों के जवाब पुलिस की आगे की जांच और दोनों के सुरक्षित बाहर आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगे।
प्रशासन की प्राथमिकता सुरक्षा
ऐसी संवेदनशील स्थिति में पुलिस के सामने सबसे बड़ी प्राथमिकता किसी भी व्यक्ति को नुकसान से बचाना होती है। इसी वजह से पुलिस ने तत्काल कार्रवाई के बावजूद जल्दबाजी से बचते हुए बातचीत का रास्ता अपनाया।
फायर ब्रिगेड की मौजूदगी और पुलिस अधिकारियों की निगरानी में स्थिति पर नजर रखी गई। परिवार के लोगों को भी पुलिस के साथ सहयोग करने के लिए कहा गया।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीमें मौके पर मौजूद थीं और सुरक्षित समाधान के प्रयास जारी थे।
निष्कर्ष
कासगंज रिटायर्ड पुलिसकर्मी बाबूराम के नाती के साथ कमरे में बंद होने और लाइसेंसी बंदूक से धमकी की सूचना के बाद इलाके में हड़कंप की स्थिति बन गई। सुबह करीब सात बजे से दोनों के कमरे में बंद होने के बाद पुलिस ने कई घंटे तक दरवाजा खुलवाने की कोशिश की।
फायर ब्रिगेड को भी मौके पर बुलाया गया। पुलिस ने परिवार के सदस्यों की मदद से बातचीत के जरिए स्थिति को शांतिपूर्ण तरीके से समाप्त करने का प्रयास किया।
फिलहाल घटना की पूरी वजह और कमरे के अंदर की वास्तविक स्थिति स्पष्ट नहीं है। पुलिस की प्राथमिकता दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। आगे की कार्रवाई दोनों के सुरक्षित बाहर आने और पूरे मामले की जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
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