बरेली के DM अविनाश सिंह पहुंचे तहसील में E-Bus से
सादगी ने जीता लोगों का दिल
बरेली में शनिवार को एक अलग ही तस्वीर देखने को मिली, जब जिलाधिकारी अविनाश सिंह संपूर्ण समाधान दिवस में शामिल होने के लिए ई-बस से तहसील पहुंचे। आमतौर पर बड़े अधिकारियों का लंबा काफिला और कई गाड़ियों के साथ पहुंचना लोगों के लिए सामान्य बात होती है, लेकिन इस बार डीएम ने सादगी और पर्यावरण संरक्षण का अनोखा संदेश दिया। उनके साथ एडीएम समेत कई वरिष्ठ अधिकारी भी bus में मौजूद रहे। जैसे ही bus तहसील परिसर में पहुंची, वहां मौजूद फरियादी और आमजन कुछ पल के लिए हैरान रह गए। लोगों को विश्वास ही नहीं हुआ कि जिले के सबसे बड़े अधिकारी आम लोगों की तरह bus में सफर करके तहसील पहुंचे हैं।

डीएम अविनाश सिंह का यह कदम केवल एक यात्रा नहीं बल्कि ऊर्जा संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा की दिशा में एक मजबूत संदेश माना जा रहा है। उन्होंने यह साबित किया कि यदि प्रशासनिक अधिकारी खुद बदलाव की शुरुआत करें तो समाज में भी सकारात्मक परिवर्तन आ सकता है। तहसील परिसर में bus से उतरते हुए डीएम को देखकर लोगों ने उनकी सादगी की जमकर सराहना की। कई लोगों ने कहा कि पहली बार किसी जिलाधिकारी को इस तरह bus में सफर करते देखा है।
जिलाधिकारी पहले भी ईंधन बचत और सादगी को बढ़ावा देने के लिए चर्चा में रह चुके हैं। इससे पहले उन्होंने अपने एस्कॉर्ट वाहन हटाकर फिजूल ईंधन खर्च रोकने का संदेश दिया था। अब उनका bus से तहसील पहुंचना प्रशासनिक व्यवस्था में नई सोच का प्रतीक बन गया है। अधिकारियों के अनुसार डीएम चाहते हैं कि सरकारी कार्यों में अनावश्यक संसाधनों की बर्बादी रोकी जाए और पर्यावरण को बचाने के लिए हर संभव प्रयास किया जाए।
तहसील परिसर में मौजूद लोगों के बीच bus से पहुंचे डीएम की चर्चा पूरे दिन होती रही। कई लोगों ने इसे आम जनता के करीब आने की पहल बताया। लोगों का कहना था कि जब जिले का सबसे बड़ा अधिकारी खुद bus में सफर कर सकता है, तो आम लोगों को भी सार्वजनिक परिवहन का अधिक उपयोग करना चाहिए। इससे न केवल ईंधन की बचत होगी बल्कि प्रदूषण भी कम होगा।

डीएम अविनाश सिंह ने संपूर्ण समाधान दिवस में फरियादियों की समस्याएं गंभीरता से सुनीं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि हर शिकायत का समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने साफ कहा कि जनता की समस्याओं का समाधान प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसमें किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। शिकायतों के निपटारे में देरी करने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई।
सूत्रों के अनुसार डीएम की इस पहल का असर अब अन्य विभागों में भी दिखाई देने लगा है। कलेक्ट्रेट के कई अधिकारी अब साइकिल, शेयरिंग वाहन और bus का उपयोग कर कार्यालय पहुंचने लगे हैं। प्रशासनिक अधिकारियों का मानना है कि यदि सरकारी स्तर पर इस तरह की पहल लगातार जारी रही तो आम जनता भी प्रेरित होगी।
पर्यावरण विशेषज्ञों ने भी डीएम के इस कदम की सराहना की है। उनका कहना है कि बड़े अधिकारी जब खुद bus जैसे सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करते हैं तो समाज में एक सकारात्मक संदेश जाता है। इससे लोगों को यह समझने में मदद मिलती है कि पर्यावरण संरक्षण केवल भाषणों से नहीं बल्कि व्यवहार में बदलाव से संभव है।
बरेली में डीएम अविनाश सिंह की यह पहल अब चर्चा का विषय बन चुकी है। सोशल मीडिया पर भी लोग उनकी सादगी और सोच की तारीफ कर रहे हैं। कई लोगों ने कहा कि देशभर के अधिकारियों को भी इस तरह की पहल करनी चाहिए ताकि ऊर्जा संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा को बढ़ावा मिल सके।
सादगी, जिम्मेदारी और जनसेवा का यह अनोखा उदाहरण लोगों के दिलों को छू गया। डीएम का bus से तहसील पहुंचना सिर्फ एक सफर नहीं बल्कि एक संदेश था कि बदलाव की शुरुआत खुद से करनी चाहिए। यही वजह है कि आज हर तरफ डीएम अविनाश सिंह की इस पहल की चर्चा हो रही है।
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