Collector Rakhi Sahay ने किया करकेली वाड़ी परियोजना निरीक्षण, आदिवासी किसानों को लाभ
Collector Rakhi Sahay: उमरिया जिले के बरही उजान क्षेत्र में नाबार्ड मध्यप्रदेश क्षेत्रीय कार्यालय द्वारा संचालित “करकेली वाड़ी परियोजना” आदिवासी किसानों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का कार्य कर रही है। जनजातीय विकास निधि (टीडीएफ) के अंतर्गत संचालित इस महत्वाकांक्षी परियोजना का हाल ही में जिला कलेक्टर श्रीमती राखी सहाय ने भौतिक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने परियोजना के कार्यों का अवलोकन करते हुए इसे आदिवासी समुदाय के आर्थिक और सामाजिक उत्थान की दिशा में एक प्रेरणादायी पहल बताया।

इस परियोजना का संचालन रिएक्ट संस्था द्वारा किया जा रहा है। निरीक्षण के दौरान संस्था के परियोजना प्रबंधक पंकज कुमार सिंह ने परियोजना की विस्तृत जानकारी अधिकारियों को दी। उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत 450 आदिवासी किसानों की बंजर भूमि को उपयोगी बनाते हुए वहां फलदार पौधों का रोपण कराया गया है। प्रत्येक किसान की भूमि पर 30 आम्रपाली प्रजाति के आम और 27 एल-49 प्रजाति के अमरूद के पौधे लगाए गए हैं। इस पहल का उद्देश्य किसानों को दीर्घकालिक आय का साधन उपलब्ध कराना और उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाना है।
परियोजना की सबसे खास बात यह है कि इसमें केवल खेती तक ही सीमित न रहकर भूमिहीन आदिवासी परिवारों को भी रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए गए हैं। योजना के अंतर्गत 50 भूमिहीन आदिवासी किसानों को मुर्गी पालन और बकरी पालन से जोड़कर आजीविका सहयोग प्रदान किया गया है। इससे इन परिवारों को नियमित आय प्राप्त होने लगी है और उनकी आर्थिक निर्भरता कम हुई है।
इसके अलावा परियोजना के तहत जल संरक्षण के कार्यों को भी प्राथमिकता दी गई है। क्षेत्र में जल संरचनाओं के निर्माण और संरक्षण से खेती के लिए पानी की उपलब्धता बढ़ी है। किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है, जिससे वे बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकें। अंतरवर्तीय फसल के लिए बीज वितरण की व्यवस्था की गई है, ताकि किसान अतिरिक्त फसल उत्पादन कर अपनी आय बढ़ा सकें। साथ ही समय-समय पर स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन भी किया जा रहा है, जिससे ग्रामीणों को स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ मिल सके।
कलेक्टर श्रीमती राखी सहाय ने निरीक्षण के दौरान किसानों से चर्चा कर परियोजना से हो रहे लाभों की जानकारी ली। किसानों ने बताया कि पहले उनकी जमीन बंजर पड़ी रहती थी, लेकिन अब फलदार पौधों के कारण भविष्य में अच्छी आय की उम्मीद जगी है। कई किसानों ने यह भी बताया कि तकनीकी प्रशिक्षण और मार्गदर्शन मिलने से खेती के प्रति उनका आत्मविश्वास बढ़ा है।
निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने परियोजना के कार्यों की सराहना करते हुए अधिकारियों और संस्था के प्रतिनिधियों को योजनानुसार कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यह परियोजना आदिवासी समुदाय के लिए आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में एक मजबूत कदम है। उन्होंने किसानों को नियमित प्रशिक्षण देने तथा कृषि विशेषज्ञों द्वारा समय-समय पर मार्गदर्शन उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया।
इस अवसर पर मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत अभय सिंह, नाबार्ड जिला विकास प्रबंधक हिमांशु शुक्ला, अग्रणी जिला प्रबंधक उमरिया सेवकराम सोनवानी तथा पीटीडीसी अध्यक्ष शंभू प्रसाद भी उपस्थित रहे। सभी अधिकारियों ने परियोजना के सकारात्मक परिणामों को देखते हुए इसे क्षेत्र के विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया।
“करकेली वाड़ी परियोजना” न केवल किसानों की आय बढ़ाने का माध्यम बन रही है, बल्कि आदिवासी समुदाय को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। यदि इसी प्रकार योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन जारी रहा, तो आने वाले समय में यह परियोजना ग्रामीण विकास और जनजातीय उत्थान का एक आदर्श मॉडल साबित हो सकती है।

