राजस्थान में खेती का नया मॉडल, सोलर पैनल के नीचे फसल और ऊपर बिजली उत्पादन
राजस्थान देश में सौर ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में पहले से ही अग्रणी राज्य माना जाता है। अब प्रदेश सोलर ऊर्जा के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने में भी नई मिसाल कायम करने जा रहा है। जयपुर जिले के बस्सी क्षेत्र के कुंदनपुरा गांव में खेती और बिजली उत्पादन का एक अनोखा मॉडल विकसित किया गया है, जो किसानों की कमाई को कई गुना तक बढ़ाने की क्षमता रखता है। इस मॉडल को एग्रीफोटोवोल्टाइक्स (एग्री-पीवी) कहा जाता है, जिसमें एक ही जमीन पर खेती और बिजली उत्पादन दोनों कार्य एक साथ किए जाते हैं।
कुंदनपुरा गांव के किसान काजोड़मल जाट और उनके पुत्र शिवकुमार के पास करीब तीन एकड़ कृषि भूमि है। पहले इस जमीन पर सामान्य ग्राउंड-माउंटेड सोलर प्लांट लगा हुआ था, जिसमें सोलर पैनल जमीन के काफी नजदीक लगाए गए थे। इससे खेती के लिए जमीन का उपयोग नहीं हो पाता था। बाद में विशेषज्ञों ने इस प्लांट को नई तकनीक के जरिए रेट्रोफिट कर ऊंचाई पर स्थापित किया, जिससे सोलर पैनलों के नीचे पर्याप्त जगह उपलब्ध हो गई और खेती का कार्य भी शुरू किया जा सका।

अब इस खेत में सोलर पैनलों के नीचे मक्का और मिर्च जैसी फसलें उगाई जा रही हैं, जबकि ऊपर लगे सोलर पैनल बिजली तैयार कर रहे हैं। इस प्रकार एक ही जमीन से दोहरी आय प्राप्त हो रही है। उत्पादित बिजली को विद्युत वितरण निगम लिमिटेड को सप्लाई किया जाता है। इसके बदले किसान को प्रति यूनिट लगभग 3.14 रुपए का फीड-इन टैरिफ प्राप्त होता है।
इस अभिनव परियोजना पर इंडियन काउंसिल फॉर रिसर्च ऑन इंटरनेशनल इकोनॉमिक रिलेशंस (ICRIER) की टीम कार्य कर रही है। संस्थान के कृषि वर्टिकल का नेतृत्व प्रसिद्ध कृषि अर्थशास्त्री और पद्मश्री सम्मानित डॉ. अशोक गुलाटी कर रहे हैं। उनके मार्गदर्शन में रिसर्च फेलो शुभोदीप बसु, रिसर्च एसोसिएट बिदिशा बनर्जी और लक्ष्मी शर्मा की टीम इस परियोजना को आगे बढ़ा रही है। परियोजना का औपचारिक उद्घाटन 24 जून को किया जाएगा।
विशेषज्ञों के अनुसार यह मॉडल किसानों की आय में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है। इस प्लांट से प्रतिवर्ष लगभग 8.5 से 9 लाख यूनिट बिजली उत्पादन होने की संभावना है। इससे बिजली बिक्री के माध्यम से किसानों को नियमित और स्थिर आय प्राप्त होगी। वहीं दूसरी ओर खेती से भी उत्पादन जारी रहेगा।
पहले किसान पारंपरिक खेती के जरिए गेहूं और बाजरा जैसी फसलें उगाकर प्रति एकड़ सालाना लगभग 40 से 41 हजार रुपए की कमाई करते थे। लेकिन एग्री-पीवी मॉडल अपनाने के बाद यह आय बढ़कर लगभग 4.5 लाख रुपए प्रति एकड़ प्रतिवर्ष तक पहुंचने की उम्मीद है। यानी किसानों की कुल आय में 8 से 10 गुना तक वृद्धि संभव है।
विशेषज्ञों का मानना है कि राजस्थान जैसे राज्य में, जहां सूर्य की रोशनी भरपूर मात्रा में उपलब्ध है, वहां यह मॉडल किसानों के लिए गेम चेंजर साबित हो सकता है। इससे न केवल कृषि भूमि का बेहतर उपयोग होगा बल्कि स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को भी बढ़ावा मिलेगा। साथ ही किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
राजस्थान में शुरू हुआ यह प्रयोग आने वाले समय में देशभर के किसानों के लिए प्रेरणा बन सकता है। यदि यह मॉडल बड़े स्तर पर अपनाया जाता है तो कृषि और ऊर्जा दोनों क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। यह पहल किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

