राजस्थान में मानसून की दस्तक तय, अगले 24 घंटे में एंट्री के आसार, 25 जिलों में बारिश-आंधी का अलर्ट
राजस्थान में लंबे इंतजार के बाद अब मानसून की दस्तक लगभग तय मानी जा रही है। बुधवार को दक्षिण-पूर्वी दिशा से आगे बढ़ता हुआ मानसून मध्य प्रदेश की सीमा तक पहुंच गया है और मौसम विभाग के अनुसार अगले 24 घंटों के भीतर इसके राजस्थान में प्रवेश करने की पूरी संभावना है। मानसून के करीब आने के साथ ही राज्य के कई हिस्सों में मौसम का मिजाज बदलने लगा है। कोटा और भरतपुर संभाग के कई इलाकों में तेज हवाओं के साथ बारिश का दौर शुरू हो गया है, जबकि करौली और जयपुर में भी अच्छी बारिश दर्ज की गई।
मौसम विभाग का कहना है कि मानसून के सक्रिय होते ही प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में तापमान में गिरावट आएगी और लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिलेगी। पिछले कई दिनों से प्रदेश के अलग-अलग जिलों में उमस और तेज धूप ने लोगों की परेशानी बढ़ा रखी थी, लेकिन अब बदलते मौसम ने राहत की उम्मीद जगा दी है।
जयपुर में बुधवार को हुई बारिश के बाद मौसम सुहावना हो गया। कई इलाकों में बादल छाए रहे और ठंडी हवाएं चलने से लोगों ने गर्मी से राहत महसूस की। करौली जिले में भी बारिश के कारण तापमान में गिरावट दर्ज की गई। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून के प्रवेश के बाद राजधानी जयपुर सहित पूर्वी राजस्थान के अधिकांश जिलों में लगातार बारिश की गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं।

मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार जुलाई के शुरुआती दो सप्ताह जयपुर और आसपास के क्षेत्रों के लिए काफी महत्वपूर्ण रहेंगे। इस दौरान सामान्य से अधिक बारिश होने की संभावना जताई गई है। अच्छी बारिश से जलाशयों, बांधों और भूजल स्तर में सुधार होने की उम्मीद है। हालांकि विभाग ने यह भी संकेत दिया है कि जुलाई के दूसरे पखवाड़े के बाद मानसून की रफ्तार कुछ कमजोर पड़ सकती है, जिससे बारिश की गतिविधियों में कमी आ सकती है।
मानसून के प्रभाव को देखते हुए मौसम विभाग ने गुरुवार के लिए प्रदेश के 25 जिलों में आंधी और बारिश का अलर्ट जारी किया है। इन जिलों में तेज हवाएं चलने, बिजली गिरने और कुछ स्थानों पर भारी बारिश होने की संभावना व्यक्त की गई है। प्रशासन ने लोगों से खराब मौसम के दौरान सावधानी बरतने और आवश्यक होने पर ही घरों से बाहर निकलने की अपील की है। किसानों को भी मौसम के पूर्वानुमान को ध्यान में रखते हुए कृषि कार्य करने की सलाह दी गई है।
दूसरी ओर, राजस्थान के पश्चिमी हिस्से, विशेष रूप से पाकिस्तान सीमा से सटे जिलों में अभी भी भीषण गर्मी का दौर जारी है। श्रीगंगानगर, बीकानेर, जैसलमेर और बाड़मेर जैसे क्षेत्रों में तापमान सामान्य से काफी अधिक बना हुआ है। बुधवार को श्रीगंगानगर प्रदेश का सबसे गर्म जिला रहा, जहां अधिकतम तापमान लगभग 44 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। जुलाई का महीना शुरू होने के बावजूद इन इलाकों में लू जैसे हालात बने हुए हैं।
मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि जैसे-जैसे मानसून पश्चिमी राजस्थान की ओर आगे बढ़ेगा, वहां भी तापमान में गिरावट आएगी और गर्मी से राहत मिलेगी। हालांकि पश्चिमी जिलों तक मानसून पहुंचने में अभी कुछ समय लग सकता है। तब तक इन क्षेत्रों में लोगों को गर्मी और उमस का सामना करना पड़ेगा।
राजस्थान में मानसून केवल मौसम परिवर्तन का संकेत नहीं होता, बल्कि यह खेती-किसानी, पेयजल व्यवस्था और प्रदेश की अर्थव्यवस्था के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। समय पर और अच्छी बारिश होने से खरीफ फसलों की बुवाई तेज होती है और किसानों को बेहतर उत्पादन की उम्मीद रहती है। वहीं शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में जल संकट से भी राहत मिलने की संभावना बढ़ जाती है।
फिलहाल मौसम विभाग की नजर मानसून की आगे की गति पर बनी हुई है। यदि परिस्थितियां अनुकूल रहीं तो अगले 24 घंटों में राजस्थान में मानसून की औपचारिक एंट्री हो जाएगी और इसके साथ ही प्रदेशभर में बारिश का दायरा लगातार बढ़ने की उम्मीद है। आने वाले कुछ दिन राजस्थान के मौसम और किसानों दोनों के लिए बेहद अहम साबित हो सकते हैं।

