युवक को छुड़ाने के नाम पर दो लाख वसूली, Bhim Army नेता पर आरोप
Bhim Army नेता पर आरोप:
बरेली जिले में युवक को छुड़ाने के नाम पर कथित रूप से दो लाख रुपये की वसूली का मामला सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है। इस मामले में भीम आर्मी से जुड़े कुछ कथित नेताओं पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया है कि उनके भाई को पुलिस मामले से छुड़ाने का भरोसा देकर उनसे बड़ी रकम ली गई, लेकिन काम नहीं होने के बाद भी पूरी रकम वापस नहीं की गई। मामले से जुड़ी एक ऑडियो रिकॉर्डिंग भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है, जिसने पूरे प्रकरण को और अधिक चर्चा में ला दिया है।

जानकारी के अनुसार मामला बहेड़ी थाना क्षेत्र के भौना गांव का है। गांव निवासी ताहिर ने आरोप लगाया कि उनके भाई को एक मामले से बाहर निकलवाने का आश्वासन दिया गया था। इसके बदले चौपुला निवासी सुशील गौतम समेत पांच लोगों ने उनसे दो लाख रुपये की मांग की। पीड़ित परिवार ने भरोसा करते हुए रकम दे दी। आरोप है कि बाद में जब कोई कार्रवाई नहीं हुई और युवक को राहत नहीं मिली, तब परिवार ने अपने पैसे वापस मांगे।

ताहिर के मुताबिक आरोपियों ने एक लाख रुपये वापस कर दिए, लेकिन बाकी एक लाख रुपये लौटाने से इनकार कर दिया। जब परिवार ने दबाव बनाया तो कथित तौर पर कहा गया कि शेष रकम वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) कार्यालय के पीआरओ को दे दी गई है। इसी दावे से जुड़ी एक ऑडियो रिकॉर्डिंग सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है, जिसमें एक युवक कथित तौर पर यह कहते हुए सुनाई दे रहा है कि “पीआरओ को एक लाख रुपये दिए गए हैं” और “रात आठ बजे तक इंतजार कर लो”। ऑडियो में यह भी कहा गया कि यदि ताहिर खुद वहां जाएंगे तो उन्हें भी बैठा लिया जाएगा।
ऑडियो वायरल होने के बाद मामला तेजी से सुर्खियों में आ गया। सोशल मीडिया पर लोग इस मामले को लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कुछ लोग इसे पुलिस और कथित बिचौलियों की मिलीभगत का मामला बता रहे हैं, जबकि कई लोग पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। हालांकि वायरल ऑडियो की सत्यता की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है, लेकिन इसके सामने आने के बाद पुलिस प्रशासन भी सतर्क हो गया है।
पीड़ित परिवार ने पूरे मामले की शिकायत वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अनुराग आर्य से की है। शिकायत मिलने के बाद एसएसपी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के निर्देश दिए हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वायरल ऑडियो की भी जांच कराई जाएगी और यदि किसी व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
इस मामले ने एक बार फिर उन कथित बिचौलियों और स्वयंभू नेताओं की भूमिका पर सवाल खड़े कर दिए हैं, जो लोगों की मजबूरी का फायदा उठाकर पैसे वसूलने का काम करते हैं। अक्सर देखा जाता है कि किसी कानूनी या पुलिस मामले में फंसे लोगों को जल्द राहत दिलाने के नाम पर उनसे मोटी रकम ऐंठ ली जाती है। बाद में जब काम नहीं होता, तब पीड़ित परिवार खुद को ठगा हुआ महसूस करता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति किसी की परेशानी का फायदा उठाकर इस तरह की ठगी न कर सके। वहीं पुलिस प्रशासन का कहना है कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष होगी और साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल पूरे जिले में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। अब सभी की नजर पुलिस जांच पर टिकी है कि आखिर वायरल ऑडियो और कथित वसूली के पीछे की सच्चाई क्या है और इस मामले में किन लोगों की भूमिका सामने आती है।

