बिना License चल रहे जार वाटर प्लांट, जनता की सेहत से खिलवाड़
जिला मुख्यालय सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में इन दिनों बिना लाइसेंस संचालित हो रहे जार वाटर प्लांट लोगों की सेहत के लिए बड़ा खतरा बनते जा रहे हैं। शहर में करीब दो दर्जन से अधिक जार वाटर प्लांट संचालित हो रहे हैं, लेकिन इनमें भरकर सप्लाई किए जाने वाले पानी की गुणवत्ता कैसी है, यह जांचने और बताने वाला कोई जिम्मेदार नजर नहीं आ रहा। शुद्ध पेयजल के नाम पर लोगों तक पहुंचाया जा रहा पानी वास्तव में कितना सुरक्षित है, इसको लेकर प्रशासनिक स्तर पर गंभीरता दिखाई नहीं दे रही है।

शहर के घरों, दुकानों, कार्यालयों, होटल-रेस्टोरेंटों से लेकर शादी समारोहों और अन्य आयोजनों तक इन जारों का उपयोग तेजी से बढ़ा है। खासकर गर्मी और शादी सीजन में इनकी मांग कई गुना बढ़ जाती है। बताया जा रहा है कि प्रतिदिन लगभग 5 से 7 लाख लीटर पानी जारों के माध्यम से लोगों तक पहुंचाया जा रहा है। बावजूद इसके पानी की शुद्धता की जांच, फिल्ट्रेशन प्रक्रिया और लाइसेंस संबंधी नियमों की खुलेआम अनदेखी हो रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अधिकांश प्लांट बिना किसी वैध अनुमति के संचालित हो रहे हैं। कई स्थानों पर सामान्य बोरिंग या टैंकर के पानी को मामूली फिल्टरिंग के बाद जारों में भरकर सप्लाई किया जा रहा है। इन जारों की साफ-सफाई और सैनिटाइजेशन की प्रक्रिया भी संदेह के घेरे में है। कई बार जारों में गंदगी और बदबू की शिकायतें भी सामने आती रही हैं, लेकिन जिम्मेदार विभागों ने कभी गंभीर जांच नहीं की।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि दूषित पानी मानव शरीर के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। इससे टाइफाइड, डायरिया, पीलिया, पेट संक्रमण और अन्य गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इसके बावजूद खाद्य एवं औषधि विभाग, नगर पालिका और स्वास्थ्य विभाग की ओर से नियमित जांच अभियान नहीं चलाए जा रहे। यही वजह है कि आमजन की सेहत भगवान भरोसे चल रही है।
शादी सीजन में जार वाले पानी की मांग सबसे अधिक रहती है। गांवों से लेकर शहर तक बड़े आयोजनों में इन्हीं जारों का उपयोग किया जा रहा है। आयोजकों को यह तक जानकारी नहीं होती कि सप्लाई किया गया पानी किस प्लांट से आया है और उसकी गुणवत्ता क्या है। लोग केवल सुविधा और कम कीमत देखकर पानी मंगवा लेते हैं, जबकि इसके पीछे छिपे खतरे को नजरअंदाज कर दिया जाता है।
सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि इन प्लांटों की अनुमति और निगरानी की जिम्मेदारी तय होने के बावजूद विभाग एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालते नजर आते हैं। नगर पालिका, खाद्य विभाग और प्रदूषण नियंत्रण विभाग जैसे कई विभाग इस प्रक्रिया से जुड़े हैं, लेकिन समन्वय के अभाव में कार्रवाई नहीं हो पा रही।
इस मामले में नगर पालिका इंजीनियर देव कुमार गुप्ता ने कहा कि, “मेरे नॉलेज में अभी तक किसी के पास प्लांट की अनुमति नहीं है और इसके लिए नगर पालिका के अलावा अन्य विभाग भी जिम्मेदार होते हैं।” वहीं नगर पालिका सीएमओ किशन सिंह का कहना है कि, “मेरी जानकारी में केवल दो लोगों के पास ही अनुमति है। सभी की जानकारी मंगाई जाएगी और जो भी अनियमितता मिलेगी, उस पर कार्रवाई की जाएगी।”
हालांकि जिम्मेदार अधिकारियों के इन बयानों से यह साफ हो गया है कि लंबे समय से बिना अनुमति के जार वाटर प्लांट संचालित हो रहे हैं और प्रशासन को इसकी जानकारी होने के बावजूद ठोस कार्रवाई नहीं की गई। ऐसे में सवाल यह उठता है कि आखिर आमजन की सेहत से हो रहे इस खिलवाड़ की जिम्मेदारी कौन लेगा? लोगों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने का दावा करने वाले विभाग आखिर कब जागेंगे और कब इन अवैध प्लांटों पर कार्रवाई होगी, यह आने वाला समय ही बताएगा।
Read More : पूर्व मंत्री हाजी इकराम कुरैशी की मौजूदगी में 23 जोड़ों का हुआ सामूहिक निकाह

